दक्षिण कोसल उस मुहिम का हिस्सा है जो वैकल्पिक मीडिया के रूप में हाल ही में उभरी और दिन-प्रतिदिन समाज में अपनी जिम्मेदारियों और चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अपने आपको स्थापित करती जा रही है। सूचना तकनीक की क्रांति ने एक ओर जहां सूचना पर वर्चस्व स्थापित किया है वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया के अनन्त अवसरों को हमारे सामने रखा है। सूचना का इस्तेमाल किस हद तक समाज तथा आम इंसान के चेतना को बनाने में किया जा रहा है इसकी मिसाल हम वर्तमान दुनिया में रंगभेद, जातिवाद, नस्लभेद, पूंजीवाद, समाजवाद, ब्राह्मणवाद, अधिनायकत्ववाद , महिला उत्पीडऩ, बच्चों के साथ अत्याचार, बेरोजगारी, गरीबी, भूखमरी, भय, आतंक, आदिवासियों की दिन प्रतिदिन हत्या, अव्यवस्था के रूप में मंदी, भूमि अधिग्रहण बिल, एट्रोसिटी कानून में संशोधन, भीमा कोरेगांव को लेकर झूठे बवाल, असहिष्णुता, दुर्भिक्षता, भीड़ की हिंसा तथा आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए महंगाई को बढ़ाते हुए नोटबंदी और जीएसटी जैसी खबरों में देख चुके है। सूचना व समाचार पित पत्रकारिता का रूप लेता जा रहा है। हमारे यहां तो विज्ञापन की दुनिया ने अखबारों को अपना दास बना लिया है।

ऐसे समय में अपने विचारों को और राय को सही बनाए रखने के लिए पहल हमें खुद करनी होगी और तैयार करने होंगे ऐसे मंच जहां से हम आम आदमी की जिंदगी और उसकी समस्याओं से जुड़ी खबरों को प्रमुखता के साथ आप तक स्वतंत्र, निष्पक्ष और निडरता के साथ तेजी के साथ पहुंचा सकें, अतएव यह हमारी कोशिश रहेगी की कार्पोरेट जगत और सरकार के दबाव से मुक्त बिना सीमा के पत्रकारिता के वसूलों में खड़े उतरे। आपको सच और आलोचना कड़वा लग सकता लेकिन सत्य है कि आप दक्षिण कोसल खरीद कर पढ़ेंगे और दक्षिण कोसल वेब पत्रिका को हरसंभव मदद करेंगे। और यह भी सूचित करते हैं कि पिछले कई वर्षों से जिन पाठकों को हम नियमित रूप से दक्षिण कोसल पत्रिका पहुंचा रहे हैं वे बकाया राशि, मासिक, वार्षिक तथा आजीवन शुल्क ईमानदारी के साथ जल्दक्षिण कोसल के पते पर भेजें। दक्षिण कोसल के प्रकाशन में हमें काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आप सभी से गुजारिश है कि अपने नैतिक तथा आदर्श वाक्यों के साथ इसे भौतिक रूप से आर्थिक सहयोग तत्काल भेजें। अत: आप सभी से अपील है कि शुल्क व सहयोग को नियमित भेजकर, स्वयं सदस्य बनकर, अन्य पाठकों को सदस्य बनाकर एवं विज्ञापन देकर पत्रकारिता के इस अभियान को जारी रखने में हमें मदद करेंगे। बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी है कि सच बोले और झूठ को नंगा करें।

प्रधान संपादक, स्वामी, प्रकाशक, मुद्रक सुशांत कुमार
सहायक संपादक दिलीप साहू
साहित्य एवं कला संपादक गौहर रजा
सलाहकार संपादक मंडल मोहनदास नैमिशराय,डॉ. विमल खूंटेसंजीव खुदशाह,डॉ. विजय उके,लखन वर्मा,प्रभाकर ग्वाल, तामेश्वर सिन्हा, सलाहकार संपादक,विनय कुमार वासनिक, शशि गणवीर, सलाहकार संपादक
मोहनदास नैमिशराय
डॉ. विमल खूंटे
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लखन वर्मा
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