मुनाफे की मशीन में पिसा बचपन, पीडि़त के पक्ष में फैसला नहीं

कोर्ट ने कारखाना मालिक पर ठोका 2.80 लाख रुपए का जुर्माना

नागेश बोरकर

 

कबीरधाम जिला, ग्राम मंझोली के श्रवण गुड़ उद्योग में 17 वर्षीय किशोर युवक मनोज कुमार की मौत के मामले में न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने कारखाना मालिक श्रवण कुमार चंद्रवंशी को श्रमिक मनोज की मौत और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुख्य जिम्मेदार माना है। पूरे मामले में मृतक के हित में न्यायालय ने कोई फैसला नहीं ले पाया?

कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार

सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि कारखाना मालिक ने ना केवल लापरवाही की, बल्कि कई श्रम नियमों को भी ताक पर रखा और कारखाना को बिना किसी वैध लाइसेंस के चलाया जा रहा था साथ ही गन्ना क्रेशिंग मशीन के गतिशील हिस्सों पर सुरक्षा कवर नहीं था, जिसके कारण किशोर का हाथ पुली और बेल्ट में फंस गया। 

न्यायालय (जिला अतिरिक्त सत्र न्यायालय, अतिरिक्त श्रम न्यायालय) ने यह भी पाया कि 17 वर्षीय किशोर को बिना मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के जोखिम भरे काम पर लगाया गया और उसे कोई सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया गया था घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई और श्रमिकों से जुड़े अनिवार्य रजिस्टर (उपस्थिति, वेतन आदि) नहीं रखे गए थे।

सजा का विवरण (कुल 8 अपराधों के लिए) न्यायालय ने कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 92 के तहत अभियुक्त को कुल 8 अलग-अलग दोषों के लिए दंडित किया है। प्रत्येक अपराध के लिए सजा का विवरण नीचे दी गई तालिका के अनुसार है-
धारा 7 (बिना लाइसेंस संचालन) 2 माह साधारण कारावास 35 हजार रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 7 (ए) (2)(सी) - (प्रशिक्षण का अभाव) 2 माह साधारण कारावास 35 हजार रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 21- (मशीन पर सुरक्षा घेरा न होना) 2 माह साधारण कारावास 35 हजार रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 68- (किशोर का बिना फिटनेस काम) 2 माह साधारण कारावास 35 हजार रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 72- (कार्य समय की सूचना न देना) 2 माह साधारण कारावास 35 हजार रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 73- (उपस्थिति पंजी न रखना) 02 माह साधारण कारावास 35 हजार  रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 88- (दुर्घटना की सूचना न देना) 2 माह साधारण कारावास 35 हजार रुपए तथा 1 माह अतिरिक्त कारावास।
धारा 112- (नियमों का सामान्य उल्लंघन) 2 माह साधारण कारावास।

कुल जुर्माना- अभियुक्त पर कुल 2 लाख 80 हजार रुपए (दो लाख अस्सी हजार रुपये) का अर्थदंड लगाया गया है, अर्थ दंड का भुगतान न करने पर अतिरिक्त एक माह का करवास जो की क्रमश: चलेगा।

घटना की जानकारी

यह घटना आ.प्र.क्र.-05/का.अधि./2024 के अंतर्गत आता है। घटना दिनांक 17 फरवरी 2024 का बताया जा रहा हैं। मृतक को वी.केयर सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल तेलीबांधा, रायपुर में भर्ती कराया गया था। न्यायालय ने बस इतना ही कहा है कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम 1923 की धारा 3 के तहत प्रतिकर प्राप्त करने का अधिकार हैं, इस कारण से प्रतिकर के संबंध में कोई आदेश नहीं किया जा रहा है यह बहुत विरोधाभासी फैसला दिखता है।  

22 फरवरी 2024 को मनोज कुमार की मृत्यु हो गई।  2 मार्च 2024 को यह खबर दैनिक अखबार नवभारत में प्रकाशित हुआ। दीपेश मेश्राम कारखाना निरीक्षक ने कारखाने का निरीक्षण किया।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में भारत के संविधान के अनुच्छेद 39(च) का हवाला देते हुए कहा कि बच्चे राष्ट्र की संपत्ति हैं और उनका शोषण किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कारखाना अधिनियम एक ‘कल्याणकारी कानून’ है और इसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

 


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