राज्यसभा चुनाव: नारी शक्ति पर भरोसा

छत्तीसगढ़ के राज्यसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस का महिला कार्ड

दिलीप साहू

 

इस तरह राज्यसभा चुनाव में महिला नेतृत्व को लेकर सकारात्मक राजनीतिक संकेत देने की कोशिश दोनों दलों की ओर से दिखाई दे रही है। राज्यसभा चुनाव के लिए 5 मार्च को नामांकन दाखिल किए गए और 6 मार्च को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हुई। मतदान 16 मार्च को प्रस्तावित है।

हालांकि इस बार स्थिति कुछ अलग है, क्योंकि छत्तीसगढ़ की दो खाली सीटों के लिए केवल दो ही उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। ऐसे में दोनों का निर्विरोध निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है।

विधानसभा की संख्या बल की स्थिति भी यही संकेत देती है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं। ऐसे में दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशियों को आसानी से राज्यसभा भेजने की स्थिति में हैं।

भाजपा की ओर से उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा ने विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। उनके प्रस्तावक के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक मौजूद रहे। इस मौके पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित कई मंत्री, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाकर मातृशक्ति को सम्मान देने का कार्य किया है और यह निर्णय महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं कांग्रेस की ओर से फूलोदेवी नेताम ने भी विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, विधायक उमेश पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता और कांग्रेस विधायक मौजूद रहे।

कांग्रेस ने फूलोदेवी नेताम को दोबारा उम्मीदवार बनाकर न केवल नारी शक्ति बल्कि आदिवासी नेतृत्व को भी मजबूती देने का संदेश देने की कोशिश की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि फूलोदेवी नेताम लंबे समय से संगठनात्मक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं और राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की आवाज को मजबूती से उठाने का काम करेंगी।

दरअसल, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की जिन दो सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से एक सीट फूलोदेवी नेताम और दूसरी वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी की है, जिनका कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इसी कारण इन सीटों पर नए सदस्यों के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर भले ही राजनीतिक हलचल सीमित दिखाई दे रही हो, लेकिन इस बार दोनों प्रमुख दलों द्वारा महिला उम्मीदवारों को आगे बढ़ाना इस चुनाव की सबसे खास बात बन गई है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि प्रदेश की राजनीति में अब महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को लेकर नई सोच विकसित हो रही है।

इस तरह छत्तीसगढ़ का यह राज्यसभा चुनाव केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दलों की उस सोच को भी दर्शाता है जिसमें नारी शक्ति को लोकतंत्र की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त स्थान देने का प्रयास दिखाई देता है।

 


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