धम्मदूत संघरत्न मानके ने प्रज्ञागिरी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलवाई
प्रज्ञागिरी में धम्मदूत संघरत्न मानके की प्रतिमा स्थापित की जाएं-कन्हैयालाल खोब्रागढ़े
दक्षिण कोसल टीमइस वर्ष डोंगरगढ़ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मलेन 33वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। हालांकि अब यहां दो आयोजन होते हैं लेकिन इसकी शुरूआत बौद्ध भदंत संघरत्न मानके ने आज से 33 वर्ष पहले राजनांदगांव के कुछ महत्वूपूर्ण बौद्ध अनुयायियों के साथ की थी। उन्होंनें सोचा था कि यहां अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना हो, बौद्ध भिक्षु प्रशिक्षण केन्द्र हो, लघु उद्योग हो तथा विशाल वाचनालय हो लेकिन बदलते समय के साथ यह सम्मेलन अब धर्म से हटकर विभिन्न राजनैतिक पार्टियों का अखाड़ा बनता जा रहा है।
राजनैतिक वर्चस्ववाद के कारण एक राजनीति विशेष पार्टी का दबादबा जोरों पर हैं। जो अब सरकार के साथ मिलकर इसके विकास के कार्य में लगे हुए हैं। लेकिन इसका अंतरराष्ट्रीय स्वरूप अपने उददेश्यों से हटकर स्वयंमेव धूसरित होता जा रहा हैं। डोंगरगढ़ के प्रज्ञागिरी बौद्ध तीर्थ स्थल ने सिर्फ डोंगरगढ़ ही नहीं अपितु सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ को एक अलग अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है।
छत्तीसगढ़ में पवित्र सिरपुर सहित अनेक बैद्ध स्थलों पर बौद्ध पूरा अवशेष विद्यमान हैं, इसके बावजूद डोंगरगढ़ की पहाड़ी (नंगाड़ा डोंगरी) अब प्रज्ञागिरी पर्वत शिखर पर विश्व बन्धुत्व शांतिदूत करूणा की मूर्ति, मैत्री के संदेशवाहक सम्यक सम्बुद्ध की विशाल 30 फुट की प्रतिमा समस्त विश्व को शांति का संदेश देते हुए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि बिखेर रही है।
धम्मदूत भदंत संघरत्न मानके ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरूआत की
वरिष्ठ बौद्ध सामाजिक कार्यकर्ता कन्हैयालाल खोब्रागढ़े का कहना है कि भले ही अपरिहार्य कारणों से प्रज्ञागिरी में स्थापित विराट प्रतिमा को लोग अपनी अपनी कृति बताकर प्रशंसा लूटना चाहते हैं किन्तु यह कटु सत्य है कि बुद्ध की विशाल प्रतिमा को स्थापित करके डोंगरगढ़ में 6 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन की शुरूआत परमपूज्यनीय धम्मदूत भदन्त संघरत्न मानके का अथक परिश्रम उनकी बौद्ध धर्म के प्रति आस्था एवं श्रद्धा बौद्धों को अनुपम देन हैं।
इसके निर्माण में हरिश्चन्द्र ऋषिकर का नाम भी शामिल
नंगारा डोंगरी प्रज्ञागिरी का पर्वत विवादों से परे यह कहने में कोई अतिश्याक्ति नहीं कि इसे राजनांदगांव के श्रमिक नेता दिवंगत हरिश्चन्द्र ऋषिकर, बागड़े साहेब, बीपी मेश्राम, केशव रामटेके, सेवक मेश्राम एवं कई अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों का योगदान अविस्मरणीय हैं।
8 वर्ष के अल्पायु में ही चले गए थे जापान
पूज्य भदन्त धम्मदूत संघरत्न मानके, पूज्यनीय माता सीताबाई एवं पूज्य सच्चिदानंद मानके के पुत्र हैं। आप लगभग 8 वर्ष की आयु में माता पिता मित्र सखा एवं सबसे अमूल्य अपनी मातृभूमि भारत से दूर जापान में जाकर पूज्य बौद्ध धम्म गुरूओं के शानिध्य में रहकर ज्ञान की प्राप्ति की। बड़े हुए पढ़े लिखे विद्वान हुए परन्तु मातृभमि एवं बाबासाहब के किए उपकारों को स्मरण करते हुए आपने भारत में अनेक महत्व पूर्ण कार्य किए।
वर्षों पुरानी हैं यहां कि भोजन व्यवस्था
बौद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हरविंदर आजाद कहते हैं कि इस सम्मेलन स्थल पर भोजन दान, धम्म पुस्तकों का सप्रेम भेंट कार्यक्रम साल 2005 से शुरू की गई। रेलवे के लोको पायलट के द्वारा तुमसर जिला भंडारा महाराष्ट्र में धम्म प्रचार के लिए एक संस्था की आवश्यकता महसूस हुई तब ‘द बुद्धा टीचिंग्स फाउंडेशन’ की स्थापना कर संस्था के उद्देश्य धम्म प्रचार व धम्म कार्यक्रम में उपस्थित जनमानस धम्म प्रेमियों की सेवा करना व धम्म सामग्री का वितरण के उद्देश्य से इस संस्था का निर्माण किया और परमपूज्य बाबा साहब की जयंती 14 अप्रेल 2005 में बाबा साहब जयंती के कार्यक्रम में पोहा चाय वितरण व एक छोटी किताब गौतम बुद्ध के उपदेश बनाई और उसे वितरण कर विधिवत इसकी शुरुआत की व जिले के गांव में जाकर धम्म प्रचार किया।
धम्म सामग्री का वितरण किया बाद में बीडीके एफिलेटेड ऑर्गनाइजेशन के द्वारा मुफ्त वितरण पुस्तक भगवान बुद्ध का संदेश संस्था को बड़ी मात्रा में मिली जिसे गांव गांव मेले मंडई में जाकर वितरण किया व धम्म वर्ग ब रविवार धम्म कक्षा का आयोजन किया गया। साल 2008 में आजाद का स्थान्तरण डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में हुआ तो संस्था का कार्य छत्तीसगढ़ में भी बढ़ाया।
ऑल इंडिया एससी एसटी रेलवे एम्प्लॉइज असोसिएशन का है योगदान
इसमें रेलवे की संस्था ऑल इंडिया एस सी, एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन के सहायक आयोजन समिति बनाकर साल 2009 में प्रथम बार रेलवे इंस्टिट्यूट में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य परमपूज्य बाबा साहब आम्बेडकर जी के विचार जनमानस में प्रचारित करना था।
यह कार्यक्रम को निरन्तर अब रेलवे इंजीनियरिंग होस्टल में निरन्तर आयोजित किया जा रहा है साथ ही साथ संस्था द्वारा बहुजन महामानवों की जयंती व परिनिर्वाण दिवस का आयोजन ऑल इंडिया एससी एसटी रेलवे एम्प्लॉइज असोसिएशन के कार्यलय व रेलवे इंस्टीट्यूट व रेलवे सममुदायिक भवन में आयोजित किये जाते हैं।
बहुजन महानायकों का इतिहास साल 2020, बहुजन महानायकों का इतिहास साल 2021 व बहुजन महानायिकों का इतिहास 2022 में प्रकाशित कर वितरण किया। साल 2020 से 2026 तक संविधान जनजागरूकता अभियान के तहत संविधान प्रचारणी सभा के अध्यक्ष एडवोकेट धनीराम बंजारे जी ब सुनील भारद्वाज जी द्वारा मुख्य अतिथि व अन्य मार्गदर्शक से संविधान जनजागृति कार्यक्रम आयोजित कर हजारों संविधान की किताबें वितरित की गई।
द बुद्धा टीचिंग जैसे पुस्तकों का नि:शुल्क होता है वितरण
जापानी संस्था द्वारा निशुल्क पुस्तकें भगवान बुद्ध के उपदेश व द बुद्धा टीचिंग का वितरण मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र में किया गया। 6 फरवरी को हर वर्ष प्रज्ञागिरी में अंतराष्ट्रीय धम्म सम्मेलन का आयोजन होता है। सम्मेलन में महाराष्ट्र मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के धम्म उपासक व उपासिका बड़ी संख्या में डोंगरगढ़ रेल से आते हैं व रात्रि रेलवे स्टेशन के समक्ष धम्म कब्बाली का आयोजन होता है तब संस्था ने 2010 से रेलवे स्टेशन पर चाय पोहा का स्टॉल लगाया। साल 2020 में संस्था ने अनुभव किया कि प्रज्ञागिरी में भोजन दान स्टॉल लगाना चाहिए। इसी वर्ष भोजनदान व धम्म पुस्तकों का नि:शुल्क वितरण शुरू किया जो निरन्तर हर वर्ष होता है इस वर्ष भी प्रज्ञागिरी में धम्म उपासक व उपासिका की सेवा में दोनों स्टॉल लगाने की योजना है।
इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलवाने संकल्प लें
कन्हैयालाल खोब्रागढ़े कहते हैं कि डोंगरगढ़ की प्रज्ञागिरी एवं वहां हर वर्ष 6 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश दुनिया के प्रकाण्ड बौद्ध भिक्षुओं को इस स्थल पर लाने की पवित्र परम्परा पूज्य भदंन्त धम्मदूत मानके ने की हैं, जिसे कोई नहीं भूला सकता। उनकी इच्छा थी कि डोंगरगढ़ में बौद्ध महाविद्यालय की स्थापना हो, भिक्षु प्रशिक्षण केन्द्र हो, लघु उद्योग हो विशाल वाचनालय हो। देश विदेश के लोग यहां पर आकर बौद्ध धर्म का अध्ययन करें तथा यहां से द्वार द्वारा जाकर बुद्ध की मैत्रीय संदेश लोगों तक पहुंचावें। उन्होंने आशा व्यक्त की हैं कि बौद्धजन विवादों झगड़ें को छोड़ एक साथ मिलकर उपरोक्त महान कार्यों को पूरा करने का संकल्प लेंगे।

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