संतान की चाह में अंधविश्वास में फंस कर चले गई जान

संतान की चाह में बैगा (तांत्रिक) के पास गए थे नवदंपति 

दक्षिण कोसल टीम

 

आज आधुनिक युग में भी लोग अंधविश्वास से जकड़े हुए हैं। इसका ताजा उदाहारण छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम बरबसपुर की है। ऐसी आए दिन खबरें मिलती है कि फलाना तांत्रिक बाबा ने इलाज के नाम से लाखों रुपए लूट लिए, तो कहीं सर्प कांटने पर इलाज करते-करते रोगी की जान चली गई।

संतान की चाह में बैगा (तांत्रिक) के पास गए थे नवदंपति 

शादी के एक साल गुजर जाने के बावजूद संतान की प्राप्ति नही होनें के बाद दंपत्ति को तांत्रिक का सहारा लेना उस वक्त महंगा पड़ गया जब झाड़ फूंक के बाद पान खाने से महिला की मौत हो गई वहीं उसके पति को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका उपचार जारी है। मामला कोरबा जिले का है। 

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कोरबा जिले के बरबसपुर गांव में रामाधार पटेल (28 वर्ष) और सुशीला पटेल (27 वर्ष) के शादी के एक साल बीत जाने के बावजूद उन्हें संतान प्राप्ति नही होनें के पश्चात वे संतान की चाह में कोरबा जिले के ही उरगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम जोगिया डेरा में एक तांत्रिक बैगा के पास इलाज कराने पहुंचे। 

दोनों पति पत्नी कुछ दिनों से झाडफ़ूंक का सहारा लेते हुए तांत्रिक के बताए गए नियमों का पालन करते हुए उससे अपना इलाज करवाते आ रहे थे। इसी दौरान पति-पत्नी तांत्रिक बाबा के कहने पर पान में किसी जहरीले दवा का सेवन कर लिया। जिससे दोनों की हालत में बिगड़ते चली गई और फिर महिला की मौत हो गई वहीं उसके पति को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका उपचार जारी है। इस घटना के बाद से तांत्रिक फरार हो गया है। पुलिस टीम आरोपी तांत्रिक की पतासाजी में जुट गई है।

जादू-टोने पर आज भी विश्वास

आज भी लोग जादू-टोना, तंत्र-मंत्र में विश्वास कर अपने रिश्तेदार, भाई-बंधु और आस-पास के लोगों को डायन के नाम से बदनाम करते हैं। जिससे आधुनिक समाज को कलंकित किया जा रहा है। आए दिन जादूटोना, सैतान और डायन के नाम पर महिलाओं की हत्या निरंतर जारी है। सामान्य बीमारी होने पर भी तांत्रिक के पास इलाज कराने जाते हैं, मानसिक बीमारी होने पर तो बहुत बड़ा शैतान या डायन के हाथ समझकर झाड़-फंक और पूजा करते हैं। जिससे धन खर्च तो होता ही है, उसके साथ शारिरिक और मानसिक रूप से मरीज को कष्ट झेलना पड़ता है, यहां तक भी मरीज की जान भी चली जाती है।

संतान के लिए दूसरे के बच्चे की बलि

महिला-पुरुष दोनों के बीच शारीरिक संबंध से मनुष्य जीवन मिलता है। हर दंपति चाहता है कि उनके गोद में भी बच्चा खेले। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि अंधविश्वास में पडक़र झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र कराकर अपनी जान तो गंवाएं साथ ही आस-पास के लोगों को भी तकलीफ दें। कई बार तो संतान प्राप्ति के लिए तांत्रिक के कहने से दूसरे के बच्चे को बलि देकर उस निर्दोष बच्चों की जान ले ली जाती है। संतान नहीं होने की वजह से स्त्री या पुरुष में कोई कमी होती है, इसको दूर करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास जाकर इलाज कराना चाहिए।

समाज को अंधविश्वास से मुक्त होना चाहिए

एंटी सुपरस्टीशन ऑर्गेनाजेशन (एएसओ) के अध्यक्ष टिकेश कुमार ने कहा कि समाज में अंधविश्वास व्याप्त है। इस अंधविश्वास से निकलने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है, इसके साथ अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है। व्यक्ति में वैज्ञानिक दृष्टिकोण होना चाहिए, बिना तर्क के हवा हवाई बातों में नहीं आना चाहिए। किसी ने कह दिया और उसे मान लेने से भी अंधविश्वास को पनाह मिलता है।

टिकेश कहते हैं कि अपनी बुद्धि से सोच-समझकर कार्य करना चाहिए। अगर झाड़-फूंक, पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र से संतान की प्राप्ति नहीं होती है। ऐसा होता तो बैगा (तांत्रिक) के लिए अलग से पढ़ाई होती, डिग्रियां मिलती और तांत्रिक भी डॉक्टर का स्थान पाता। लेकिन ऐसा नहीं है। कोई जादू-टोना, टोनही (डायन), शैतान, प्रेतात्मा नहीं होता, इन्हें आज तक किसी ने नहीं देखा है। जो लोग देखने का दावा करता हंै वे सब भ्रम में सम्मोहित होते हैं।


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