अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर मड़कम हिड़मे की गिरफ्तारी

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस में दन्तेवाड़ा जिला में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी

लिंगाराम कोडोपी

 

अपराध किसी और ने किया पुलिस किसी और को पकड़कर ले गयी। दन्तेवाड़ा की पुलिस इनाम व अपनी पीठ थपथपाने के लिये मर रही हैं। अपराध हिड़मे कवासी ने किया गिरफ्तारी हिड़मे मरकाम की वाहरे दन्तेवाड़ा की पुलिस। जाँच पड़ताल करने के पश्चात गिरफ्तारी होनी चाहिए नकी इनाम के लालच में। पुलिसिया गुंडाराज।

लगता हैं जिला दन्तेवाड़ा की पुलिस प्रशासन बौखला गयी हैं। बगैर नियम के कानून व्यवस्था, ये सब गुंडा राज हैं। पुलिस प्रशासन को शर्म नहीं आ रहीं हैं, पुलिस अधिक्षक से कौन पूछेगा?

यह कैसा जिला हैं जहाँ एक महिला को बगैर वारेंट के जबरन उठाकर गाड़ी में डाला गया और लेकर कहाँ गये कोई सूचना तक नहीं दिया गया।

जिला के पुलिस अधीक्षक अपनी पीठ थपथपाते नहीं थकते कि माओवादियों का कमर तोड़ रहे हैं। लेकिन अपना पीठ थपथपाने के लिए एक महिला को बिना वारेंट व बिना पूछताछ के उठा कर ले गये। दन्तेवाड़ा कि पुलिस आदिवासी महिलाओं के साथ हत्या व बलात्कार करने में सबसे आगे। बलात्कार व हत्या करने के बाद नाम दिया जाता हैं महिला नक्सली थी।

मड़कम हिड़मे बस्तर दन्तेवाड़ा जिला के जेल रिहाई मंच संगठन की उपाध्यक्ष भी हैं। मड़कम हिड़मे एक आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हिड़मे छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व कई विपक्षि  नेताओं से मिल चुकी हैं फिर आज गिरफ्तारी कैसे हुई ?

D.R.G. (जिला सुरक्षा बल ) क्या हैं? इसका प्रमाण पुलिस के पास नहीं हैं। D.R.G. (जिला सुरक्षा बल ) एक तरिके से हिंसक गतिविधियों को बढ़ाने के लिये बनाया गया गैंग हैं। D.R.G. (जिला सुरक्षा बल ) में अगर आपको भर्ती होना हैं तो दो चार आदिवासियों को नक्सल के नाम पर मार दीजिए आपको नौकरी मिलेंगी बहुत सारे पैसे मिलेंगे। D.R.G. (जिला सुरक्षा बल ) में भर्ती के लिये योग्यता की जरूरत नहीं हैं आदिवासियों की हत्या करने व महिलाओं का बलात्कार करने आना चाहिए, इतनी योग्यता जरूरी हैं। 

D.R.G. (जिला सुरक्षा बल ) कोई पुलिस नहीं बल्कि सरेंडर नक्सली हैं, जिनके हाथ पहले से ही अपराध से रंगे हुए हैं, जिनको कानूनी व्यवस्था के विषय में ABCD  पता नहीं हैं उन्हें D.R.G. (जिला सुरक्षा बल ) के नाम से नौकरी दिया जाता हैं। ऐसा करने से बस्तर में शांति आयेगी या हिंसा बढ़ेगा आप ही बताइये? सरेंडर नक्सलियों को नौकरी देना ही हैं तो अस्पताल, शिक्षा विभाग, पशुपालन विभाग इन विभागों के अलावा कई अन्य विभाग हैं जहाँ सरेंडर नक्सलियों को नौकरी दिया जा सकता हैं फिर हथियार चलाने की नौकरी देने की क्या जरूरत हैं। 

सरेंडर नक्सलियों को चलाने का कमान शायद जिले के पुलिस अधीक्षक ने रखा हैं। आज की जो गिरफ्तारी हुई हैं वह गिरफ्तारी शायद पुलिस अधीक्षक के इशारे पर हुई हैं। किसी न किसी सरेंडर नक्सली ने पुलिस अधीक्षक को बोला होगा की मड़कम हिड़मे नक्सलियों के साथ रहती हैं फिर पुलिस अधीक्षक ने आदेश दिया होगा कि मड़कम हिड़मे को उठा लो। आव देखा न ताव सरेंडर महिला नक्सली जो अभी दंतेश्वरी महिला कमाण्डो के नाम से पुलिस प्रशासन  चला रही है, उन महिलाओ ने हिड़मे को उठा लिया। जिले के पुलिस अधीक्षक ने कानूनी व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दिया। 

कानून का सिपाही की कानूनी व्यवस्था की धज्जियां उढ़ायेगा तो कानूनी संतुलन जिले में बनाये रखना मुश्किल हो सकता हैं। आप मुख्य धारा किसे कहते हैं? व्यवस्था के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना ही तो मुख्यधारा हैं फिर मड़कम हिड़मे ने ऐसा कौन सा अपराध किया था जिसके लिये आज गिरफ्तार किया गया? आप सवाले दन्तेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक से पूछ सकते हैं?


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