सुनीता की समकालीन नई कविताएं
नर्स दिवस पर विशेष
दक्षिण कोसल टीमकविताओं में नई हस्ताक्षर सुनीता पिछले कई सालों से छत्तीसगढ़ के चर्चित मजदूरों का अस्पताल ‘शहीद अस्पताल’, दल्ली राजहरा, जिला-बालोद में कार्यरत हैं। वह पिछले कई सालों से नई कविताओं पर कार्य कर रही है। पेशे से नर्स के रूप में कार्यरत सुनीता अस्पताल में अपनी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए करोना महामारी और टीबी जैसे बीमारियों को शिकस्त देने में मदद की है। हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में गुणवत्ता सुधारने के लिए शासकीय सेवा में पदस्थ एमबीबीएस डाक्टरर्स के कौशल वृद्धि हेतु पीजीडीएफएम-पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फेमिली मेडिसिन कोर्स का आयोजन शहीद अस्पताल में किया गया। उन्होंने वेल्लोर अस्पताल के सहयोग से कम्युनिटी चिकित्सा के कार्यशाला में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

(1)
नर्स दिवस
ऐ नर्स क्या है, तेरी जिंदगी,
अंग्रेजी के पांच अक्षरों में,
समेट ली पूरी जिंदगी...
आराम हराम है, सौ - सौ काम है,
फिर भी तू बदनाम है।
ऐ नर्स क्या है तेरी जिंदगी।
जब कोई ना हो साथ,
तब भी तू रहती सदा आस - पास,
गर्भवती हो या टीबी मरीज,
सभी मर्ज का है इलाज,
दवा के साथ दुवा,
और लाती है नर्म मिजाज,
फिर भी लगता है लोगों को
है ये तेरा काम...
अपना दर्द छुपा कर लाती है,
होंठो में मुस्कान,
फिर भी लोग कहते है, है ये तेरा काम,
ऐ नर्स क्या है तेरी जिंदगी,
किसी की अछाई के लिए,
जरा सी चुप्पी तोड़ी तो,
सारी खूबियों को भुलकर,
कर देते हैं बदनाम।।
मां, बाप, भाई, बहन, दोस्त, दुनिया के सारे रिश्ते,
समेट लेती है अपने अंदर,
फिर भी है तू बदनाम,
ऐ नर्स क्या है तेरी जिंदगी,
अंग्रेजी के पांच अक्षरों में समेट ली है जिंदगी!!
(2)
फिर क्यों हो उदास तुम
भरी सी है जिंदगी फिर क्यों हो उदास, तुम मन में मंथन ले के,
ख्वाबों की उड़ान भरके कभी गम का दास्तां ले के,
तो कभी खुशियों की गुब्बारे भर के,
भरी सी है जिंदगी फिर क्यों हो उदास तुम।।
तू चल अकेला हिम्मत साथ ले के,
यादों की बहार भर के आँखों में अरमानों की सीप ले के,
पंखों में उड़ान भर के सब हैं तेरे,
अंदर झांक जरा भीतर भरी सी है जिंदगी,
फिर क्यों हो उदास तुम।।।
(3)
मेरा गर्भ है अधिकार भी मुझे दो
मेरा गर्भ है अधिकार भी मुझे दो,
तुम क्यों निर्णय लेते हो,
मेरे इस सवाल पर,
तुम क्यों बवाल मचाते हो,
हूँ मैं रौनक घर की,
फिर भी तुम मुझे रौंदते हो,
मेरे इस शरीर पर तुम क्यों अधिकार रखते हो,
मेरा गर्भ है अधिकार भी मुझे दो, तुम क्यों निर्णय लेते हो!!!
(4)
टीकाकरण नहीं है धोखा
टीकाकरण नहीं है धोखा, बीमारियों से लडऩे का है तरीका अनोखा,
आओ सुनाऊ कोरोना पॉजिटिव की कहानी,
जब कोरोना संक्रमण आया,
किसी का साया नजर न आया,
मैं अकेला न साथ कोई आया,
इस मंजर से,
मन में अजीब - सा ख्याल आया पल भर में सारे नाते समझाया,
मन फुट- फुट कर रोया,
पर किसे बताऊं या समझाऊ ना खबर किसी को शिशिकियों की मेरी,
क्योंकि कोरोना भाया था मेरा,
इस पजिटिव शब्द ने जीवन के सारे अर्थ समझाया,
पॉजिटिव ने निगेटिव समझाया घर के अंदर से लेकर बाहर,
कोई रिश्ता काम न आया,
कुछ न समझ आया न भाया,
कोई काम न आया अस्पताल के बैड पर,
कुछ लोगों का साया जरूर नजर आया जिसने नि:स्वर्थ अपना धर्म निभाया!!
(5)
कोरोना महामारी
कोरोना महामारी
कोरोना नहीं है कहर,
उसका डर है कहर।
हर व्यक्ति है डरा,
क्योंकि छीन गया है, अपना।।
कोरोना ने हमें डरा कर,
हमारी मन की शक्ति को है छीना,
पर बस कर करोना अब मैं ना डरूंगी,
तुझसे मैं लडूंगी।।
कसम उस खुदा की एक आंसू ना बहाऊंगी,
लाख डरा ले अब ना मैं डरूंगी।।
अरे तू तो भूल गया तू तो एक,
हवा का झोंका है, आज यहां तो कल
कहीं और होगा।।
मिट जायेगा एक दिन तेरा, वो हिस्सा।
जहां पर यह किस्सा।।
डरूंगी नहीं, लडूंगी अब मैं,
एक कदम पीछे ना लूंगी मैं।
जहां है, तू वहीं पर रह कर, लडूंगी अब मैं ।।
बस बहुत हुआ तेरा कहर,
ना डरूंगी, ना ही डरने दूंगी अब मैं,
करोना नहीं है, कहर
उसका डर है, कहर।। ...
(6)
कैंसर
कैंसर
कैंसर है भयानक,
ना पहचानो तो भैया,
अपने शरीर के अंगों को जानो और न तुम घबराओ भैया,
इसका समय पर इलाज संभव है भैय्या।।
न तुम डरना और न डराना,
न तुम डरना और न डराना दीदी सफेद पानी से,
दर्द हो या महावारी में समस्या छोटा हो,
या बढ़ता बेडौल स्तन दीदी तुम इसकी जांच स्वयं करना,
दीदी कैंसर का इलाज संभव है दीदी,
बस तुम समय पर जांच करवाना दीदी।
(7)
डियर पेमेंट
डियर पेमेंट तुम सताती बहुत हो,
महीने के शुरू से आखरी तक रुलाती बहुत हो,
तेरे आने की खुशी से पहले,
तेरे जाने का गम सताती बहुत है,
महीने भर कमाने के बाद,
तेरा हाथ में ना आना रात भर जगाती बहुत है,
साल भर की मिहनत के बाद,
दिवाली में तेरा बोनस बनकर आना,
बच्चों और मां - बाप की दिलों में जगह बनाती बहुत है,
डियर पेमेंट मेरा वर्तमान और भविष्य,
तुम पर निर्भर है,
गरीबों के घर जल्दी आया कर...
हमनें सुना है,
गरीबों की दुआ और हाय लगती बहुत है,
डियर पेमेंट तुम सताती बहुत हो,
महीने के शुरू से आखिरी तक रुलाती बहुत हो!!!
(8)
मां
मां तू है तो मैं हूं,
तेरी हर दुआ में मैं हू,
तेरी खाबों का खरोंदा हूं,
तेरी आशा का विश्वास हूं,
तेरे हर दर्द की दवा भी मैं हूं,
क्योंकि ऐ होठों की ऐ मुस्कान,
मेरी है मां, मां तू है तो मैं हू।।
कवयित्री शहीद अस्पताल में नर्स हैं और दल्ली राजहरा, जिला बालोद में निवासरत हैं।
Your Comment
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13/05/2023
नेताम आर सी
बहुत सुंदर कविताएंकवयित्री सुनीता जी के द्वारा एक आम इंसान की मन की पीड़ा भी है। जिम्मेदारी भी है कर्तव्य का एहसास भी है।लाल जोहार
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