धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों व समूहों को बहिष्कृत
बस्तर का बहिष्कृत भारत
दक्षिण कोसल टीमगांव के पटेल, गायता, पुंजारी, पेरमा उपस्थित थे और कुटुम्ब वाले जिसमें मेरा जेठ कोस्का मुझे प्रताडि़त करने में प्रमुख था, उनके दबाव के कारण और जब बच्चे लोग मुझसे लिपटकर रोने लगे तब घर वापसी कर लूंगी ऐसा कहकर मैं अपने जान बचाने अपने दीदी के पास किलेपाल भागकर आ गयी। मेरे जेठ द्वारा पत्थर लेकर मुझे मारने दौड़ाया, मेरा पति घर पर ही था लेकिन उसने नहीं रोका, मेरा पति एक दूसरी औरत के साथ शादीशुदा जीवन जी रहा है तथा वह आरएसएस से भी जुड़ा हुआ है। दोनों तरफ के बच्चों का पढ़ाई -लिखाई और देखभाल नहीं करता है। मैंने प्रताडऩा से तंग आकर घर के बाहर लेकिन पास में ही एक झोपड़ी बनाया, मुझे पति के हिस्से का खेत नहीं मिला लेकिन गांव में ही मेरे पिताजी के नाम से स्थित जमीन में वनोपज संग्रहण कर जीवन-यापन कर रही हूं। मेरे घर में बिजली नहीं दिया जा रहा है तथा पीने के पानी भी गांव के सार्वजनिक स्थान से नहीं लेने दिया जाता है।

अप्रैल 2022 में पीयूसीएल छत्तीसगढ़ ने कुछ अन्य संगठनों के साथ मिलकर अल्पसंख्यक इसाई आदिवासियों पर जारी हिंसा और अत्याचार पर एक तथ्यान्वेशन कार्य को पूरा किया है। जांच दल ने जो ज़मीनी हकीकत पाया, उसको ‘बस्तर का बहिष्कृत भारत’ अल्पसंख्यक इसाई आदिवासियों पर अनवरत जारी हिंसा और अत्याचारों पर लेखा-जोखा नाम का एक रिपोर्ट जारी किया है। जिसमें लगभग 122 घटना व बयान शामिल हैं। बयान के साथ साथ रिपोर्ट में दी गई ग्राम सभाओं द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव, आदेश व शपथ पत्र के नमूने यह साबित करती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों पर ऐसी हिंसा का जड़ असल में हिंदुत्व का सांस्कृतिक आक्रमण है।
ऐसे महौल में ग्राम सभाओं को भी पुरातन जाति व्यवस्था के पुनर्स्थापना के लिये दुरुपयोग किया जाना आसान हो जाता है, जिससे गांव के सामाजिक आर्थिक व्यवस्था में गैर हिन्दू अथवा विभिन्न जीवन शैली और धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों व समूहों को बहिष्कृत किया जाता है। '00दक्षिण कोसल'00 उपरोक्त रिपोर्ट को धारावाहिक प्रकाशित कर रहा है। आप सभी सुधी पाठक इस रिपोट के साथ बने रहिये।
15. अ. देवा सोड़ी
कामा सोड़ी, 24 वर्ष, व. गंगा मडिय़ामी/कोसा, 25 वर्ष, गॉव एटपाल, थाना गादीरास, जिला सुकमा, घटना स्थल एटमा, घटना - 3 फरवरी 2022
हम लोग ग्राम एटपाल के निवासी हैं। 3 फरवरी 2022 को गांव के ही सोड़ी मुया, पोडिय़ामी कोसा सहित 20 -25 लोग हमारे घर में तोडफ़ोड किए और घर में पाले मुर्गी और बत्तख आदि ले गए। इस घटना की सूचना हम लोगों ने थाने में दी। जिस पर 8 फरवरी 2022 को पुलिस वालों ने गांव में आकर हमारी नुकसान की भरपाई करने को कहा लेकिन ऐसा नहीं किया गया बल्कि हम लोगों को गांव छोडक़र जाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। गांव में गोंड़ी समाज के कुल 100 परिवार के आसपास लोग हैं जबकि मसीही परिवारों की संख्या 12 के आसपास हैं।
हम लोगों को प्रताडि़त करने वाले समुदाय के लीडर लोग सीपीआई से जुड़े हुए हैं। 3 अप्रैल 2022 को जनपद कोरा के सामने वारसे नन्दा को सोड़ी मुया जो उप सरपंच ग्राम पंचायत कोर्रा (एटपाल) का है, ने यह आरोप लगाते हुए डण्डा से मारा कि तुम लोग यीशु धर्म को मानते हो। हम लोगों को तेन्दुपत्ता भी तोडऩे नहीं दिया जा रहा है। मैं और मेरे पति मिलकर साल 2019 में 650 गड्डी तेन्दु पत्ता तोड़े थे और हम लोगों ने फड़ में जमा भी किया लेकिन वहां के प्रबन्धक ने हमें कुछ भी भुगतान नहीं किया है।
16. पाली कवासी
18 वर्ष, गांव-कुन्ना, थाना कुकानार, जिला सुकमा।
मैं कक्षा 11वीं में पड़ती हूं। तोंगपाल में किराये के मकान में रहती हूं। साल 2020 में मेरे बड़े भाई को झूठे रेप केस में फंसा दिया गया था। उसे 9 महीना जेल में रहने के बाद जमानत मिली है। हम लोग 6 फरवरी को बड़े भाई के साथ गांव में गए थे तब अचानक से गांव के 9 लोग घर में घुस आए भाई का कपड़ा फाड़ दिया और मेरे साथ छेड़छाड़ किया गया, मम्मी-पापा के साथ मारपीट किए जिस कारण मम्मी बेहोश हो गयी, मेरा भी कपड़ा फाड़ दिए और मेरे गुप्तांगों में भी लात मारे, कन्धा का हड्डी खिसक गया था इसकी शिकायत थाने में तीसरे दिन किए थे।
लगातार थाना जाने के बाद पुलिस वाले आरोपियों को थाना में बुलाए लेकिन उसी दिन छोड़ दिया गया। मैं छिन्दगड़ अस्पताल में 5 दिन, सुकमा अस्पताल में 3 दिन भर्ती थी। मैं जगदलपुर चिकित्सालय में एक महीना तक भर्ती रही, दन्तेवाड़ा मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दर्ज हुआ। अभी भी गांव में मम्मी - पापा और दीदी रहती हैं जिन्हें उनके बारे में गांव में बैठक बुलायेंगे ऐसा कहते हुए लगातार भयादोहन किया जा रहा है। हमारे ग्राम पंचायत में सात मुहल्ले हैं, हमारे परिवार के पास कुल 180 एकड़ जमीन है जिसमें खेती करते हैं। गैर - मसीही गोंड़ परिवार मेरे मोहल्ले में कुल 12 हैं तथा मसीही परिवार कुल 2 हैं। हमारे भी जाति गोंड़ है।
17. अ. तेजसिंह मुचाकी
45 वर्ष, व. हिड़मा मुचाकी/उरा मुचाकी, 27 वर्ष, निवासी बेलवांपाल, चैतापारा, थाना व जिला सुकमा, घटना स्थल/निवास गॉव, घटना - साल 2011
अ. जब मैं मसीही धर्म अपनाया तब गांव, जाति, परिवार और गांव के पुजारी पेरमा, पटेल, गायता लोगों ने मीटिंग बुलाकर मुझे बोला कि तुम दूसरा धर्म में जा रहे हो, तुमको समाज से अलग होना पड़ेगा, तब मैंने नहीं छोडऩे की बात बताई। पेद्दा पेरमा लोग बोले कि तुमको पंच (फाईन) देना पड़ेगा और मैं 500 रुपये जुर्माना दिया हूं लेकिन फिर भी मुझे अलग कर दिया गया। एक सप्ताह बाद रात में करीब 100 से ज्यादा पुरूष लोग मेरे घर में हमला कर दिए।
मुझे पकड़ते वक्त छिना झपटी और अंधेरे में मेरे ऊपर चाकू मारने की कोशिश किए तो उन्हीं लोगों को आपस में चोंट आया लेकिन बाद में पुलिस के पास मुझे चाकू मारा है, ऐसा कहते हुए मुझे ही झूठा फंसा दिया। उस वक्त मैं घर के पीछे से निकलकर जंगल की ओर भाग गया मेरे पत्नी को उन लोगों ने मरते तक मार दिए थे और घर से रुपये 42 हजार और दो नग बकरा/बकरी भी लूट कर ले गए। इसकी सूचना हम लोगों ने थाने में दिया था पुलिस ने दोनों पक्ष का एफआईआर लिखा। हम लोग 3 साल तक दन्तेवाड़ा कोर्ट में केस लड़े और केस खत्म हो गया।
साल 2017 '8 में मैं भी उन लोगों के द्वारा हमारे खिलाफ आदिवासी देवता का पत्थर और मूर्ति को तोडक़र हमारे ही खिलाफ झूठा रिपोर्ट लिखवाया था। 10 मार्च 2022 में मैं गिरफतार हुआ था अभी मैं जमानत पर बाहर हूं। जेल में अत्यधिक मारपीट के कारण मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। उन लोगों ने चर्च और पास्टर के घर को भी तोड़ा, मैं मिशनरियों से जुड़ा हूं। दोनों तरफ से रिपोर्ट हुआ था जहां उस तरफ से भी आठ लोगों की गिरफतारी हुई। मेरा गांव में 150 एकड जमीन है।
ब. मैं तीन साल से ईसाई हूं, पूरे गांंव में दोनों पारा को मिलाकर 60 -70 मसीही परिवार हैं, शेष 200 परिवार गैर-मसीही गोंड़ परिवार हैं। लगभग 150 लोगों ने मिलकर चर्च पर हमला किया था।
18. जिमलो वेक्को
36 वर्ष, गांव किस्के पारा, पंचायत बस्तानार, थाना - कोड़ेनार, जिला बस्तर, घटना स्थल - निवासघर, घटना - नवम्बर 2021
साल 2015 से ईसाई धर्म अनुयायी हूं। मेरी जाति माडिय़ा है। गांव में कुल 4 मसीही परिवार, 15 कलार परिवार, 5 यादव परिवार, 1 घसिया परिवार, 60 माडिय़ा आदिवासी परिवार रहते हैं। साल 2020 मेें गांव वालों और माडिय़ा कुटुम्ब के लोगों ने बैठक बुलाया और मुझे घर वापसी का दबाव डाले। मेरे पति रामलाला और सास गुरबे मुझे चर्च नहीं जाने को लेकर प्रताडि़त करना शुरू किए। गांव के पटेल, गायता, पुंजारी, पेरमा उपस्थित थे और कुटुम्ब वाले जिसमें मेरा जेठ कोस्का मुझे प्रताडि़त करने में प्रमुख था। उनके दबाव के कारण और जब बच्चे लोग मुझसे लिपटकर रोने लगे तब घर वापसी कर लूंगी ऐसा कहकर मैं अपने जान बचाने अपने दीदी के पास किलेपाल भागकर आ गयी।
मेरे जेठ द्वारा पत्थर लेकर मुझे मारने दौड़ाया, मेरा पति घर पर ही था लेकिन उसने नहीं रोका, मेरा पति एक दूसरी औरत के साथ शादीशुदा जीवन जी रहा है तथा वह आरएसएस से भी जुड़ा हुआ है। दोनों तरफ के बच्चों का पढ़ाई -लिखाई और देखभाल नहीं करता है। मैंने प्रताडऩा से तंग आकर घर के बाहर लेकिन पास में ही एक झोपड़ी बनाया, मुझे पति के हिस्से का खेत नहीं मिला लेकिन गांव में ही मेरे पिताजी के नाम से स्थित जमीन में वनोपज संग्रहण कर जीवन-यापन कर रही हूं। मेरे घर में बिजली नहीं दिया जा रहा है तथा पीने के पानी भी गांव के सार्वजनिक स्थान से नहीं लेने दिया जाता है।
मुझे प्रताडि़त करने के उद्देश्य से लगातार और अनेकों बार बैठक बुलाया गया जहां पुजारी द्वारा आदिवासी देवगुड़ी से पानी लाकर मेरे ऊपर छिडक़ाव किया गया। गांव के बैगा द्वारा घोषित किया गया कि मुझ ईसाई औरत के लिए इस गांव में कोई जगह नहीं है। मान्यता के अनुसार बैगा का कहा ग्राम देवता का कहा माना जाता है। मेरे खिलाफ गांव में बहिष्कार का फरमान है अगर गांव का कोई व्यक्ति मुझे बातचीत करेगा तो उन लोगों को भी मेरे जैसा भुगतना कर पड़ेगा। गांव में ही अन्य तीन मसीही परिवार को गांव वालों ने मारपीट कर भगा दिया है। मेरे बच्चों को भी मुझसे अलग कर दिया गया है।
उपरोक्त घटनाओं की सूचना मेरे द्वारा थाना में सूचना जनवरी 2022 में दी गयी, थाना में जब एक सप्ताह पश्चात मेरे पति, जेठ और सास को बुलाया गया तो उनके साथ गांव के कोया समाज के लगभग 100 लोग थाना में पहुंच गए और वहां पर ही मुझे धमकी देने लगे और पुलिस वालों ने भी कहा कि हम लोग गांव वालों के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते, घर वापसी कर लो और तभी तुम्हारा पति भी तुमको अपना लेगा नहीं तो तुम कोर्ट चले जाओ। जब थाना में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं किया गया तो हम लोग एस.पी.जगदलपुर के पास गए जहां से एसपी साहब ने फोन पर ही थाना को निर्देश दिया और अगले दिन थाने से पुलिस वाले गांव में आए और कहा कि मुझे/इसे कोई भी गांव से नहीं निकालेगा नहीं तो उसको जेल जाना पड़ेगा, तभी से मैं गांव में ही रहती हूं और मुझे हिम्मत आया है।
19. राजबती नुरेटी
पति राजूराम नुरेटी, निवासी - गांव - कोकामेटा, थाना कोकामेटा, तहसील -ओरछा, जिला - नारायणपुर, घटना स्थल - घोटूल पंचायत, कोकामेटा, घटना - अगस्त 2014 एवं 1 मार्च 2022
अन्य पीडि़त गण -
1. सोनबती नुरेटी/लकमू (45 वर्ष)
2. ईश्वरी नुरेटी/सन्नू (40 वर्ष)
3. मंगली कवाची/दिनेश (27 वर्ष)
4. सुखदेव नुरेटी/लखमा (35 वर्ष)
5. जयसिंह नुरेटी/स्व.लखमा (28 वर्ष)
6. सुक्की नुंरेटी/गीलू (45 वर्ष)
7. लालसुंरा मण्डावी/स्व.सोमू (27 वर्ष)
8. शम्भू नुरेटी/बुधराम (35 वर्ष) (उपरोक्त सभी कोकामेटा)
9. दुर्गा प्रसाद देहरी/रामसिंह (46वर्ष) निवासी ग्राम-कींहकाड़
हम सभी पीडि़तगण ग्राम पंचायत कोकामेटा, तथा उसके आश्रित ग्राम कीहकाड़, गाड़ावाही, कोड़ेनार के निवासी हैं जो कि पिछले सात सालों से मसीह धर्म के अनुयायी हैं। हमारे गांव में कुल गैर-मसीही, अबूझमाडिय़ा परिवारों की संख्या 120 के लगभग है तथा मसीही (माडिय़ा) परिवारों की संख्या 30 के आसपास है। गांव में माडिय़ा जाति के प्रमुख मंगलू नुरेटी और गांव के गायता, पटेल, पुजारी एवं ग्राम पंचायत सरपंच ने एक बैठक बुलायी। हम मसीही लोगों को लक्ष्य करते हुंए गांव वालों के साथ इन लोगों ने हमें बैठक बुलाया तथा उस बैठक में हम मसीही लोगों को ही अपना मोबाइल जमा करने के लिए बोला।
शायद इसलिए कि हम लोग वीडीयो इत्यादि न बना सकें। संयोग से उस दिन एक प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा भी गांव में था लेकिन बैठक के आयोजक उक्त लोगों के द्वारा गांव में जात्रा और ग्राम देवी - देवता का बैठक है, बोलकर-असत्य जानकारी देते हुए प्रशासनिक अमले को भ्रमित कर दिया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उपरोक्त बैठक मसीही अनुयायियों को दण्ड देने के लिए ही आयोजित किया गया था। उस बैठक में हमारे लिये फरमान जारी किया गया कि हम एक सप्ताह के भीतर गांव छोड़ दें। उक्ताशय के संबंध में हम लोगों ने उनसे लिखित में देने को कहा लेकिन नहीं दिया। हम लोग उनके द्वारा तय किए गए मोहलत में जब गांव से नहीं भागे तो इस संबंध में क्रमश: 27 मार्च और 10 अप्रैल को सभा बुलाई गई थी। हमारा सामाजिक बहिष्कार किया गया, सोसायटी चावल और सार्वजनिक नल से पानी लेने नहीं दिया जा रहा है।
हम गांव से दूर एक नाले से पीने को पानी लाते हैं। गांव के आम ग्रामीणों को हम मसीहियों से बातचीत करने की मनाही है अन्यथा रुपये 1 हजार जुर्माना तय किया गया है। स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को भी निकाल देने का धमकी दिया जाता है। जाति प्रमाण - पत्र नहीं बनाया जा रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि सरकार का जाति प्रमाण पत्र के संबंध में आदेश है कि इसके लिए जाति प्रमुखों का प्रमाणपत्र अनिवार्य है। उक्त घटना के संबंध में हम लोगों ने स्थानीय थाना में शिकायत भी दर्ज करवाई है और नारायणपुर कोर्ट में केस भी लगाया है जिसे गांव के मालू, मंगलू-गायता, पटेल के द्वारा वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
20. शुद्धूराम मण्डावी
32 वर्ष, जाति गोंड़, निवासी गांव - अर्रा, तहसील, थाना - आमाबेड़ा, जिला कांकेर, छत्तीसगढ़, घटना स्थल - घोटूल पंचायत, घटना - 23 जून 2016
हमारे गांव मे गैर- मसीही गोंड़ परिवारों की संख्या 40 तथा अन्य यादव परिवार की संख्या 3 है। हमारे गांव में हमारे परिवार के अलावा भी तीन मसीही परिवार थे, जिन्हें गांव से भगा देने के कारण आमाबेड़ा में रह रहे हैं। हम लोग साल 2013 - 14 से मसीही धर्म अनुयायी हैं तथा अन्वेषण के दौरान एक पीडि़त धनसिंह पोटाई दिवंगत चमरूराम पोटई, 43 वर्ष ने बताया कि वह 2006 से गांव छोडक़र आमाबेड़ा में रहता है। उसने बताया कि एक पास्टर संतोश उपेण्डी के मां की मृत्यु हो जाने के कारण वह सन 2015 में परिवार सहित गांव में बसने के लिए गया था तब गांव वाले नक्सलियों के पास झूठा खबर कर दिए कि वह पुलिस मुखबीर है जिस कारण नक्सलियों ने 06 फरवरी 2016 को अर्रा गांव के पास जंगल में जन - अदालत लगाया। उन लोगों ने गांव वालों के बातों में आकर उसे (संतोष हुपेण्डी) को जान से मार दिया था। उसी दिन मुझे भी नक्सली पकडऩा चाह रहे थे।
पुलिस मुखबीर के आरोप पर। मेरे भाभी को भी जन - अदालत में बुलाया गया और बोला गया कि धनसिंह पोटाई नहीं मिल रहा वो बच गया है। मेरी पत्नी तुलसीवती को बोले कि आठ दिन में हाजिर करो नहीं तो हम लोग उसे ढूंढक़र मार देंगे, तब से मैं अपना गांव डर के कारण नहीं गया हूं। इसकी सूचना मेरे द्वारा स्थानीय थाना में 07 फरवरी 2016 को की गयी है लेकिन पुलिस द्वारा 2 - 3 दिनों तक सुरक्षागस्ती के पश्चात् मुझे सुझाव दिया कि हम पुलिस वाले आपको कितने दिन सुरक्षा दे सकते हैं आप गांव से बाहर चले जाइये। अभी मेरी पत्नी तुलसीवती गांव में रहती है उसे दिसम्बर 2021 में गांव छोडऩे का धमकी गांव वालों के द्वारा दिया गया है। गांव में हम लोगों की खेती जमीन 25 एकड़ है जिसे भी गांव वालों ने हमें छोड़ देने के लिए दबाव डाल रहे हैं। साल 2006 में अन्य 12 परिवार जो उस समय मसीही थे, गांव के दबाव के कारण घर वापसी के लिए मजबूर हो गए थे। हमारा एकमात्र परिवार भी गांव छोडक़र अब नारायणपुर में रहता है। हम साल 2017 में थाना में सूचना दिए थे, मामला लम्बित है।
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