पादरी की धारदार हथियार से बेरहमी से हत्या

द कोरस टीम

 

17 मार्च की शाम जब गांव में होलिका दहन चल रहा था, चेहरे पर नकाब पहने 5-6 व्यक्तियों का एक अज्ञात गिरोह 50 वर्षीय पादरी यालम शंकर के घर आया, उसे बाहर लेकर आया और फिर धारदार हथियार से बेरहमी से उनकी हत्या कर दिया। वह छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले के मद्देड़ थाना के अंगमपल्ली गांव के रहने वाले थे।

वह गांव और पंचायत के प्रमुख व्यक्ति थे क्योंकि उन्हें सरपंच चुना गया था और उनकी बहू उनके कार्यकाल के बाद सरपंच के रूप में चुनी गई थी। वर्तमान में वे पादरी का काम करते थे और गांव और ईसाई समुदाय में ईसाइयों के बड़े हितैषी थे।

गांव और उसके आसपास दहशत फैल गई है। पादरी यालम शंकर अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, बहू और पोता पोती को छोड़ गए हैं। उनकी हत्या गांव और पूरे क्षेत्र में ईसाइयों के लिए एक बड़ी क्षति है।

प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलाएन्स छत्तीसगढ़ के बस्तर प्रतिनिधि साइमन दिगबाल तांडी ने बताया कि अंगमपल्ली गांव कुछ महीनों से ईसाई विरोध का केंद्र बिन्दु रहा है। कई महीनों से गांव में हिंदू कट्टरपंथियों और ईसाइयों के बीच उथल-पुथल चल रही है।

कई बार हिंदू कट्टरपंथियों ने ईसाइयों को मारने और ईसाई धर्म का पालन करने वालों को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। कुछ महीने पहले गांव में धर्म परिवर्तन को लेकर हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा ईसाइयों से मारपीट की घटना सामने आई थीं, जिसकी शिकायत जिला मुख्यालय बीजापुर से 40 किलोमीटर दूर मड्ढेड़ थाने में भी की गई है।

विगत जनवरी माह में इस क्षेत्र में माओवादियों के नाम पर पर्चा फेंक कर धर्म परिवर्तन का विरोध किया गया था। लेकिन निश्चित रूप से ये नहीं कहा जा सकता कि यह पर्चा किसने फेंका था माओवादियों, हिन्दू कट्टरपंथियों अथवा किसी और ने यालम शंकर की हत्या के विषय मे भी तथाकथित रूप से माओवादियों के द्वारा इलाके में एक पर्चा फेंका गया है।

तांडी ने कहा कि यालम शंकर की हत्या आम लोगों और ईसाइयों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फेंका हुआ पर्चा बताता है कि यालम शंकर माओवादियों और उनके आंदोलनों का विरोधी थे, वह एक पुलिस मुखबिर थे जो माओवादियों की सभी गतिविधियों और इनपुट को स्थानीय और उच्च पुलिस अधिकारियों को सूचित करते थे। पुलिस अधिकारियों के द्वारा यालम शंकर के पुलिस मुखबिर होने का खंडन किया गया है।

पर्चा यह भी बताता है कि यालम शंकर माओवाद विरोधी और जनता विरोधी गतिविधियों कर रहे थे और उन्हें सुधार की चेतावनी दी गई थी। चूंकि उन्होंने खुद को सहीं नहीं किया, इसलिए उन्हें पीएलजीए (माओवादियों का एक विंग के द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया।

लेकिन एक बार फिर यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि क्या वास्तव में माओवादियों ने इस निर्मम हत्या को अंजाम दिया है। माओवादियों द्वारा तथाकथित पर्चा में यालम शंकर की हत्या की स्वीकारोक्ति को ईसाई विरोधी तत्वों द्वारा साजिश के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय पादरी और ईसाई विश्वासी इस बात पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं कि ये हत्या माओवादियों ने की है।

पुलिस के द्वारा घटनाक्रम की जांच की जा रही है। प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलाएन्स छत्तीसगढ़ के बस्तर प्रतिनिधि साइमन दिगबाल तांडी ने छत्तीसगढ़ शासन से ईसाईयों और विशेषकर उनके पादरियों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतन्त्रता सुनिशिचित करने दोषियों पर कानूनसम्मत कड़ी कार्यवाही करने तथा पूरे क्षेत्र मे सांप्रदायिक सौहाद्र व सदभावना को बड़ावा देने की मांग करता है।

बहरहाल पादरी की जघन्य हत्या के बाद सच से पर्दा उठना बाकी है कि आखिरकार पादरी यालम शंकर की हत्या किसने की? 


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