सोनी सोरी निर्दोष घोषित हो बाइज्जत बरी हो गयी

आदिवासी शिक्षिका सोनी सोरी आदिवासी हितों को लेकर लड़ने के कारण जंजीरो में बांधकर रखी गईं...

चन्द्रभूषण सिंह यादव

 

जाति से अनुसूचित, पिछड़ा, आदिवासी होना इस देश में सबसे बड़ा पाप है। कथित रूप में पूर्वजन्म में किये गए पापों के कारण ही इस जन्म में भारतवर्ष में इंसान,इंसान बनकर नहीं जन्म लेता है, वह अनुसूचित, पिछड़ा, आदिवासी बनकर जन्म लेता है।

उसे यदि अगले जन्म में उच्च जाति में जन्म लेना है और उस नीच जाति से मुक्ति प्राप्त करना है तो इस जन्म में उसे भुसुरों को दान-पुण्य, सेवा-सुश्रुषा करना होगा।यदि वह इससे विरत हो मानव अधिकार की बात करेगा तो सोनी सोरी बना दिया जाएगा क्योंकि यहां इंसानियत का नहीं बल्कि मनुवादियो का राज चलता है।

छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा के समेली गांव में 15 अप्रैल 1975 को जन्मी सोनी सोरी अपने क्षेत्र में एक शिक्षिका के रूप में कार्य करते हुये आदिवासी हितों के लिए मुखर रूप में कार्यरत एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं जिन्हें 2011 में जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त मनुवादी सोच वालों ने राष्ट्रद्रोह का मुलजिम बना दिया।इस दौरान सोनी सोरी को जंजीरो से बांधकर पीटा गया, उनके गुप्तांगों में ईंट-पत्थर ठूंसे गए, चेहरे पर तेजाब डाला गया।

यह सब कुछ किसी अपराधी ने नहीं बल्कि भारतीय संविधान की शपथ ले सरकारी सेवाओ मे कार्यरत एसपी गर्ग साहब सहित क्रूर जातिवादी मानसिकता के मनुवादियो द्वारा किया गया। ऐसी यातना तो आजादी की लड़ाई के दौरान विदेशी अंग्रेजों ने भी किसी महिला को नहीं दी होगी लेकिन आजाद भारत मे इस देश की आदिम मूलनिवासी महिला के साथ हुवा और उस पर राजद्रोह लगा दिया गया लेकिन इस कानूनी लड़ाई मे 16 मार्च 2022 को 11 सालों बाद आये निर्णय में सोनी सोरी निर्दोष घोषित हो बाइज्जत बरी हो गयी हैं।

अब सवाल उठता है कि जिन लोगो ने सोनी सोरी को राष्ट्रद्रोही बनाया और उस अपराध को सिद्ध नहीं कर पाए, उनके खिलाफ कोई कार्यवाही होगी? सोनी सोरी पर हुये उत्पीड़न का दोषी कौन है और उत्पीड़न करने वालो पर क्या कार्यवाही होगी? सोनी सोरी के जो 11 साल निर्दोष होने के बावजूद यातना में कटे हैं उनका क्या इलाज है? क्या जाति के नाते इस देश के सोनी सोरी जैसे लोग राक्षस बना आज भी मारे जाते रहेंगे और कुछ लोग भूसुर बन यूं ही निर्दोष, निश्छल लोगो को असुर घोषित कर वध करते रहेंगे?

लेखक यादव शक्ति के प्रधान संपादक हैं।


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