बेहमई में जब फूलन देवी ने 22 बलात्कारियों को मौत के घाट उतारा...
चन्द्र भूषण सिंहमैं 1981 में कोलकाता में कक्षा-07 में पढ़ रहा था।15 फरवरी 1981 को सुबह "सन्मार्ग" अखबार देखा तो उसमें छपा था कि चंबल की डकैत फूलन देवी ने बेहमई गांव में 22 ठाकुरों को लाइन में खड़े कर गोली से उड़ाया। देश भर में बड़ी प्रतिक्रियाएं हुईं कि एक डकैत ने 22 ग्रामीणों को मार डाला।फूलन देवी के इस दुस्साहसिक कृत्य पर फिल्में बनी। कई फिल्में फूलन को खलनायिका के रूप में प्रस्तुत करते हुए बनाई गईं। भारतीय सभ्य समाज फूलन देवी को हिकारत भरी नजरों से देखता रहा लेकिन क्या किसी ने 18 साल के फूलन की पीड़ा का अहसास किया?

मैं कानून को सर्बोच्च मानता हूं।मैं किसी द्वारा किसी की हत्या का हिमायती भी नही हूँ लेकिन फूलन देवी ने जो किया क्या वह जायज था या नाजायज,यह आज भी एक महत्वपूर्ण एवं अनुत्तरित प्रश्न बना हुवा है।
फूलन देवी के साथ 03 हफ्ते तक किडनैप कर बलात्कार किया जाता रहा।किसी तरह से बच निकलने के बाद फूलन देवी डकैतों के गिरोह में शामिल हो अपने बलात्कार का बदला लेने हेतु 14 फरवरी 1981 को बेहमई गईं और उन्होंने बलात्कारियों की पहचान कर उन्हें लाइन में खड़े कर गोलियों से भून डाला।
इस घटना के बाद बलात्कारी क्या,पूरा सभ्य समाज दहल गया।चारो तरफ फूलन को डकैत,अपराधी आदि विशेषणों से नवाजा जाने लगा।फूलन देवी पर 22 हत्या,30 डकैती,18 किडनैपिंग के चार्ज फ्रेम हो गए।1983 में वे सरेंडर को राजी हुईं।11 साल जेल में सजा काट जब वे 1994 में बाहर आईं तो वे 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर से सांसद बन सन्सद में पँहुचीं।25 जुलाई 2001को सांसद निवास पर उनकी हत्या हो गयी।10 अगस्त 1963 को जन्मी फूलन देवी की दैहिक यात्रा महज 38 साल की ही रही लेकिन इस अल्प आयु में ही फूलन देवी ने एक इतिहास रच वह मुकाम बना लिया जो कोई हजारो साल में कायम नही कर सकता।
मैंने पहले ही कहा कि मैं कानून हाथ मे लेने का हिमायती नही हूँ लेकिन यदि कानून या कानून के इम्लीमेंट करने वाले लोग या एजेंसीज सही ढंग से काम न करें तो कोई क्या करेगा,यह बहुत गम्भीर सवाल है।फूलन देवी जी के साथ 03 हफ्ते बलात्कार हुवा,देश का कानून या प्रशासनिक अमला कुछ नही जाना? आखिर प्रधान, लेखपाल, चौकीदार, बीट सिपाही, हल्का थानेदार, पुलिस के मुखबिर किस बात के लिए होते हैं?अखबार व उनके स्थानीय संवाददाता किस सूचना को एकत्र करने के लिए होते हैं?न्यायालय स्वयं संज्ञान कब लेता है?
यदि किसी स्त्री की अस्मत 03 हफ्ते तक दरिंदे लूटें और सभ्य समाज आह भी न भरे तो कोई स्त्री क्या करेगी?क्या पुरुष यही चाहता है कि स्त्री ऐसी घटनाओं के बाद आत्महत्या कर ले?क्या आत्महत्या की बजाय वह उन आततायियों की हत्या कर देती है तो वह अपराधी है लेकिन जिन लोगो ने 03 हफ्ते तक बलात्कार किया,जिन लोगो ने इस घटना को छुपाया या इस पर पर्दा डाला,वे शरीफ हैं?आखिर जब न्याय नही होगा तो रास्ता क्या बचता है,केवल आत्महत्या या बेहमई जैसी हत्या?
भारत बलात्कार की घटनाओं से पूरी दुनिया मे शर्मसार है।यदि अपवाद मानकर ही हम फूलन देवी की कार्यवाही को अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल कर लेते तो किशोर वय में ही हमारे बच्चे व बच्चियां पढ़कर सतर्क हो जाते की बलात्कार की सजा ऐसे भी मिलती है।
हम जब तक पाठ्यक्रम में यह पढ़ाते रहेंगे कि अग्नि परीक्षा के बाद भी राम ने सीता को कहा कि जंगल जाना होगा और वे सहर्ष चली गईं,द्रौपदी की इच्छा जाने बगैर उन्हें 05 पुरुषों में बांटकर रखने की बात कही गयी और उन्होंने मान लिया आदि, तब तक स्त्री हिंसा,बलात्कार आदि होता रहेगा।जब तक यह नही बताया या पढ़ाया जाएगा कि बलात्कार या यौन हिंसा का अंजाम बेहमई कांड भी होता है अथवा स्त्री केवल सीता,द्रौपदी या सावित्री ही नही बल्कि "फूलन" भी होती है तब तक देश का मर्दवादी अहं आशाराम,रामरहीम आदि के रुप में प्रकट होता रहेगा।
14 फरवरी 2020
लेखक प्रधान संपादक-"यादव शक्ति"/कंट्रीब्यूटिंग एडिटर-"सोशलिस्ट फ़ैक्टर" हैं।
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16/02/2022
RAM KUMAR LAHARE
बहुत अच्छा विचार व्यक्त किया गया है, फूलन देवी के साथ हुआ अत्याचार मानवता को शर्मशार करने वाला था.फूलनदेवी और अत्याचारियों के साथ हुए घटनाक्रम को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए.
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