शासकीय दुकानों के आबंटन में नियमों की उड़ाई जा रही है धज्जियां
सुशान्त कुमारछत्तीसगढ़ में स्थित राजनांदगांव के वनांचल छुरिया नगर पंचायत मुख्यालय में छुरिया से कल्लूबंजारी रोड़ पर ‘मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना’ के तहत बनाये गये दुकानों के वितरण में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।

इन दुकानों के निर्माण के पूर्व इस स्थान में पहले लगभग 70 गरीब व्यक्तियों ने गुमटी, कच्ची दुकान बनाकर अपनी रोजी-रोजगार 30 - 35 वर्षो से करते आ रहे हैं, जिन्हें हटाकर दुकाने निर्मित की गई है।
उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि हटाये गये दुकानदारों को नयी दुकानों में प्राथमिकता के तौर पर व्यवस्थापन किया जायेगा। किन्तु दुकान आबंटन के समय नगर पंचायत छुरिया नियमों को ताक पर रखकर नये व्यवसायियों को दुकान आबंटन करने की योजना बनाई है।
कलेक्टर के नाम पत्र में व्यापारी संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि आज से 3 वर्ष पूर्व छुरिया बंजारी रोड के चौड़ीकरण के कारण कई दुकानदारों को जिनकी संख्या 70 है, जिन्हें हटा दिया गया था। वर्तमान में मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत 100 दुकान का निर्माण रोड चौड़ीकरण से प्रभावित दुकानदारों के लिये किया गया है। वर्तमान में कार्यालय नगर पंचायत द्वारा सिर्फ 43 लोगों का नाम सूची में जारी कर दावा आपत्ति जारी की गई हैं, जो कि सरासर नाइन्साफी है।
जिन 43 लोगों का नाम नगरपंचायत की सूची में शामिल है, वे मूल रूप से छुरिया के निवासी हैं। बाकी दुकानदार जो वर्षों से व्यवसाय का संचालन कर रहे थे, छुरिया में उन दुकानदारों का नाम इसलिये हटा दिया गया है कि वे मूलरूप से छुरिया के निवासी नहीं हैं।
पीडि़तों ने आम्बेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया के जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल खोब्रागढ़े से मिलकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। पार्टी की ओर से पीडि़त दुकानदारों की समस्या को लेकर माननीय मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया है।
बताया गया कि कलेक्टर तारण सिन्हा के दौरे पर होने के कारण ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है। पार्टी की ओर से जिलाध्यक्ष खोब्रागढ़े ने बताया कि अगर नगर पंचायत छुरिया पीडि़त दुकानदारों को दुकान आबंटन नहीं किया तो पार्टी वहां पर आंदोलन, भूख हड़ताल करेगी और आवश्यकता पडऩे पर चक्काजाम किया जायेगा।
जिलाध्यक्ष खोब्रागढ़ ने ‘द कोरस’ को बताया कि मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस लोक कल्याणकारी योजना को धूमिल होने से बचाये तथा छुरिया में पीडि़त दुकानदारों को नवनिर्मित दुकान प्राथमिकता के तौर पर को आबंटन करें। ज्ञापन सौंपने के समय पार्टी के पदाधिकारी प्रदेश सचिव नागेश्वर बोरकर, मनोज सोरते, ढालचंद साहू, प्रहलाद चंद्रवंशी व रोमन नेताम उपस्थित थे।
‘द कोरस’ से प्रभावित व्हेनसांग मसीह ने बताया कि वह 30 साल से यहां व्यवसाय कर रहे हैं। उनका कहना है पंचायत के बाहर वालों को दुकान नहीं मिलेगा। वे कहते हैं कि हम 27 प्रभावित छुरिया ब्लॉक में आते हैं उसके बाद कलेक्टर, पूर्व तथा वर्तमान मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक के साथ मंत्री शिव कुमार डहरिया को भी इस समस्या से अवगत कराया है।
प्रभावित गुरूशरण ने बताया कि 25 साल से यहां व्यवसाय कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि प्रभावितों को दुकान मिलना चाहिए। नगर पंचायत कोई सुनवाई नहीं कर रही है। एक कान से सुनती है दूसरे कान से निकाल देती है।
प्रभावित और व्यापारी संघ के अध्यक्ष संतोष ने बताया कि 2017 में रोड चौड़ीकरण के कारण बंजारी रोज में दुकानें टूट गई थी। आस - पास के 8 - 10 किलोमीटर से व्यापारी यहां व्यवसाय करने आते हैं। पहले ग्राम पंचायत से अब नगर पंचायत के समय भी वे व्यवसाय कर रहे हैं। व्यापारी संघर्ष समिति बंजारी रोड छुरिया ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन दुकान की मांग किया है। उन्होंने बताया कि तब दुकान निर्माण के लिये 1 करोड़ पास हुआ था और इससे दुकान निर्माण के बाद इन्हें दुकान आबंटन करने में नगर पंचायत आनाकानी कर रही है।
पीडि़तों ने बताया कि नगर पंचायत अपने ओर से दुकान नहीं बनाया है। इन दुकानों के निर्माण में इन प्रभावितों ने पिछले तीन साल से संघर्ष किया है। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना में स्थानीय लोगों दुकान बनाकर देना था। लेकिन नगर पंचायत ने इस समय एक नया नियम यह बनाया है कि दुकानें सिर्फ स्थानीय व्यापारियों को ही दिया जाएगा बाहर से आने वालों को नहीं दिया जाएगा।
पीडि़तों ने बताया कि वे आंदोलन तथा नगर बंद कर दुकान निर्माण के कार्य को पूरा करवाया है। इसमें छुरिया और बाहर के लोग सभी प्रभावित हैं।
पीडि़तों ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में 100 दुकानों का निर्माण किया है जबकि 65 पीडि़त हैं। आबंटन के बाद भी 35 दुकानें शेष बच रहे हैं। उसके बावजूद भी प्रभावितों को दुकान देने में नगर पंचायत आनाकानी कर रहा है। छुरिया के बाहर का बहाना बनाया जा रहा है।
पहले यह निर्णय लिया गया था कि उस समय सारे लोगों को दुकान देना था। उस समय ऐसा नियम नहीं था। इतने सालों से धंधा करने वालों को बाहर का दरवाजा कैसे दिखाया जा सकता है जबकि उनके पास नोटिस तथा टैक्स से संबंधित कागजात हैं।
पीडि़तों ने कहा है कि कलेक्टर ने सभी को दुकान मिलेगा कहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री डहरिया ने भी सभी को दुकान देने की बात कही है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का लेटर भी हमारे पास है। नगर पंचायत जबरदस्ती का पेंच फंसा रहे हैं। प्रभावितों ने कहा कि स्थिति यह है कि हम वर्तमान में कोरोना गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं नहीं तो आंदोलन में उतर जाते।
बहरहाल मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजनांतर्गत 100 नग दुकान का निर्माण हो चुका है लेकिन शासन ने नियम शर्तों का हवाला देकर सडक़ चौड़ीकरण में प्रभावित दुकानदारों को दुकान इसलिए नहीं दे रही है क्योंकि ये दुकानदार प्रभावित क्षेत्र के निवासी नहीं हैं।
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