मशहूर पत्रकार कमाल खान अब हमारे बीच नहीं रहें

द कोरस टीम

 

कमाल खान के निधन पर तमाम राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं व आम लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, अरविंद केजरीवाल, प्रियंका गांधी, मुख्तार अब्बास नकवी,  सतीश चन्द्र मिश्रा, हरदीप सिंह पुरी, सुप्रीया श्रीनेत,  जितिन प्रसाद, राज बब्बर, हेमेंत सोरेन, कमलनाथ ने ट्वीट कर कमाल खान के निधन पर शोक जताया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने लिखा है कि हमने कमाल को देखा है। वे कई मायनों में अनूठे और अद्वितीय थे। टीवी खबरों की तेज़ रफ़्तार भागती-हांफती दुनिया में वे अपनी गति से चलते थे। 

यह कहीं से मद्धिम नहीं थी। लेकिन इस गति में भी वे अपनी पत्रकारिता का शील, उसकी गरिमा बनाए रखते थे। यह दरअसल उनके व्यक्तित्व की बुनावट में निहित था। जीवन ने उन्हें पर्याप्त सब्र दिया था। वे तेजी से काम करते थे, लेकिन जल्दबाज़ी में नहीं रहते थे। यह शिकायत उनसे कभी नहीं रही कि वे डेडलाइन पर अमल नहीं करते थे। लेकिन जो काम करते थे, उसमें अपनी तरह की नफ़ासत, अपनी तरह का सरोकार- दोनों दिखाई पड़ते थे। 

यह चीज़ शायद हिंदी-उर्दू की उनकी साझा पढ़ाई का नतीजा थी। उनके पास समकालीन राजनीति, साहित्य और इतिहास का पर्याप्त अध्ययन था। इसके अलावा पत्रकारिता ने उनको अपने समाज की गहरी समझ दी थी। उनको अपने समय की विडंबनाओं की पहचान थी। वे राजनीतिक मुहावरों में नहीं फंसते थे। उनको मालूम था कि जिस भी रंग की राजनीति हो, उसका अपना अवसरवाद हमारे दौर में चरम पर है।

लेकिन ऐसा नहीं कि वे जो कुछ घट रहा है, उससे वे निर्लिप्त थे। देश और दुनिया के हालात उन्हें व्यथित करते थे। कई बार उनके लंबे फोन आते। कभी किसी स्टोरी के बहाने, कभी किसी डॉक्युमेंटरी के बहाने, कभी किसी शो का नाम रखने के बहाने, कभी स्क्रिप्ट में की जाने वाले पीटूसी के बहाने। 

कई बार दफ़्तर के हालात पर भी बात होती। निजी बातचीत में एक बेचैनी उनके भीतर हमेशा दिखाई पड़ती थी। उनका अपना एक मूल्यबोध था। वे हर लिहाज से प्रगतिशील थे- गंगा-जमनी संस्कृति के हामी, सामाजिक न्याय के पैरोकार, लैंगिक बराबरी के समर्थक- बल्कि उसके प्रति बेहद संवेदनशील। यह बस इत्तिफ़ाक नहीं है कि एनडीटीवी इंडिया पर जो उन्होंने आखिरी बातचीत की, वह इसी लैंगिक बराबरी के संदर्भ में थी।

यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जो 125 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उसमें 40 फ़ीसदी टिकट महिलाओं को दिए गए हैं। ऐसी चार महिलाएं गुरुवार के हमारे शो प्राइम टाइम में थीं। यह शो नग़मा कर रही थीं। कमाल खान ने इसमें राजनीतिक समीकरणों की चर्चा नहीं की, वे लैंगिक असमानता के विभिन्न पक्षों पर बात करते रहे।   

दरअसल लगातार सतही और उथली होती पत्रकारिता के इस दौर में वे एक उजली मीनार जैसे थे। वे समाज के भीतर से ख़बरें निकालते थे और ख़बरों के आईने में फिर समाज को उसकी पहचान लौटाते थे। वे तात्कालिक वर्तमान को इतिहास से जोड़ते थे और निरी स्थानीयता को एक व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ देते थे। और यह काम वे इतनी सहजता से करते थे कि ख़बर में न कोई भारीपन आता और न ही कोई व्यवधान।  

मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘एनडीटीवी से जुड़े प्रतिष्ठित व जाने-माने टीवी पत्रकार कमाल खान की अचानक ही निधन के खबर अति-दु:खद तथा पत्रकारिता जगत की अपूर्णीय क्षति। उनके परिवार व उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत सबको इस दु:ख को सहन करने की शक्ति दे, ऐसी कुदरत से कामना।’

यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी कमाल खान के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, ‘पत्रकारिता की एक गंभीर आवाज बनकर उभरे कमाल खान जी का जाना बेहद दुखद है! उनके सच की गहरी आवाज हमेशा बनी रहेगी, भावभीनी श्रद्धांजलि!’

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी कमाल खान के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान जी का हार्ट अटैक से असमय निधन अत्यंत दुखद है। अपनी ईमानदार पत्रकारिता के योगदान के लिए वह सदैव याद किये जायेंगे। दुख की इस घड़ी में हम सब उनके परिवार के साथ हैं। कुदरत उनके परिवार को दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्हें विनम्र आदरांजलि।’

छत्तीसगढ़ के जाने माने पूर्व अधिवक्ता और साहित्यकार कनक तिवारी ने कहा है कि गोदी मीडिया के इस भयानक शर्मनाक युग में कमाल! तुम जब बोलते थे तो लगता था पत्रकारिता में सभ्यता का स्पर्श अभी बाकी है। धडक़न बाकी है।
पत्रकार रोहिण कुमार ने लिखा है कि कमाल खान सर का काम एक रिमाइंडर है और रहेगा हम सबके लिए कि एक रिपोर्टर के लिए पढऩा कितना ज़रूरी है।

राजनीतिक और सामाजिक थ्योरियों और ग्राउंड की समझ को कैसे आम लोगों तक सरल तरीक़े से पहुंचाया जाए। उनके काम का दायरा इतना फैला है कि हमें बार-बार उन रिपोर्ट्स की तरफ़ जाते रहना पड़ेगा।

इंडीपेंडेंट इंक इंडिया ने उनकी जीवनी पर लिखा है कि कमाल खान का जन्म 1959 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। कमाल खान हमेशा से पत्रकार बनना चाहते थे। कमाल खान ने मास्को विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया था। 
कमाल खान उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक थे। कमाल खान भारतीय ‘नवभारत टाइम्स’ के लिए रूसी अनुवादक के रूप में भी काम कर रहे थे। 27 साल तक एनडीटीवी में कार्यकारी संपादक के रूप में कार्यरत रहे। 

कमाल खान शिक्षा योग्यता

कमाल खान ने अपना स्कूल लखनऊ, उत्तर प्रदेश में पूरा किया और साथ ही उनकी कॉलेज की पढ़ाई भी लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुई। कमाल खान ने मास्को विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।

पत्रकार कमाल खान का जीवन परिचय

कमाल खान का जन्म 1959 में लखनऊ उत्तर प्रदेश में हुआ था. वह अपने माता-पिता के काफी करीब थे। उनकी उम्र 61 वर्ष थी  कमाल खान हमेशा से ही एक पत्रकार बनना चाहते थे। इंडीपेंडेंट इंक इंडिया ने लिखा है कि कमाल खान की पत्नी का नाम रुचि है। उनका एक बेटा है, जिसका नाम अमन है। कमाल खान लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्होंने एनडीटीवी में अपने पत्रकारिता कॅरियर की शुरुआत की।

रामनाथ गोएनका से लेकर गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान पाने वाले वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान टीवी न्यूज की दुनिया में एक लंबे अरसे से काम कर रहे थे। वे अपनी धारदार रिपोर्टिंग और बेहतरीन टीवी रिपोर्ट्स के लिए जाने जाते थे। लगभग 22 वर्षों के अनुभव के साथ कमाल खान पिछले काफी समय से लखनऊ में रहते हुए लगातार एनडीटीवी के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे। हाल ही में अयोध्या जमीन विवाद से लेकर उत्तर प्रदेश चुनाव से जुड़ी उनकी तमाम खबरें चर्चा का विषय बनी थीं।


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