बेचाघाट में आदिवासियों ने लगाई महापंचायत
मांगे पूरी नहीं हुई तो जंगल से शहर की ओर बढ़ेंगे आदिवासी-सोनी सोरी
शंकर पोटाईपरलकोट क्षेत्र के बेचाघाट में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के 34वें दिन बेचाघाट धरना स्थल में महापंचायत बुलाकर लड़ाई तेज करने प्रस्ताव पारित किया गया। जिसमें भारत सरकार के अधिनियम 1935 के अनुच्छेद 91वें, 92वें भारत के संविधान के अनुच्छेद 13-3-क, अनुच्छेद 244-1, अनुसूचित क्षेत्रों और आदिवासियों अनुसूचित जातियों प्रशासन और उन्नति, आदिवासियों को प्रदत्त सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए रूढ़ी प्रथा, ग्राम सभा का आयोजन कर 6 बिंदुओं पर विरोध प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर महापंचायत आयोजित की गई।

बेचाघाट में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का समर्थन करते हुवे सोनी सोरी ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुवे कहा कि बस्तर के बीजापुर सुकमा, दंतेवाड़ा में पुलिस और फोर्स अत्याचार कर रहे हैं। नक्सली के नाम नरसंहार फर्जी मुठभेड़ कर आदिवासियों को जान मारकर नक्सली वर्दी पहना रहे हैं। आदिवासी महिला युवतियों को जबरन पकड़ जंगल ले जाते हैं। बलात्कार कर शाम को गोली मारकर नक्सली मुठभेड़ करार देते हैं। हम अपने आंखों से फोर्स और पुलिस का अत्याचार देखे हैं। कई अत्याचार फर्जी मुठभेड़ हुई, लेकिन एफआईआर नहीं हुआ, कई फर्जी मुठभेड़ की जांच हुई, एफआईआर दर्ज हुई लेकिन एक भी पुलिस और फोर्स की आजतक गिरफ्तारी नहीं हुई मैं पेशे से शिक्षक थी, मुझे नक्सली सहयोगी बताकर जेल भेजा गया मेरे साथ भी बलात्कार और अत्याचार हुई।
ग्रामीणों की मांगें
आंदोलनकारियों का कहना है कि बेचाघाट में प्रस्तावित पुलिया निर्माण निरस्त किया जाए। बेचाघाट में बीएसएफ कैंप नहीं होना चाहिए। सितरम में पर्यटन केंद्र की स्वीकृति वापस लिया जाए। कोयलीबेड़ा विकासखंड में सामान्य घोषित 14 ग्राम पंचायत को पुन: अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया जाये। साल 2022 की जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कोड की व्यवस्था किया जाए, बस्तर संभाग से पूरे कैंप वापस लेने को लेकर सोमवार को महापंचायत आयोजित की। सोमवार को आंदोलन स्थल पर महापंचायत में आसपास के हजारों ग्रामीण तथा क्षेत्रीय पार्टियों के जनप्रतिनिधियों के अलावा दक्षिण बस्तर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी समेत 12 सदस्यी दल बेचाघाट पहुंची थी।
बड़ी संख्या में जुटे आदिवासी नेता
सिलगेर के बाद इस आंदोलन में दक्षिण बस्तर से लखेश्वर कोवाची, बजर कश्यप, बामन पोडियम, सोनी सोरी, आशु राम, मोती कुंजाम, हिड़मा, गंगा, राजू, सुरेश, सोनी, गुडू और स्थानीय स्तर से गज्जू पददा, सिया राम पुडो, मैनी कचलाम, बसन्त धु्रव, मैनु राम पोटाई, दया उसेंडी समेत आदिवासी प्रमुखजन और हजारों आदिवासी मौजूद रहे हैं। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जगतराम दुग्गा, गोंड़ समाज अध्यक्ष संतलाल दुग्गा, सहदेव उसेंडी ने कहा कि हमारी लड़ाई निरंतर जारी रहेगी। हम लड़ेंगे और जीतेंगे। पुलिया पर्यटन केंद्र, बीएसएफ कैंप स्थापना की स्वीकृति निरस्त करवाकर रहेंगे।
सोनी सोरी ने विधायक अनुप नाग पर साधा निशाना
सोनी सोरी ने कहा कि जेल में बोरे में डाल कर फेंका गया एसिड फेंककर मुझे बर्बाद करने की कोशिश की गई। एक्सीडेंट कर मारने की कोशिश हुई। पर प्रकृति शक्ति की ताकत से आज भी जिंदा हूं। मैंने खुद के अलावा जेल में बंद महिलाओं के उपर हुई अत्याचार देखी है। जेल में भी महिलाओं के साथ बलात्कार और दैहिक शोषण होते हैं। मैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जेल से बाहर आकर आज लड़ रही हूं। मुझे बस्तर के शोषित पीड़ित लोगों के लिए लडऩा है, पर इसके सामाजिक संगठन जरूरी है। हम एक जुट नहीं हुए तो बस्तर में आदिवासियों की नामोनिशान मिट जाएगी। बस्तर सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर का दर्द हमने देखा है।
सोनी सोरी ने कहा कि कांकेर जिले के सुदूर अंचल के लोग एकजुट होकर अपनी जल जंगल जमीन और अस्मिता को बचाने की लड़ाई नहीं लड़े तो सोच लो एक दिन हमारे जिले जैसे यहां की भी हालत होगी। उन्होंने आगे कहा कि जंगल में ही कितने दिनों तक धरने पर बैठेंगे। आप लोगों का साथ जो हो रहा है इस आंदोलन को शहर तक ले जायेंगे। विधायक सांसद का निवास घेरेंगे। बीजापुर, सुकमा, सिलगेर से आए महिला पुरुषों ने अपने विचार अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में रखे। लोगों ने लोकसभा न विधानसभा, सबसे बड़ा ग्रामसभा की नारे लगाए।
अफसर बोले-आंदोलन में तथ्यात्मक मांग नहीं
धरना प्रदर्शन के नेतृत्वकर्ता मैनी पद्दा - गज्जू पद्दा ने कहा कि ग्राम सभा में हमने विरोध प्रस्ताव पारित किया। सरकार को इसे आधार मानकर पुल निर्माण सहित हमारी सभी मांगे माननी पड़ेगी। रूढ़ी ग्राम सभा में तहसीलदार और नायब तहसीलदार पखांजूर ने पहुंच कर अपनी बातें रखी। तहसीलदार शेखर मिश्रा ने कहा कि सितरम में पर्यटन केंद्र की कोई योजना नहीं है। काल्पनिक बात है यह सही नहीं है। 14 पंचायतों को अपवर्जन करने का मामला नया नहीं है। पहले से होता आ रहा है। 2019 - 20 में चुनाव में कोई सरपंच चुनाव नहीं लड़ा।
सरपंच का पद खाली होने पर जिला प्रशासन अपर्वजन की कार्रवाई करती है। इसके लिए ग्राम सभा होती हैं, सभी मतदाताओं का नाम पढ़ा जाता है। ग्राम सभा में कोई आदिवासी नहीं मिलने पर सामान्य लोगों के अपर्वजन किया जाता है। अपर्वजन एक समय के लिए होता है। आम चुनाव में फिर से एसटी आरक्षण हो जाता है। पुल निर्माण के लिए कोई कार्य आदेश जारी नहीं हुआ है। बीएसएफ कैंप स्थापना के लिए स्थानीय प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है। कोई योजना और कार्यवाही मुझे मालूम नहीं है। आंदोलन में कुछ मांगें तथ्यात्मक नहीं है। कुछ बातें शंकाओं में है।
सर्व आदिवासी समाज प्रदेश उपाध्यक्ष सुरजू टेकाम ने कहा कि आदिवासी कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। मीडिया, सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी पहुंची है। लेकिन हमारे नालायक विधायक सांसद और जनप्रतिनिधियों के कारण शासन प्रशासन नहीं सुन रही है। राजनीति वाले आदिवासी भाजपा अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर सिर्फ वोट लूटने का काम करते हैं।आज हम हक अधिकार की बात करते हैं, तो कहां गए आदिवासी भाजपा और आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष। आदिवासी रूढ़ी ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित हो और सभी राजनीतिक पार्टियों का प्रवेश आदिवासी अंचल में पाबंद हो।
लेखक दक्षिण कोसल/द कोरस के संवाददाता हैं।
Add Comment