राजधानी प्रभावित किसानों का एनआरडीए भवन के सामने दिन रात का अनिश्चितकालीन धरना
नगरीय प्रसाशन मंत्री के बयानों की किया कड़ी निंदा
द कोरस टीमनई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति नवा रायपुर के बैनर तले 3 जनवरी को राजधानी प्रभावित ग्रामों के हजारों किसानों का परिवार सहित रात दिन का अनिश्चित कालीन धरना का सातवां दिन पूरा हो चुका है जो एनआरडीए भवन के सामने नया रायपुर में ही जारी है।

नया रायपुर पुनर्वास योजना के अनुसार अर्जित भूमि के अनुपात में उद्यानिकी/ आवासीय/व्यवसायिक भूखंड पात्रतानुसार निःशुल्क मिलने के प्रावधान का पालन किया जाना चाहिए। भू अर्जन कानून 1894 के अंतर्गत हुए अवार्ड में भूस्वामियों को मुआवजा प्राप्त नहीं हुए हैं।
उन्हें बाजार मूल्य से 4 गुणा मुआवजा मिलनी चाहिये। नवा रायपुर क्षेत्र में ग्रामीण बसाहट का पट्टा मिलना चाहिए। वार्षिकी राशि का पूर्ण रूपेण आबंटन किया जाना चाहिए।
पुनर्वास पैकेज 2013 के तहत सभी वयस्कों को 1200 वर्गफीट मिलने वाली भूखंड दिया जाए। साल 2005 से भूमि क्रय विक्रय पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए।
गुमटी, चबूतरा, दुकान, व्यवसायिक परिसर में दुकान जो आबादी से सटी हुई है जिसे 75 प्रतिशत प्रभावितों को लागत मूल्य पर देने के प्रावधान का पालन किया जाए।
नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष रूपन चन्द्राकर ने बताया कि मांगों के संबंध में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा और वर्तमान कांग्रेस सरकार के साथ अब तक 12 दौर की चर्चा हुई है।
और उसमें किसानों के पक्ष में निर्णय भी लिए जा चुके हैं लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा है। राज्य सरकार नया रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) प्रबंधन को जब तक परिपालन नहीं कराया जाएगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना में सम्मिलित सभी लोगों ने एक स्वर में क्षेत्रीय विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया के उस बयान के प्रति कड़ी निंदा प्रस्ताव पारित किया है जिसमें अखबार के माध्यम से मंत्री जी द्वारा कहा गया है कि हमने किसानों की मंडल से चर्चा किया है। जो सरासर झूठ है।
अब तक नई राजधानी प्रभावित किसान संगठन के सदस्यों के साथ मंत्री जी का कोई चर्चा नहीं हुआ है और जो मंत्री जी के बयान के साथ किसानों का फ़ोटो छपा है उनमें से एक भी व्यक्ति समिति का सदस्य नहीं है।
साथ ही मंत्री ने एक और झूठ बोला है कि 2005 के पहले के काबिजों को पट्टा दिया जा चुका है जबकि यह केवल कागज में हैं वास्तव में भूखंड कहाँ है इसकी भी अता पता नहीं है।
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