पाखंडी बाबाओं से बचने की जरूरत, कोई चमत्कार नहीं बल्कि हाथों की सफाई
विक्तु बाबा विहार के नाम पर अंधविश्वास, ठगी और मानसिक बीमारियों के नाम पर गोरखधंधा
सुशान्त कुमारहाल में विक्तु बाबा विहार के नाम पर अंधविश्वास, ठगी और मानसिक बीमारियों को स्वस्थ कर देने का बाजार समाज में तेजी के साथ फैलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में अगिनत मामले सभी जिलों में फैलाया जा रहा है और यह विशेषकर महार जाति के लोगों में सबसे ज्यादा है, जो अपने आप को बौद्ध और आम्बेडकर के अनुयायी बताते हैं। सूत्रों ने बताया कि लोगों से इलाज के नाम पर कपड़े उतरवाये जाते हैं और शरीर को नीम के पत्तों से ढंक कर कमरे के अंदर लोभान से भूत और शैतान भगाये जाने का इलाज करते हैं। देखा यह भी गया है कि कई परिवार अपने मानसिक बीमारियों के इलाज के लिये नागपुर के बुटिबोरी के पास स्थिति टाकलघाट में जाकर किराये में मकान लेते हैं और अपने मानसिक बीमार बच्चों जिसमें लड़कियों तक को ले जाकर किराये के मकान में रहते हैं और वहां झाडफ़ूंक और तंत्र मंत्र से इलाज का रास्ता निकाल रहे हैं। इससे वे अपने धन, समय और इज्जत को बर्बाद कर रहे हैं और जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

हाल में विक्तु बाबा विहार के नाम पर अंधविश्वास, ठगी और मानसिक बीमारियों को स्वस्थ कर देने का बाजार समाज में तेजी के साथ फैलाया जा रहा है। खबर के अनुसार मामला मोहन नगर दुर्ग थाना क्षेत्र का है। शंकर नगर के जागृति चौक निवासी राहुल बोरकर उर्फ विक्तु बाबा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कोसानाला, सुपेला निवासी रवि चंद्रिकापुरे ने पुलिस में की गई शिकायत में बताया कि बाबा विज्ञापन के माध्यम से संतानोपत्ति, पुत्र प्राप्ति, व्यापार में तरक्की, नौकरी आदि समस्याओं का निवारण पूजा पाठ व तंत्र मंत्र से किए जाने का प्रचार किया जा रहा था। जिसमें प्रभवित होकर उसने बाबा से संपर्क किया।
रवि पुत्र प्राप्ति की चाहत के साथ व्यवसाय व स्वास्थ्य को लेकर मानसिक रूप से परेशान था। इन समस्याओं का निराकरण करने का वादा बाबा ने रवि से किया था। जिसके लिए उसे कभी शंकर नगर के जागृति चौक स्थित आश्रम में तो कभी ग्राम अरसनारा स्थिति आश्रम में बुलाया जाता। इस दौरान बाबा ने पूजा पाठ व तंत्र मंत्र के लिए किश्तों में 4 लाख 15 हजार रुपये भी वसूल लिए थे। साल भर बाद भी समस्याओं से रवि को निजात नहीं मिलने पर उसे ठगे जाने का अहसास हुआ। रवि द्वारा दी गई रकम को वापस किए जाने की मांग करने पर बाबा हीलाहवाला करने लगा। जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई।
सीएसपी विवेक शुक्ला ने बताया कि रवि के अलावा आरोपी बाबा ने कोसानाला की दीक्षित कालोनी निवासी शैलेन्द्र मेश्राम से भी संतान प्राप्ति के लिए 12 हजार रुपये की रकम वसूल ली थी। वहीं संतोष कुमार मरावी से उसकी पत्नि चंद्रकला की बीमारी को ठीक करने का झांसा देकर 5 हजार रुपये वसूल लिए थे, लेकिन किसी भी समस्या का निवारण नहीं हुआ। ठगी के इन मामलों की शिकायत की जांच के पश्चात राहुल बोरकर के खिलाफ पुलिस ने दफा 420 तथा चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया। आरोपी बाबा को शनिवार को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। http://4thnation.com/archives/4753
ऐसे अगिनत मामले छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में फैलाया जा रहा है और यह विशेषकर महार जाति के लोगों में सबसे ज्यादा है जो अपने आप को बौद्ध और आम्बेडकर के अनुयायी बताते हैं। सूत्रों ने बताया कि लोगों से इलाज के नाम पर कपड़े उतरवाये जाते हैं और शरीर को नीम के पत्तों से ढंक कर कमरे के अंदर लोभान से भूत और शैतान भगाये जाने का इलाज करते हैं।
देखा यह भी गया है कि कई परिवार अपने मानसिक बीमारियों के इलाज के लिये नागपुर के बुटिबोरी के पास स्थिति टाकलघाट में जाकर किराये में मकान लेते हैं और अपने मानसिक बीमार बच्चों जिसमें लड़कियों तक को ले जाकर किराये के मकान में रहते हैं और वहां झाडफ़ूंक और तंत्र मंत्र से इलाज का रास्ता निकाल रहे हैं। इससे वे अपने धन, समय और इज्जत को बर्बाद कर रहे हैं और जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जब गूगल में इस संबंध में खबरों को खंगालने का काम किया तो पता चला कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ ड्रेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राजन माकणीकर ने मीडिया को विक्तु बाबा के संबंध में एक बयान जारी किया है, जिसमें बताया है कि झूठे विक्तु बाबा, बौद्ध धम्म और अम्बेडकरवादी सोच के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।
उन्होंने बयान में कहा है कि यह घृणित है और वैज्ञानिक विचारों से लैस लोगों को अंध विश्वास की ओर ले जाता है। राजन माकणीकर ने मीडिया को बताया कि महाराष्ट्र राज्य में नागपुर धम्मभूमि के नजदीक टाकलघाट में एक मठ अपनी जुबानी अन्धविश्वास को स्थापित कर रहा है। यह धम्म और आम्बेडकरवादी विचारधारा से मेल नहीं खाता है।
आम्बेडकर के दर्शन में अन्धविश्वास और कर्मकांडों का कोई स्थान नहीं है। अंधविश्वास फैलाने वाले मनोचिकित्सक की दृष्टि से विक्तु बाबा के मंदिर और मठ की इमारत को तत्काल ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वहां बुद्ध और आम्बेडकर के विचारों को झुठलाकर धम्म और आम्बेडकर के विचारों को कलंकित करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. राजन माकणीकर ने कहा कि बुद्ध और बाबासाहेब आम्बेडकर के विचारों की उपेक्षा कर समाज में अंधविश्वास पैदा करने का कार्य इसी मानसिक बीमार भवन से किया जा रहा है।
उन्होंने सुझाया कि इस भवन और संगठन के न्यासी मंडल को भंग कर समाज को अंधविश्वास से मुक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा वहां उपलब्ध अंधश्रद्धा फैलाने वाले गीत, भजन, आरती और अन्य साहित्य को नष्ट कर दिया जाना चाहिए और इसके मास्टरमाइंड का पता लगाना चाहिए और अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस संबंध में पार्टी प्रमुख कनिष्क कांबले के नेतृत्व में डॉ. राजन माकणीकर की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें श्रवण गायकवाड़, वसंत कांबले, विजय चव्हाण, हरिभाऊ कांबले और वसंत लामटूरे राज्यपाल से मिलेंगे और विज्ञान आधारित समाज बनाने का काम करेंगे। Posted on March 4, 2021 by Staff Reporter
इस संबंध में जब दक्षिण कोसल/द कोरस ने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के प्रमुख प्रोफेसर मछिन्द्रनाथ मुंडे से बात की तो उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति नागपुर के कार्य अध्यक्ष गौरव एनले का हवाला देते हुवे बताया कि वहां खुले में बौद्ध विहार और दरगाह दोनों संयुक्त है।
विक्तु बाबा के संबंध में बताते हैं कि एक व्यक्ति जो विक्षिप्त था वह सट्टा का नम्बर बताता था जहां संजोग से कुछ का नम्बर लग जाता था और वह इस तरह बाबा बन गया। विक्तु बाबा ने चंदा जुटा कर विहार बांध दिया। आगे चल कर इस तरह वहां कुछ लोगों ने चंदा से बुद्ध विहार और दरगाह बना दिया। वे कहते हैं कि बीजेपी का विधायक का कहना है कि दो तीन साल रूको फिर इसे उखाड़ देना।
नागपुर के महाराष्ट्र अंधविश्वास निमूर्लन के कार्य अध्यक्ष गौरव ने बताया कि टाकलघाट में बाबा का दरगाह बनाकर रखा है। हमारे मानसिक पीडि़त यहां आते हैं उनका मानना है कि विक्तु बाबा प्रसन्न होते हैं और सभी का दुख दर्द दूर होता है। मन्नत मांगते हैं कि नौकरी, शांति और उनके बीमारियां खत्म होने चाहिए। गौरव कहते हैं कि यहां बौद्ध ज्यादा आते हैं। यह समाज में अच्छी प्रथा नहीं है। भूत बाधा शैतान आने का नाटक करते हैं उसके माध्यम से अंधविश्वरास फैलता है।
गौरव बताते हैं कि -‘हम लोगों को कितना बताये सही मार्ग नहीं देखते हैं गलत पर ज्यादा विश्वास करते हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि महाराष्ट्र अंधश्रद्धा समिति ने विक्तु बाबा के असलियत बताने के काम को हाथ में लिया है। ट्रस्टी तथा भाजपा का एमएलए नाना श्याम कुले यहां चेयरमेन हैं। हम उनके पास जाकर निवेदन करने वाले हैं कि यहां जो चल रहा है वह ठीक नहीं है।
इसके अलाया हम वहां ऐसे लोगों को शतर्क करने के लिये इलाज करने के लिये ‘दवा और दुआ’ भी करो अभियान चलाने वाले हैं हम बताने वाले हैं कि अस्पताल छोड़ दरगाह के पीछे मत दौड़ों। उन्होंने वहां मानसिक उपचार के विशेषज्ञों की सुविधा जुटाने वाले हैं साथ ही मानसिक बीमारियों का इलाज और दवा की व्यवस्था की योजना बनाने की बात कही है।
हाल ही में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एंटी सुपरस्टीशन ऑर्गेनाइजेशन (एएसओ) ने दो दिवसीय अंधविश्वास उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के प्रमुख प्रोफेसर मछिन्द्रनाथ मुंडे और समिति की सचिव सुशीला मुंडे शामिल हुई थी।
मुंडे ने बताया कि आज जिस तरह से चमत्कारी बाबा भोले - भाले जनता को जिस तरह से अपने जाल में फंसाते हैं। उसके बारे में हमें सजग रहने की आवश्कता है। पाखंडी बाबा सिर्फ अपनी जेब भरने वाले होते हैं। इसकी करनी और कथनी में अंतर होता है। इन बाबाओं से बचने की जरूरत है और लोगों को समझाने की जरूरत है कि एक अच्छे समाज की स्थापना कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पाखंडी बाबा चमत्कार दिखाने का दावा करते हैं, लेकिन असलियत में यह नहीं होता है। बल्कि लोगों को गुमराह करने की कोशिश होती है। इसको हमें समझने की सख्त जरूरत है। क्योंकि आज तक दुनिया में कोई मरा हुआ व्यक्ति को जीवित नहीं कर सका है। उन्होंने कहा कि कोई पाखंडी बाबा चमत्कार नहीं करते बल्कि भक्तों को वह काम देते हैं। इन बाबाओं से बचने के लिए पहले समूह में इकट्ठे होकर चर्चा करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा पुलिस, प्रशासन आदि को ध्यानाकर्षण कराने की जरूरत होती है। उन्होंने बाबागिरी का मुकाबला कैसे करें इसके बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि हमें पहले तो स्वास्थ्य, कानून और काउंसलिंग करने की आवश्यकता है। उन्होंने ये भी कहा कि कई पाखंडी बाबाओं के पास बचने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप होता है। इसको सोशल मीडिया में वायरल कर पर्दाफाश करने की आवश्यकता है।
प्रोफेसर मुंडे ने राशिफल और ज्योतिष शास्त्र को पूरी तरह से असत्य बताया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष कमाई के लिए ग्रह-नक्षत्रों का सहारा लेते हैं और गलत जानकारियां लोगों तक पहुंचाते हैं, जिसका विरोध किया जाना चाहिए।
मुंडे ने हाथों की सफाई से एक चम्मच को मोड़ते हुए नीचे गिरा दिया। इसी तरह कैलेंडर में शॉर्ट कट से गुणा भाग करने का तरीका बताया। इसके अलावा उन्होंने ज्योतिष गणना खेल का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि किस तरह के आकार बना कर लोगों को समझाने के लिए वह अपने तरीके अपनाते हैं। इसके बाद वह पूछते हैं कि आपका जन्म किस समय हुआ। उसके आधार पर लोगों का भविष्य बताते हैं। जबकि आज दुनिया में अधिकांश देशों में भारत में करीब 12 बज रहे है तो अन्य देशों में यही समय दोपहर 3 बजते हैं।
एएसओ के अध्यक्ष टिकेश कुमार ने बताया कि प्रो. मुंडे ने बेल्ट से एक उंगली में लोहे को उठाकर सब को दिखाया कि किस प्रकार पाखंडी बाबा लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। उन्होंने बिना माचिस के नारियल में आग लगाकर बताया। साथ ही नारियल के अंदर रखें रंगीन कपड़ों के टुकड़े को निकाल कर बताया। प्रोफेसर मुंडे ने पानी से दिया जलाकर सबको चौंका दिया। दरअसल पानी में केमिकल मिलाकर उसमें आग लगाई। साथ ही पानी से चना बना कर सबको चौंका दिया।
सुशीला मुंडे ने संगठन निर्माण और पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर जानकारियां साझा की। उन्होंने अंधविश्वास को मिटाने के लिए युवाओं से एंटी सुपरस्टेशन आर्गेनाइजेशन के जरिए स्वच्छ समाज बनाने के लिए आह्वान किया।
मानसिक रोग भूत का असर नहीं, बल्कि एक बीमारी
फिलिप पिनेल एक फ्रेंच फिजीशियन थे। जिन्होंने पहली बार बताया कि मानसिक रोग भूत का असर नहीं, बल्कि एक बीमारी है। साल 1791 में पेरिस के मानसिक अस्पताल के प्रभारी बनते ही मानसिक रोगियों को लोहे की जंजीर से मुक्त करके उनके साथ मानवीय व्यवहार करने का आदेश दिया। इन आदेशों का अस्पताल के अधिकारियों द्वारा काफी मजाक उड़ाया गया और पिनेल को ही एक पागल समझा जाने लगा।
‘मानसिक रोग’ जिसे आज एक गंभीर रोग की श्रेणी में रखा जाता है। उसे एक दौर में भूत-प्रेत का साया समझा जाता था। लोग चिकित्सकों के पास जाने की बजाए ओझाओं के पास जाना पसंद करते थे। ताकि, वे झाडफ़ूंक कर पीडि़त को मुक्ति दिला सके, लेकिन जब तक ऐसा हो पाता।
तब तक या तो पीडि़त बीमारी से मर जाता या फिर तंत्र-मंत्र से और ज्यादा पागल हो जाता। आज भी भारत के पिछड़े लोगों में मानसिक रोगियों को ओझाओं/तांत्रिकों के पास लेकर जाते हैं और उनकी जाल में फंसकर समय व धन के साथ रोगी की जान भी चली जाती हैं।
मानसिक बीमारी ठीक करने में सरकार से ज्यादा समाज की भूमिका
मानसिक बीमारियों और उसके उपचार की उपलब्धता पर आगरा स्थिति मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा. दिनेश राठौर कहते हैं कि समाज में मानसिक बीमारी को लेकर जागरुकता का बेहद आभाव है। जो कम गंभीर मानसिक रोग है उनको अक्सर लोग पहचान नहीं पाते हैं। उसी के साथ में जीते रहते हैं। उनके संबंध खराब हो जाते हैं। जब बीमारी गंभीर हो जाती है, तब लोग अस्पतालों का रुख करते हैं। ज्यादातर लोग पहले किसी प्राइवेट संस्थान या मेडिकल कॉलेज में जाते है। जब हर जगह से लोग मायूस हो जाते है तब हमारे यहां आते हैं। भारत में मानसिक बीमारी दिन-ब-दिन गंभीर रूप ले रहा है।
राठौर बताते हैं कि लगभग 90 प्रतिशत मरीज बिलकुल सही हो जाते हैं। जो समाज में जाकर सामान्य जीवन जीना शुरू कर देते है। 10 प्रतिशत ऐसे होते हैं जिनमें सुधार तो होता है, लेकिन उनकी स्थिति ऐसी नहीं होती की वे अपना काम कर सकें। इनकी बीमारियों की पुनरावृति होने की संभावना होती है।
मानसिक रोगियों के साथ काम करना मेकैनिकल नहीं होता है। हम उनकी सिर्फ बीमारी को ठीक नहीं कर रहे होते है। हम एक व्यक्ति के पूरी जिंदगी को समझकर उसे ठीक करने का प्रयास करते है। मानसिक रोग की वजह से उसके संबंध भी खराब होते हैं। वो भावनात्मक रूप से भी काफी कष्ट में होता है। उसके परिवार के लोगों की उससे कुछ उम्मीदें और आलोचना होती है।
तो हमारा एक काम मरीज तक ही सीमित न होकर के उसके परिवार, उसके संबंध और यहां से उसके जाने के बाद किस तरह उसे समाज में रहने के लायक बनाया जाय, ये सब भी होता है. ये काम थोड़ा व्यापक है क्योंकि डॉक्टरों की कमी है। हमें मरीजों का विश्वास जीतने के लिए उनको समय देना होता है क्योंकि भरोसा होने के बाद ही वे अपनी जिंदगी की गोपनीय बाते हमसे शेयर करते हैं।
अभी हमारी समस्या ये है कि जितना वक्त देना चाहिए हम उन्हें नहीं दे पाते है। यूरोपियन देशों और अमेरिका में नियम है कि कोई भी साइकेट्रिस्ट एक दिन में पांच से सात मरीज देखेगा उससे ज्यादा नहीं देख सकता है। एक मरीज को कम से कम 20 मिनट का समय देगा। इससे कम समय देने और तय मरीजों की संख्या से ज्यादा मरीज देखने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
वर्तमान में भारत में डॉक्टर की कमी और मरीजों की ज्यादा संख्या के कारण यहां हर डॉक्टर को रोजाना 40 से 50 मरीज देखना पड़ता है। जिस कारण हम मरीजों को वक्त नहीं दे पाते हैं। हमारे यहां ओपीडी में 200 से 300 लोग आते हैं। जिसे देखने के लिए सिर्फ चार से पांच डॉक्टर होते हैं।
डॉ. राठौर कहते हैं कि समाज में लोग मानसिक बीमार लोगों का मजाक उड़ाते है। क्योंकि उनमें जागरुकता की कमी होती है। और जब मजाक उड़ाने वाले व्यक्ति को मानसिक रोग होगा तो वही व्यक्ति सबसे आखिरी में उपचार के लिए जाएगा। और सबसे ज्यादा पीड़ा झेलेगा। तो समाज को किसी दूसरे के लिए जागरूक नहीं होना है बल्कि अपने लिए और अपने परिवार के सदस्यों के बारे में सोचना है। कोई मानसिक बीमार हो तो उसकी जगह खुद को या अपने परिजनों को रखकर देखें और फिर सोचे कि मुझे किन चीजों का ध्यान रखना है।
इस तरह से अगर हमारा समाज सोचेगा तभी फायदा होगा। बहुत लोग मानते हैं कि हम पैसे वाले हैं, हमें मानसिक रोग नहीं होगा। लेकिन वो गलत सोचते हैं। मानसिक बीमारी का पैसे से कोई संबंध नहीं होता है। मेरा मानना है कि मानसिक बीमारी को कम करने में सरकार से ज्यादा समाज की भूमिका है। सरकार कई स्कीम चला रही है, लेकिन समाज में बदलाव व्यक्ति के जागरुक होने से ही आएगा। अगर समाज जागरुक होगा तो मानसिक बीमारी बड़ा रूप नहीं ले पाएगी।
वे कहते हैं कि हमारे यहां अभी मानसिक बीमार लोगों के इलाज का मकसद उन्हें बस ठीक करना है। हमें मानसिक रोगियों के इलाज के दूरगामी उद्देश्य भी ध्यान में रखने होंगे। उस व्यक्ति के ठीक होने के बाद समाज में उसका पुर्नवास किस तरह हो इसका कोई खास इंतजाम भारत में नहीं है। एक बार हमने उसे ठीक तो कर दिया लेकिन भविष्य में भी तनाव के दौरान वो फिर उस बिमारी के चपेट में आ सकता है। हमें उसके पुनर्वास पर भी काम करना होगा। इससे भविष्य में बीमारी की पुनरावृति की संभावना कम हो जाती है। अभी भारत में इस तरह के अप्रोच कम है चाहे सरकारी सेंटर हो या प्राइवेट सेंटर हो।
वेबसाइट न्यूज लांड्री के अनुसार राष्ट्रपति ने साल 2017 के दिसम्बर में कहा था कि भारत संभावित मानसिक स्वास्थ्य महामारी के मुहाने पर खड़ा है और मानसिक बीमारी प्रभावित 90 प्रतिशत मरीज चिकित्सा सुविधा से वंचित हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति ने चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि हमारे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 में यह पाया गया है कि भारत की आबादी के करीब 14 प्रतिशत लोगों को सक्रिय मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप की जरूरत है। करीब दो प्रतिशत लोग गंभीर मानसिक विकार से ग्रस्त हैं।
यही नहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एचएल दत्तू ने भी चिंता जाहिर करते हुए कहा था, ‘भारत में आज 13,500 मनोरोग चिकित्सकों की आवश्कता है, लेकिन 3,827 ही उपलब्ध हैं। 20,250 क्लीनिकल मनोरोग चिकित्सकों की आवश्कता है जबकि केवल 898 उपलब्ध हैं। इसी तरह पैरामैडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है।’
फर्जी बाबा ने विवाहिता से किया दुष्कर्म
51 वर्षीय प्रभाकर म्हस्के ने खुद को टाकलघाट के संत विक्तु बाबा का अवतार होने का दावा किया। सूत्रों ने कहा कि गोंदिया, गढ़चिरौली, चंद्रपुर, भंडारा से लोग उनके पास अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए आते थे। इन लोगों का मानना है कि वह उनकी समस्याओं को हल कर सकता है।
उसके द्वारा किए गए चमत्कारों के बारे में सुनकर, पीडि़ता जो लंबे समय से खराब स्वास्थ्य से त्रस्त थी, अपने पति के साथ नकली साधु को देखने आई। म्हस्के ने उन्हें 5000 रुपये का भुगतान करने और हर सोमवार को एक पखवाड़े के लिए उनसे मिलने का निर्देश दिया। बुधवार को दंपत्ति उनके निर्देशानुसार भगवान के दर्शन करने गए। म्हास्के ने कुछ पूजा करने के बहाने पीडि़ता के पति को पास के एक मंदिर में भेज दिया और फिर महिला के साथ बलात्कार किया
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