अमृत मिशन की दिक्कतों से क्या आने वाले समय में लोगों को मिलेगा निजात
सुशान्त कुमारअमृत मिशन योजना की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर पार्षद गगन आईच ने इसकी सूचना नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु को दी। उन्होंने पार्षद दल की उपस्थिति में अमृत मिशन के जिम्मेदार कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल पाईप लाईन को सुधारने के लिए कहा और यह भी कहा गया कि वार्डवासियों की तरफ से आये दिन शिकायत मिल रही है जो ठीक नहीं है। यदि यही रवैया रहा तो पार्षद दल द्वारा शीघ्र उग्र आंदोलन किया जायेगा। जिसके लिए अमृत मिशन एजेंसी का ठेकेदार एवं उनके कर्मचारी जिम्मेदार होंगे। जिसमें प्रमुख रुप से विजय राय, पारस वर्मा, अजय छेदैया, आशीष डोंगरे पार्षद प्रतिनिधि जीवन बंजारे पार्षद प्रतिनिधि एवं वार्डवासियों की भागीदारी रही है।

राजनांदगांव शहर के सभी वार्डों में इन दिनों बगैर सूचना के अमृत मिशन का कार्य संचालित किया जा रहा है, नतीजा यह हो रहा है कि वार्ड की सडक़ों में चलना दूभर हो गया है। ज्ञात हो कि किसी भी निर्माण कार्य की सूचना कार्य एजेंसी को देना आवश्यक होता है जिससे रहवासियों को कोई दिक्कत महसूस ना हो। किन्तु अमृत मिशन का कार्य किस तिथि को किस वार्ड में कहां पर संचालित होगा इसकी आगामी सूचना नहीं दिया जाता है।
इसका दुष्परिणाम वैशाली नगर स्थित खंडेलवाल कालोनी में देखने को मिला जब नियमित पेयजल वाली पाईप लाईन अचानक फुट गया और पल भर में वह क्षेत्र जलमग्न हो गया। वार्डवासियों ने तत्काल इसकी सूचना वार्ड पार्षद गगन आईच को दी। गगन आईच द्वारा तत्काल सुधार कार्य के लिए अमृत मिशन के सुपरवाइजर नवीन यादव को कहा गया किन्तु उन्होंने इसका समाधान करने के बजाय नकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि हर चीज की जानकारी पार्षद को देना जरुरी नहीं है। उन्हें ये भी मालूम नहीं है कि पार्षद एक जवाबदार जनप्रतिनिधि होता है जिन्हें वार्ड में हो रहे विभिन्न कार्यों के क्रियान्वयन की महती जिम्मेदारी होती है।
कब तक पूरी होने की है संभावना?
जल सबकी जरूरत है। शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? कुछ ऐसा सवाल शायद ही किसी के मन में आता होगा। बहरहाल शुद्ध पेयजल सभी नागरिकों की नितांत आवश्यकताओं में से एक है और इसे उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता भी है। वैसे तो छत्तीसगढ़ की सरकार पूरे प्रदेश के हर घर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने नल कनेक्शन की दिशा में कार्य कर रही है, मगर शहरी क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले निकायों में मिशन अमृत योजना के माध्यम से हर घर में निजी नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने कार्य कर रही है। बताया जा रहा है कि लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर चल रही छत्तीसगढ़ की सरकार की कई बड़ी परियोजनाएं इस साल के अंत तक और आगामी वर्ष तक पूरी होने की संभावना है।
किन किन जिलों को किया गया है शामिल
मिशन अमृत योजना सिर्फ सरकार के लिए ही एक बड़ी योजना नहीं है बल्कि यह एक ऐसी योजना भी है जिसमें ‘जल है तो कल है’ का एक बेहतर भविष्य जुड़ा हुवा है। धरातल पर इस योजना का बेहतर क्रियान्वयन लोगों के घरों में नल कनेक्शन के जरिये शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में मददगार साबित तो होगी ही, साथ ही जल प्रदाय योजनाओं की संपूर्णता हेतु मिशन अमृत योजना का धरातल पर तेजी से अमल किया जाएगा। मिशन अमृत योजना में 2011 की जनसंख्या अनुसार 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के 9 नगरीय निकाय रायपुर, भिलाई, दुर्ग,राजनांदगांव, बिलासपुर, कोरबा,रायगढ़ एवं जगदलपुर जिनकी कुल आबादी शहरी आबादी का 54 प्रतिशत है को सम्मिलित किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य समस्त आवासों में निजी नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए कुल 1838 करोड़ रुपए की जल प्रदाय योजना स्वीकृत है।
उच्च स्तरीय पानी टंकी और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य का लक्ष्य
मिशन अमृत योजना के अंतर्गत लक्ष्य अनुसार 9 जलशोधन सयंत्र में से 5 का कार्य प्रगति पर है। 77 उच्च स्तरीय जलागार निर्माण कार्य में 56 प्रगति पर है। पेयजल वितरण हेतु पाइप लाइन विस्तार कार्य के अंतर्गत 3521 किलोमीटर लक्ष्य के विरुद्ध 2659 किमी प्रगति पर है। निजी नल संयोजन कार्य में 322613 नग में से 171664 नग प्रगति पर है।
इस परियोजना में संभावित लागत
निकायों में हर घर नल कनेक्शन और हर घर पानी उपलब्ध कराने छत्तीसगढ़ की सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने हाल ही में समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को जलप्रदाय परियोजना को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए। जल प्रदाय परियोजना में कोरबा लागत राशि 211 करोड़ रुपए, भिलाई लागत राशि 221 करोड़, अम्बिकापुर लागत राशि 100 करोड़, रायगढ़ लागत राशि 131 करोड़ का कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है। रायपुर फेस 1 लागत राशि 156 करोड़, राजनांदगांव लागत राशि 199 करोड़ का 80 प्रतिशत से अधिक का कार्य पूरा हो चुका है। इन सभी परियोजनाओं को इसी साल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दुर्ग लागत राशि 162 करोड़, बिलासपुर 292 करोड़, रायपुर फेस 2 लागत राशि 270 करोड़, जगदलपुर लागत राशि 96 करोड़ रुपए की परियोजना का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जगदलपुर परियोजना को छोडक़र अन्य सभी को फरवरी 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जलप्रदाय परियोजना के पूर्ण होने के साथ 3.22 लाख लोगों को मिलेगा नल कनेक्शन। इस वर्ष के अंत तक और अगले साल माह फरवरी तक जल प्रदाय परियोजनाओं का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होते ही नल कनेक्शन देने और घरों में पानी पहुचाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाएगी। जलप्रदाय परियोजना से जुड़े कोरबा में 26000, भिलाई में 50580, रायपुर फेस 1 में 11526, अम्बिकापुर में 15161, राजनांदगांव में 34000, रायगढ़ में 26837, दुर्ग में 21517, बिलासपुर में 56251, रायपुर फेस 2 में 56409 और जगदलपुर में 24332 नल कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
जल आवर्धन योजना से 1.53 लाख घरों में मिलेगा नल कनेक्शन
नगरीय निकायों में जल आवर्धन योजना अंतर्गत जलप्रदाय परियोजना का कार्य भी प्रगति पर है। शिवपुरचर्चा, जशपुर नगर और नारायणपुर जल आवर्धन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस वर्ष के अंत तक महासमुंद, कवर्धा, बलरामपुर और दंतेवाड़ा का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। धमतरी,तिल्दा-नेवरा, खैरागढ़, मुंगेली, जांजगीर-नैला, अकलतरा,सक्ति, बैकुंठपुर कोंडागांव, सराईपाली, भाटापारा और दीपका जल आवर्धन योजना को वर्ष 2022 के अलग-अलग माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर 1 लाख 53 हजार 458 नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त 25 नगर पंचायतों में भी जल आवर्धन योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। इससे 45481 नल कनेक्शन प्रदाय किए जाएंगे।
क्या है मिशन
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में शहरों में परिवारों को बुनियादी सेवाएं (अर्थात, जलापूर्ति, सीवरेज, शहरी परिवहन) मुहैया कराने और सुख-सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से अवसंरचना का सृजन करना है, जिससे विशेषतया गरीबों और वंचितों सभी के जीवन स्तकर में सुधार होगा ।
अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) का उद्देश्य
यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परिवार को निश्चित जलापूर्ति और सीवरेज कनैक्शन सहित नल सुलभ हो। हरित क्षेत्र और सुव्यवस्थित खुले मैदान(अर्थात पार्क) विकसित करके शहरों की भव्यता में वृद्धि करना और गैर-मोटरीकृत परिवहन (अर्थात पैदल चलना और साइकिल चलाना) के लिए सुविधाओं के निर्माण अथवा सार्वजनिक परिवहन को अपना कर प्रदूषण को कम करना। ये सभी परिणाम नागरिकों विशेषतया महिलाओं के लिए महत्व रखते हैं और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा सेवा स्तरीय बैंचमार्क (एसएलबी) के रूप में संकेतक और मानक निर्धारित किए गए हैं। मिशन का प्राथमिक क्षेत्र जलापूर्ति है और इसके बाद सीवरेज है।
तथापि, बेहतर परिणामों का प्रयास सभी को नल और सीवरेज कनैक्शन (सभी को शामिल करते हुए) प्रदान करने पर नहीं रूकेगा। सभी को सेवाएं प्रदान करने के बेंचमार्क का लक्ष्य प्राप्त करने के बाद क्रम दर क्रम प्रक्रिया का अनुसरण करके अन्ये बैंचमार्क का लक्ष्य बनाया जाएगा। बैंचमार्क प्राप्त करने की ऐसी उत्तरोत्तर प्रक्रिया को ‘इंक्रीमेंटलिज्म’ कहा जाता है । इसका तात्पर्य यह नहीं है कि अन्य सेवा स्तरीय बैंचमार्क कम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उत्तरोत्तर वृद्धि प्रक्रिया में सेवा स्तरीय बैंचमार्क राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार धीरे-धीरे प्राप्त किए जाते हैं। शहरी परिवहन के क्षेत्र में, बैंचमार्क का उद्देश्य निर्माण करते समय शहरों में प्रदूषण को कम करना है और वर्षा जल निकासी का अनुरक्षण लागत कम होने की आशा है और अन्त: शहरों में बाढ़ की समस्या को समाप्त करता है जिससे शहरों को अधिक लचीला बनाया जा सकेगा ।
पहले, शहरी विकास मंत्रालय परियोजना-दर-परियोजना स्वीकृति प्रदान करता था। अमृत में इसे, शहरी विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष में एक बार राज्य वार्षिक कार्य योजना के अनुमोदन द्वारा प्रतिस्थापन किया गया है और राज्यों को अपने स्तर पर परियोजनाएं को स्वीकृति और अनुमोदन प्रदान करना होगा। इस प्रकार, अमृत राज्यों को परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन में राज्यों को समान भागीदार बनाता हैं; अत: सहकारी एकीकरण की भावना झलकेगी। मिशन को सफल बनाने के लिए एक सुदृढ़ सांस्थानिक संरचना मूल आधार है। अत: क्षमता निर्माण और सुधारों को मिशन में शामिल कर लिया गया है। सुधारों से सेवा सुलभता और संसाधन जुटाने में वृद्धि होगी और नगरपालिका के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाएगा और पदाधिकारियों को अधिक जबावदेह बनाएंगे जबकि क्षमता निर्माण नगरपालिका पदाधिकारियों को अधिकार प्रदान करेगा और परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
राजनांदगांव में अमृत मिशन के पीडीएमसी विकास मेगी ने बताया कि 199 करोड़ की योजना से राजनांदगांव में पाइपलाइन का विस्तार, जल शुद्धिकरण, संयंत्र और अन्य कार्य किये जाएंगे। 300 किलोमीटर पाइप लाइन का विस्तार 32 हजार नल कनेक्शन इससे प्रदान किये जाएंगे। इस निपटारे की जिम्मेदारी मेसर्स एसएमसी इंफ्राटेक मुंबई को दिया गया है। इसका लक्ष्य 31 मार्च 2022 तक का है। उन्होंने बताया कि 30 से 40 प्रतिशत कार्य करोना महामारी के कारण प्रभावित हो गया है। इसकी मानिटरिंग इरमा, इंडिपेंडेट मार्केटिंग, नगर निगम पीडीएमटी, स्टॉर्ट सुडा और सब इंजीनियर नगर निगम द्वारा किया जा रहा है। डीपीआर के अनुसार काम हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राजनांदगांव निगम में इसकी शुरूआत दिसंबर 2017 से हुई है।
कब हुई थी इसकी शुरूआत
केंद्र सरकार ने देश के 500 शहरों का कायाकल्प करने के लिए शुरू की गयी अमृत मिशन का लक्ष्य दो साल बढ़ा दिया है। अमृत का पूरा नाम अटल मिशन ऑफ रेजूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफोर्मेशन (अमृत) है। अमृत मिशन में मार्च 2020 तक 77,640 करोड़ रुपये खर्च किये जाने हैं। इस रकम से देश के 500 शहरों में 139 लाख वाटर कनेक्शन, 145 लाख सीवर कनेक्शन, स्टॉर्म वाटर द्रेनिंग प्रोजेक्ट, पार्क, हरियाली एवं स्ट्रीट लाइट आदि की व्यवस्था करनी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जून 2015 में अमृत मिशन लांच किया था।
राजनांदगांव के संबंध में छत्तीसगढ़ अखबार ने 25 नवंबर 2021 ने एक खबर बनाई थी जिसमें नगर निगम आयुक्त डॉ. अशुतोष चतुर्वेदी ने अमृत मिशन के कार्य एजेंसी की बैठक लेकर शहर में बिछाए जा रहे पाईप लाइन एवं नल कनेक्शन कार्य में तेजी लाकर समय-सीमा में अमृत मिशन परियोजना पूर्ण करने के निर्देश देने का उल्लेख है।
बैठक में आयुक्त डॉ. चतुर्वेदी ने अमृत मिशन के तहत शहर में चल रहे टंकी निर्माण, पाईप लाइन विस्तार, इंटर कनेक्शन, नल कनेक्शन कार्यों की क्षेत्रवार जानकारी ली। इस खबर में अमृत मिशन के पीडीएमसी विकास मेगी ने बताया कि शहर में 6 स्थानों पर टंकी निर्माण का कार्य किया गया। जिसमें 5 टंकी पूर्ण होकर पानी सप्लाई किया जा रहा है। साथ ही टांकाघर में टंकी निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है एवं पाईप लाइन का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा शहर में इंटर कनेक्शन व पाईप लाइन विस्तार कार्य किए जा रहे है और नल कनेक्शन देने का कार्य भी किया जा रहा है। इस खबर के अनुसार राजनांदगांव में अमृत मिशन का कार्य अंतिम चरण में है।
आयुक्त डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि कार्य में गति लाया जाए और समय सीमा में अमृत मिशन का कार्य पूर्ण किया जाए, ताकि इस ग्रीष्म ऋतु में नगरवासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि शहर में पाईप लाइन विस्तार कार्य में तेजी लाए और क्षेत्रवार कार्य पूर्ण करें, क्योंकि कई क्षेत्रों से पाईप लाईन के लिए खोदकर छोडऩे एवं फिलिंग नहीं करने की शिकायत प्राप्त हो रही है। पूर्व में भी इस संबंध में व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देशित किया गया था, किन्तु आज भी शिकायत प्राप्त हो रही है, इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुवे उन्होंने कंपनी ठेकेदार को कार्य में गति लाकर व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। बैठक में अमृत मिशन एसएमसी इन्फ्राइस्ट्रक्चर के डायरेक्टर अनिरूद्ध सेठ व तेजस के राजेश पवार उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ में अमृत मिशन में नल कनेक्शन का क्या चार्ज लगेगा
2 साल पहले दैनिक भास्कर के खबर के अनुसार नए नल कनेक्शन के लिए नगर निगम भिलाई ने नई पॉलिसी बनाई है। इसके तहत टैक्सपेयर को नल कनेक्शन लेने 6 हजार रुपए की जगह 5 हजार रुपए देने होंगे। वहीं गैरकरदाता को कनेक्शन लेने सिर्फ 2 हजार रुपए देने होंगे। नए कनेक्शन की इस राशि को अगर एकमुश्त नहीं दे सकते तो निगम ने किश्त की सुविधा भी शुरू की है। 100 रुपए से लेकर 250 रुपए महीने तक किश्त में कनेक्शन ले सकते हैं। अधिकतम 20 महीने की ईएमआई होगी।
महापौर देवेंद्र यादव की काउंसिल ने इस पर मुहर लगाई है। फेस-2 अमृत मिशन योजना के तहत निजी नल कनेक्शन के लिए एमआईसी में प्रस्ताव आया। जिस पर चर्चा करते हुए कई फैसले लिए गये। बैठक में यह भी तय हुआ कि कनेक्शनधारियों को महीने में पानी का कितना बिल देना होगा? घरेलू आवासीय हितग्राहियों को 50 हजार लीटर पानी खर्च करने पर महीने में 9 रुपए प्रति हजार लीटर पानी के हिसाब से शुल्क देना होगा। यानि 50 हजार लीटर का महीने में 450 रुपए बिल आएगा। वहीं औद्योगिक घरानों को 50 हजार लीटर पानी खर्च करने पर 18 रुपए तक देने होंगे। इस बैठक में निगम आयुक्त एसके सुंदरानी, एमआईसी मेंबर नीरज पाल, लक्ष्मीपति राजू, केशव बंछोर, साकेत चंद्राकर, सूर्यकांत सिन्हा, जोहन सिन्हा, दुर्गा प्रसाद साहू, सुशीला देवांगन, नरेश कोठारी व सदीरन बानो समेत अन्य मौजूद रहे हैं।
17 सितम्बर 2019 नईदुनिया, बिलासपुर प्रतिनिधि के अनुसार शहर में पेयजल के लिए शुरू की गई अमृत मिशन योजना पूरी तरह अस्तित्व में आई तो लोगों को पानी का बिल मीटर रीडिंग के अनुसार देना होगा। इसके अलावा शुरुआती झटका नल कनेक्शन लेने में लोगों को पड़ेगा। वर्तमान में जहां कनेक्शन लेने का चार्ज 15 सौ रुपये है उसे बढ़ाकर पांच हजार करने की तैयारी है।
शहर में पेयजल के लिए शुरू की गई अमृत मिशन योजना पूरी तरह अस्तित्व में आई तो लोगों को पानी का बिल मीटर रीडिंग के अनुसार देना होगा। इसके अलावा शुरुआती झटका नल कनेक्शन लेने में लोगों को पड़ेगा। वर्तमान में जहां कनेक्शन लेने का चार्ज 15 सौ रुपये है उसे बढ़ाकर पांच हजार करने की तैयारी है। एमआइसी की बैठक में इसे मंजूरी के लिए लाया गया था। जिसे जनप्रतिनिधियों ने खारिज कर दिया है। अब अधिकारी शासन से आदेश लाकर इसे लागू करने की तैयारी में हैं। राजनांदगांव नगर निगम में अमृत मिशन के पास अब तक नल कनेक्शन की दर की जानकारी उपलब्ध नहीं है और ना ही राजस्व के पास किसी प्रकार की कोई जानकारी है।
वार्डवासियों को दिक्कते
बहरहाल अमृत मिशन के तहत नल कनेक्शन के लिये सभी वार्डों में पक्की सडक़ों को खोदा जा रहा है इससे सडक़ों का बुरा हाल है और वार्ड रहवासियों की आवाजाही में दिक्कते आ रही है। सवाल है कि क्या अमृत मिशन के बाद बिगाड़ दिये गये सख्ताहाल सडक़ों का भी उन्नयन किया जाएगा? वहीं इस मिशन के लिये बाहर से लाकर मजदूरों से काम करवाया जा रहा है। स्थानीय मजदूरों को इस मिशन में काम नहीं मिल रहा है। इन मजदूरों को खुदाई, भराई और कनेक्शन का काम दिया गया है। मजदूरों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है देखा गया है कि कई मजदूर महिला अपने बच्चों के साथ काम कर रही है। इनके बच्चों के लिए पालनहार की व्यवस्था भी नहीं है।
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