आदिवासी आश्रम में बच्चों से करवाया जा रहा मजदूरी

लिंगाराम कोडोपी

 

आश्रम के बच्चों से मजदूरी की यह घटना कोई पहली घटना नहीं हैं। स्कूली बच्चों से जलाऊ लकड़ी कटवाना, पानी ढुलवाना ऐसे और कई कार्य हैं जिनको आश्रम अधीक्षक स्कूली बच्चों से करवाया जाता हैं। बताते चले कि आदिवासी बच्चों से मजदूरी करवाया जा रहा है और जिले के नागरिक खामोश हैं, समाज कुछ नहीं बोलेगा, सरकार नियम और कानून जरूर बनाएंगे लेकिन पालन नहीं होगा। 

शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी नींद में हैं तो जिले में बाल अपराध तो जरूर होंगे। एक शिक्षक द्वारा इस प्रकार का बाल अपराध को अंजाम देना बहुत ही निंदनीय और जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शर्म आनी चाहिए। क्या इस अपराध के लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के ऊपर बाल अपराध का प्रकरण दर्ज नहीं होनी चाहिए।

छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दन्तेवाड़ा में  28 नवम्बर को आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी अपने गृहग्राम समेली में किसी काम से अपने मुंह बोले भाई के घर जा रही थी। उसी बीच एक धान का खेत दिखाई दिया उस खेत में बहुत सारे स्कूली छात्र धान की कटाई कर रहे थे। सोरी बच्चों के नजदीक गयी और बच्चों से पूछताछ किया तो पता चला कि वह खेत नवीन आश्रम पोटाली के आश्रम अधीक्षक का हैं। 

आश्रम अधीक्षक  लिंगाराम मरकाम समेली ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं, साथ ही सर्व आदिवासी समाज से ब्लाक इकाई अध्यक्ष भी है। उनकी धर्म पत्नी पायके मरकाम समेली क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य हैं। खेत में करीब 20-22 बच्चे धान कटाई कर रहे थे। उन सभी बच्चों का नाम व कौन से कक्षा में पढ़ाई करते हैं पूरी जानकारी सोनी सोरी ने उनके साथी व जेल रिहाई समिति के सचिव बामन पोडियाम से एक डायरी में लिखवाया।

सारी जानकारी मिलने के बाद सोनी सोरी ने उसी खेत में रहकर दन्तेवाड़ा जिला के जिलाधीश महोदय को फोन किया और कहा कि आपके जिला में क्या हो रहा हैं? जिलाधीश महोदय ने पूछा कि क्या हुआ मेडम तब सोनी सोरी ने पूरी बात बताई और धान काट रहे बच्चे से जिलाधीश महोदय की बात कराई। उस बच्चे से जिलाधीश महोदय दीपक सोनी ने बात किया और बच्चे से कहा कि आप अभी उस खेत से निकलो और वापस स्कूल चले जाओ।

उसी बीच जिला पंचायत सदस्य पायके मरकाम के पति लिंगाराम मरकाम उस खेत में पहुंचे तो जिलाधीश महोदय ने सोनी सोरी से कहा कि  आश्रम अधीक्षक से बात करवाईये, सोनी सोरी ने अधीक्षक को फोन दिया, जिलाधीश महोदय ने अधीक्षक से कुछ सवाल पूछे व बच्चों से मजदूरी करवाने की बात भी पूछे तो अधीक्षक ने मजदूरी करवाने की बात स्वीकार किया।

नवीन आश्रम पोटाली ग्राम पंचायत पालनार में संचालित हैं।  ग्राम पालनार से समेली की दूरी 9 से 10 किलोमीटर हैं। स्कूली बच्चे पालनार से 10 किलोमीटर आश्रम अधीक्षक के घर जाकर मजदूरी कर रहे थे। उस दौरान कोई अप्रिय घटना घटित हो जाये तो उस घटना का जिम्मेदार कौन होगा? जिला प्रशासन? शिक्षा विभाग या आश्रम अधीक्षक? कौन होगा जिम्मेदार?

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार स्कूली बच्चों से मजदूरी करवाने की यह घटना कोई पहली घटना नहीं हैं। स्कूली बच्चों से जलाऊ लकड़ी कटवाना, पानी ढुलवाना ऐसे और कई कार्य हैं जिनको आश्रम अधीक्षक स्कूली बच्चों से करवाया जाता है।

दन्तेवाड़ा जिला के कई अंदरूनी ईलाको में भी शिक्षा के नाम पर आश्रमों को संचालित किया जा रहा हैं। हो सकता हैं उन आश्रमों में भी बच्चों से मजदूरी करवाया जा रहा हो।  देश में तरह-तरह के बाल सरक्षण कानून बनाये गये हैं फिर बच्चों से एक आश्रम अधीक्षक मजदूरी कैसे करवा सकता हैं?

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार किसी के कहने पर अपनी पत्नी का धौंस देता हैं कि मेरी पत्नी जिला पंचायत सदस्य हैं मेरा कौन क्या उखाड़ लेगा? गौर फरमाये आश्रम अधीक्षक सच बोल रहा है क्योंकि जिसके पास पावर है वो कुछ भी कर सकता हैं। अधीक्षक पद में रहने के साथ-साथ ब्लाक इकाई कुआकोण्डा से सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष भी हैं।


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