राजनांदगांव शहर ने मनाया 8वां नालंदा अकादमी स्थापना दिवस
द कोरस टीमराजनांदगांव ने नालंदा अकादमी का 8वां स्थापना दिवस उल्लास के साथ मनाया है। महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर वर्धा, महाराष्ट्र में यह अकादमी विभिन्न राज्यों से पिछड़े और दबे कुचले समाज के गरीब बच्चों के बड़े - बड़े सपनों को पूरा करता है और उन्हें उज्जवल भविष्य की ओर ले जाता है।

कार्यक्रम में रोशनी रामटेके ने बताया कि मैंने सिर्फ पढ़ा ही नहीं अपने मार्गदाताओं और खुद को पहचाना। वह कहती है कि इंदिरा गांधी ट्राइबल विश्वविद्यालय मेें ग्रेजुएशन कर रही है। बताया कि जाति और भेदभाव को जाना है।
अकादमी में जाकर भेदभाव को जाना और दुनिया को समझने की कोशिश की। रामटेके ने बताया कि उनके बहुत सारे दोस्त देश और विदेशों में अलग - अलग विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं।
रीनू वासनिक ने बताया कि वह मुंबई में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही है। राजनांदगांव से वर्धा और वहां से मुंबई तक शिक्षा के लिये पहुंची हैं। इसकी शुरूआत अभियान पुस्तकालय के नाम पर एक लाइब्रेरी के खुलने से हुई। गरीब और पिछड़ी जातियों के बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर पिछड़े समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।
वासनिक कहती है कि नालंदा अपने देश और विदेशों में भी बच्चों को पढऩे के लिये प्रेरित कर रही है। एक लडक़ी भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। वर्धा के अकादमी में सभी एक परिवार की तरह रहते हैं।
आरती भिमटे ने बताया कि शिक्षा की दशा और दिशा वहां जाकर तय किया जा सकता है। नालंदा शिक्षा के क्षेत्र में नया दरवाजा खोलती है। वहां जाकर शिक्षा क्या है और सोच में नया बदलाव आया। अपने तथा समाज के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की है। वहां जाकर अंग्रेजी में पढऩा सीखा। वह बताती है कि भविष्य में भी उच्च शिक्षा हासिल करने के लिये प्रयास जारी रखेगी।
उत्तम कुमार ने बताया कि शिक्षा ईसाई अभियान की तरह होनी चाहिए। और इसका उद्देश्य मात्र नौकरी नहीं बल्कि ज्ञान हासिल करने के लिये होनी चाहिए। अगर व्यक्ति शिक्षा हासिल कर लेता है तो वह स्वयं अपना रास्ता और भविष्य तय कर लेगा।
शुभम रावत ने कहा कि बौद्ध विहार मंदिरों में बदल रहा है उसे रोकना होगा और अपने गौरवशाली इतिहास की ओर लौटते हुवे इसे प्राथमिक शालाओं से लेकर विश्वविद्यालय की ओर परिवर्तित करनी होगी।
मागदर्शक डॉ. विजय उके ने बताया कि बच्चों का शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढऩा ही बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘बोधिसत्व सोशल कल्चरल गु्रप’ का इस कार्य में सबसे बड़ा योगदान है।
कार्यक्रम में शिक्षक बीपी मेश्राम, डीपी नोन्हारे, सेवक मेश्राम, बुद्धप्रिय वासनिक, जनक घडड़े, संजय हुमने, उत्तम कुमार, संपादक ‘द कोरस’ जैसे कई महत्वपूर्ण व्यक्ति उपस्थित थे।
गौरतलब बात यह कि इस कार्यक्रम में शहर के बच्चे, विद्धार्थी और उनके माता - पिता भी आमंत्रित थे। नालंदा से उच्च शिक्षा में पहुंचे शुभम रावत ने आधार वक्तव्य तथा कार्यक्रम का संचालन किया।
इसके अलावा शहरे के वरिष्ठजन नागरिक सामाजिक कार्यकर्ता और तमाम विधार्थी इस स्थापना दिवस पर उपस्थित थे। सभी ने नालंदा अकादमी की स्थापना और इसके उल्लेखनीय कार्यों को बारे में जाना।
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