छत्तीसगढ़ के किसानों ने नकारा तीन केंद्रीय कृषि कानून 

छत्तीसगढ़ के राजिम में आयोजित किसान महापंचायत 

द कोरस टीम

 

केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन में सभी कृषि उपजों को खरीदी के लिए कानूनी गारन्टी की मांग को लेकर 28 सितम्बर छत्तीसगढ़ के राजिम में किसान महापंचत को व्यापक सफल बनाने के लिए आभार माना।

किसान महापंचायत आयोजन कमेटी के सदस्यों ने किसानों, रेजा, हमाल मजदूरों, आम नागरिकों और बुद्धिजीवियों तथा संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली के वक्ताओं के साथ साथ प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन, स्थानीय व्यापारियों का आभार व्यक्त किया है।

महापंचायत में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग यह बताता है कि दिल्ली सीमाओं पर जारी किसानों का आंदोलन केवल किसानों का नहीं बल्कि यह देश के तमाम नागरिकों का आंदोलन बन चुका है।

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से राजिम के किसान महापंचायत में शामिल व्यापक जन सैलाब ने बता दिया है जिसमें महिलओं की बहुत बड़ी भागीदारी रही है। 

आयोजक कमेटी ने महापंचायत की सफलता के लिए माना आभार 

आयोजक कमेटी के संयोजक और छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने किसान महापंचायत को व्यापक सफल बनाने पर आभार वक्तव्य जारी कर उक्त बातें कही।

उन्होंने बताया कि इस महापंचायत को बदनाम करने के लिए भाजपा आर एस एस द्वारा तरह तरह की कोशिशें की गई लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता की उस भाव ने कि दस महीने से किसान दिल्ली सीमाओं पर अपन घर द्वार छोड़कर खेती, किसानी और भोजन के अधिकार की सुरक्षा के लड़ाई लड़ रहे हैं।

उन्हें सुनने तेरह सौ किलोमीटर दूर दिल्ली सीमाओं पर नहीं जा पा रहे हैं लेकिन राजिम पहुंच कर हम राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर, डॉ सुनीलम, बलदेव सिंह सिरसा, सत्यवान, युद्धवीर सिंह, जगतार सिंह बाजवा आदि को सुन और समझ सकते हैं। 

विद्रोही ने आगे बताया कि भारत की अलग अलग भाषा और संस्कृति का संगम किसान महापंचायत में देखने को मिला है। रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के सभी गुरुद्वारा कमेटियों ने खुले मन से भोजन व्यवस्था में मदद की।

सभा स्थल पर ट्रकों में भरकर  केला, सेब और पानी पाउच की व्यवस्था करने वाले समाज सेवकों ने अपना सहयोग प्रदान किया यहां की नजारा भी कमोबेश वैसा ही था जैसे कि दिल्ली सीमाओं पर जारी आंदोलन में है।

छत्तीसगढ़ में भी किसान आंदोलन का  फैलाव अब गतिशील हो चुकी है जो केंद्र की मोदी सरकार को तीनो कृषि कानूनों सहित बिजली बिल संशोधन कानून 2021 को रद्द करने और सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन गारंटी कानून लागू करने पर मजबूर कर देगी।

आपको बचना है तो हमारा साथ देदो नही तो…?

राजिम किसान महापंचायत में देश प्रदेश के किसानों ने हिस्सा लेकर कृषि कानून वापस लेने एक साथ हुंकार भरा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के साथ महापंचायत में योगेंद्र यादव और मेघा पाटकर जैसे दर्जनभर से अधिक राष्ट्रीय नेताओं ने छत्तीसगढ़ के किसानों को आंदोलन से जुड़ने की अपील की है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार देश की सम्पतियों को बेचने और किसानों को कमजोर करने में लगी है। मोदी सरकार को देश के उद्योगपति चला रहे है।

अपने भाषण की शुरुवात “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” के नारे से करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को भी उनकी फसल और दूध का एमएसपी मूल्य नहीं मिल रहा है। किसानों को यदि अपनी जमीन, फसल और नस्ल बचानी है तो उन्हें आंदोलन से जुड़ना पड़ेगा यह आंदोलन सफल नही हुआ तो फिर भविष्य में कोई और आंदोलन सफल नही होगा।

राकेश टिकैत की मीडिया को खुली चेतावनी

राकेश टिकैत रायपुर पहुँचने के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बड़ा बयान दिया, उन्होंने जिस मीडिया में अपनी बात रख रहे थे, उसी मीडिया में अगला टार्गेट मीडिया हाउस को खुली चेतावनीदेते हुवे कहा कि आपको बचना है तो हमारा साथ दे दो नहीं तो आप भी गए।


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