सफल रहा छत्तीसगढ़ में बंद
द कोरस टीमकिसान विरोधी तीन काले कानूनों और मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत भारत बंद को ऐतिहासिक तथा सफल बताया है। छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से जुड़े सभी घटक संगठनों और मजदूर संगठनों ने आम जनता का आभार व्यक्त किया है और कहा है कि मोदी सरकार की कॉर्पोरेटपरस्ती नीति के खिलाफ उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक कि ये कानून वापस नहीं लिए जाते और देश को बेचने वाली नीतियों को त्यागा नहीं जाता।

नेताओं ने कहा है कि इस देशव्यापी बंद में 40 करोड़ लोगों की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र को मटियामेट करने की संघी गिरोह की साजिश कभी कामयाब नहीं होगी।
किसान नेता सुदेश टीकम और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने बताया कि प्रदेश में बंद का व्यापक प्रभाव रहा तथा बस्तर से लेकर सरगुजा तक मजदूर, किसान और आम जनता के दूसरे तबके सडक़ों पर उतरे। कहीं धरने दिए गए, कहीं प्रदर्शन हुए और सरकार के पुतले जलाए गए, तो कहीं चक्का जाम हुआ और राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
किसान नेता संजय पराते ने बताया कि अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, कांकेर, बस्तर, बीजापुर, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर, रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और मरवाही सहित 20 से ज्यादा जिलों में प्रत्यक्ष कार्यवाही हुई।
बांकीमोंगरा-बिलासपुर मार्ग, अंबिकापुर-रायगढ़ मार्ग, सूरजपुर-बनारस मार्ग और बलरामपुर-रांची मार्ग में सैकड़ों आदिवासियों ने सडक़ों पर धरना देकर चक्का जाम कर दिया। इस चक्का जाम में सीटू सहित अन्य मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया और मोदी सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
किसान नेताओं ने बताया कि कई स्थानों पर हुई सभाओं को वहां के स्थानीय नेताओं ने संबोधित किया और किसान विरोधी कानूनों की वापसी के साथ ही सभी किसानों व कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गांरटी का कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि देशव्यापी कृषि संकट से उबरने और किसान आत्महत्याओं को रोकने का एकमात्र रास्ता यही है कि उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिले, जिससे उनकी खरीदने की ताकत भी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था भी मंदी से उबरेगी। इस आंदोलन के दौरान किसान नेताओं ने मनरेगा, वनाधिकार कानून, विस्थापन और पुनर्वास, आदिवासियों के राज्य प्रायोजित दमन और 5वी अनुसूची और पेसा कानून जैसे मुद्दों को भी उठाया।
इधर राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, बालोद, दल्लीराजहरा में रैली में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा तथा किसानों का बैनर के अलावा सीटू युनियन के बैनर झण्डे के साथ महिला व पुरूष चल रहे थेे। रैली में भारत बंद सफल करो, तीनों कृषि कानून वापस लो, समर्थन मूल्य गारंटी कानून पास करो, श्रम कानूनों में किया गया संशोधन रद्द करो, शहीद शंकर गुहा नियोगी हत्याकांड की जांच करने की बात की। श्रमिक नेता भीमराव बागड़े, प्रेमनारायण वर्मा, सुदेश टीकम, गजेन्द्र झा ने बंद का समर्थन करते हुवे शंकर गुहा नियोगी हत्याकांड की जांच उच्च न्यायालय के न्यायधीश द्वारा कराये जाने, नियोगी की हत्या के आरोप में उद्योगपति मूलचंद शाह तथा चंद्रकात शाह सहित आरोपी पल्टन मल्लाह को फांसी तथा उद्योगपति मूलचंद शाह सहित 5 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दिये जाने, मजदूर किसानों के हक की कानूनी लड़ाई लडऩे वाली अधिवक्ता (मानव अधिकार कार्यकर्ता) सुधा भारद्वाज सहित अनेक अन्य कार्यकर्ताओं को महाराष्ट्र की पूणा पुलिस द्वारा फर्जी प्रकरण में जेल में डाला गया उन सभी कार्यकर्ताओं को रिहा करने की बात की।
मजदूर आंदोलन को दबाने तथा उद्योगपतियों को नाजायज लाभ पहुंचाने पुलिस द्वारा 136 झूठे प्रकरण बनाकर मजदूरों को जेल भेजकर प्रताड़ित किया गया। वे सभी प्रकरण विभिन्न न्यायालय द्वारा खारिज किया गया, उन सबंधित पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय जांच की जावें तथा संबंधित मजदूरों को प्रति श्रमिक 3 लाख रूपये मुआवजा शासन की ओर से दिया जाने, श्रम विभाग के श्रम निरीक्षको द्वारा कंपनियों में जाकर समय समय पर जांच की जा रही थी उसे शासन द्वारा बंद कराया गया जिससे श्रमिकों का शोषण करने उद्योगपति व ठेकेदारों को छूट मिल गई है।
पूर्व की तरह श्रम निरीक्षक द्वारा जांच कराने, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा न्यूनतम वेतन घोषित किया गया किन्तु 70 प्रतिशत श्रमिको को घोषित वेतन नहीं मिल रहा है इसलिये श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराई जावें तथा उल्लघंन होने पर कड़े दंड का प्रावधान करने, राजनांदगांव में कचरा संग्रहण केन्द्रों में कार्यरत स्वच्छता दीदी (श्रमिकों) के संलग्न आदेशानुसार वेतन वृद्धि किये जाने तथा भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा का लाभ दिलाये जाने तथा कबाड़ी की राशि डेढ़ करोड़ रूपये घोटाला करने वाले निगम अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने के साथ काले कृषक कानूनों को वापस लेने की बात प्रमुखता के साथ उठाई है।
सभा को किसान नेता सुदेश टीकम, छत्तीसगढ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भीमराव बागड़े, सीटू युनियन से का. गजेन्द्र झा, एल आई सी सेे प्रवीण मेश्राम, छ.मु.मो. उपाध्यक्ष ए.जी.कुरैशी कपड़ा मिल मजदुर संघ से प्रेमनारायण वर्मा, सर्व आदिवासी समाज से टीकम ठाकुर, गावड़े जी, अधिवक्ता शालिनी गेरा, आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया के जिलाध्यक्ष कन्हैयालाल खोब्रागढ़े, एसीसी जामुल भिलाई से धनजंय मिश्रा आदि वक्ताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि देश के अन्नदाता किसान पिछले 10 महीनों से दिल्ली के बार्डर पर धरना दे रहे है जिसमें 600 किसानों की शहादत हुई है के बावजूद मोदी सरकार हिटलर की तरह सत्ता के नशे में चूर है जो गुपचुप तरीके से तीनों कृषि कानून पास किये है, समर्थन मूल्य गारंटी कानून पास नहीं कर रहे है।
44 श्रम कानूनों को बदल कर मात्र 4 श्रम कोड बनाया गया, जिसमें करोड़ों मजदुरों को नुकसान होगा, 8 घंंटे डयुटी के कानून को बदल कर 12 घंंटे किया गया, रेल्वे, बैंक, बीमा सरकारी सम्पित्तियों को बेचा जा रहा है, नौकरियां खत्म कर बेरोजगारी बढ़ा रही है, मंहगायी चरम सीमा पर है, संविधान के साथ छेड़ छाड़ किया जा रहा है।
देश के नागरिकों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है, इसलिए मजदूर किसानों के अलावा बेरोजगार, नौजवानों को सड़क पर उतरना होगा, केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों को घेराबंदी करना होगा ताकि देश लुुटने से बचाया जा सकें।
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