चिकित्सकीय लापरवाही : कोई निकालता है गर्भाशय तो किसी की गलती से हुए दिव्यांग

पल्लवी मंडावी

 

इन सबके पीछे अधिक बिलिंग कर रकम लेना प्रमुख वजह है। यही वजह है कि इसके लिए महिलाओं की उम्र तक की परवाह नहीं की जाती। निजी अस्पतालों ने आरएसबीवाई योजना के तहत गरीबों को मिले स्मार्ट कार्ड के जरिए बिल की राशि निकाल ली थी।

2012 कैंसर का भय दिखाकर गर्भाशय निकालने की घटना 

इस फर्जीवाड़े में बिलासपुर शहर के कुछ नर्सिग होम भी सक्रिय रहे, जहां पिछले तीन सालों से बेवजह गर्भाशय निकालने के ऑपरेशन लगातार हो रहे थे । स्वास्थ विभाग की जांच में ये नर्सिग होम निशाने पर हैं। शासन द्वारा जांच के आदेश के बाद जिले में पड़ताल शुरू कर दी गई थी।

जब डॉक्टरों की लापरवाही ने 15 मरीजों की जिंदगी में किया अंधेरा

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बागबहरा में आंखों में रोशनी की चाहत लिए मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने गए 15 मरीजों की जिंदगी में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से अंधेरा फैल गया था नेत्र शिविर में पहुंचे लोगों की जल्दबाजी में हुई जांच के बाद उनका ऑपरेशन कर दिया गया। इससे मरीजों की आंखों में संक्रमण फैल गया, जिसकी वजह से बाद में नौ मरीजों की एक−एक आंख तक निकालनी पड़ गई। सभी प्रभावित मरीजों को अब रायपुर के एमजीएम नेत्र चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।

रायपुर में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 340 क्लीनिक सील

साल 2017 के मार्च महिने में कई ऐसे फर्जी डॉक्टर भी मिले जो बगैर डिग्री लिए मरीजों का इलाज किसी विशेषज्ञ की तरह कर रहे थे। उनके खिलाफ भी बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई जांच टीम ने जिले में संचालित होने वाले 396 क्लीनिक का निरिक्षण किया, जिसमें 340 क्लीनिक  में नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन पाया गया. इसके बाद उन अस्पतालोको सील कर दिया गया था। 

गलतियो की खामियाज़ा जिंदगी भर का 

Case 1 

एक गलत इंजेक्शन लगाने के बाद सही करने लगाया दूसरा, जिसके बाद  मासूम नहीं रहा चलने लायक 

21 जून 2018

सरायपाली. छत्तीसगढ़ के एक गांव में झोलाछाप डॉक्टर ने एक मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ कर दिया। डॉक्टर ने 3 साल के बच्चे को एक इंजेक्शन लगाया। जिसके बाद उसके पैरों ने काम करना बंद कर दिया। संतलाल पटेल ने झोलाछाप नंदकुमार पटेल के विरुद्ध कलक्टर महासमुंद, अनुविभागीय अधिकारी सरायपाली व खंड चिकित्सा अधिकारी बसना से लिखित में शिकायत करते हुए तथाकथित चिकित्सक पर कार्रवाई करते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की थी। 

Case 2 

नसबंदी के ऑपरेशन में गलत नस कटने से हुई थी महिला की मौत, मामले में एक साल बाद तीन के खिलाफ एफआईआर

जून 17, 2021  

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा के एक निजी अस्पताल में नसबंदी सर्जरी के दौरान आंत कटने से महिला की मौत का मामला सामने आया है। इस मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने तीन डॉक्टरों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है, जिसमें एक महिला डॉक्टर भी शामिल है। मामला बीते वर्ष 24 फरवरी 2020 का है, जहां नवागढ़ विकासखंड के ग्राम गनियारी की रहने वाली महिला सुनीता साहू नसबंदी के लिए बेमेतरा हेल्थ केयर में गई थी।

आरोप है कि नसबंदी करने के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही पूर्वक उसकी आंत में छेद कर दी, जिसकी उसकी हालत बिगड़ती गई। इसके बाद उन्हें रायपुर रिफर कर दिया गया, जहां उसकी मौत हो गई। मामले की शिकायत मृतक महिला के पति के द्वारा जिला प्रशासन से की गई, जिसके बाद से एसडीएम बेमेतरा और स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने बेमेतरा हेल्थ केयर पहुंचे थे। 

Case 3 

जिंदगी देने वाले डॉक्टर ने किया ऐसा ऑपरेशन कि युवक बन गया अपाहिज, लाखों रुपए देकर जेब हो गया खाली  

2019 

राजनांदगांव में सड़क दुर्घटना में घायल हुए 35 वर्षीय नंदई निवासी देवानंद सोनकर का एक निजी अस्पताल में गलत ढंग से इलाज करने का मामला सामने आया था। हादसे में युवक का बायां पैर व हाथ टूट गया था, जिसका मनकी स्थित जीवन रेखा अस्पताल में ऑपरेशन किया गया।

गलत ढंग से ऑपरेशन होने के कारण कुछ दिन बाद युवक के पैर का रॉड बाहर आ गया। हाथ का ऑपरेशन भी सही नहीं होने के कारण हड्डी जुड़ नहीं पाई और अंदर लगाए गए स्क्रू बाहर आ गए थे। 

Case 4

पेट का ऑपरेशन करते हुए डॉक्टर ने कर दी ऐसी गलती कि 8 साल के मासूम की चली गई जान

2019

अंबिकापुर में जिले के गांधीनगर क्षेत्र के ग्राम बलसेड़ी में गलत इलाज के कारण आठ साल के बच्चे की मौत हो गई। दरअसल बच्चे के पेट के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने बड़ी गलती कर दी, जिसका खामियाजा बच्चे को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। तक बच्चे का नाम आलोक कुमार था जिसे 4 सितंबर को पेट में दर्द होने पर उसके दादा घूरउ राम रायगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने ले गए थे. अस्पताल में कई तरह के जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी होने की बात कह कर तुरंत बच्चे का ऑपरेशन कर दिया। 

आपरेशन के दो घंटे बाद बच्चे को होश आने पर उसने पेट में तकलीफ होने की बात कही, जिसके बाद बच्चे के दादा घुरउ राम ने ऑपरेशन डॉक्टर को इसकी जानकारी दी।  लेकिन डॉक्टर ने उसकी एक न सुनी और तकलीफ होने पर दूसरे डॉक्टर को दिखाने की सलाह देकर छुट्टी पर चले गए।  ऑपरेशन के बाद बच्चे की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर 8 सितंबर को बच्चे को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया. भर्ती करने पर पता चला की ऑपरेशन गलत तरीके से हुआ है और गुरुवार को इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट में यह बात कहीं गई थी की चिकित्सा गलतियों से सालाना 2.6 मिलियन मौतें होती हैं

भारत में मृत्यु दर वर्तमान में प्रति हजार लोगों पर 7.3 है, जबकि जनसंख्या लगभग 133.92 करोड़ (लगभग) आंकी गई है। तो गणना के आधार पर भारत में हर साल 97 से 99 लाख लोगों की मौत हो जाती है। जिनमें से करीब 45 लाख मौतें 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की दर्ज की गई हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, अगर पीटीआई की रिपोर्ट पर विश्वास किया जाए, तो भारत में मरने वाले लगभग हर दूसरे व्यक्ति की मृत्यु चिकित्सा त्रुटियों के कारण हुई। 

क्यूं है झोलाझाप डॉक्टरों की पूछ परख?

अन्य सेवाओं की तरह चिकित्सा सेवाओं की स्थिति भी हमारे देश में बहुत अच्छी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो और भी बुरा हाल है। ग्रामीण जनता को अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए शहरों की तरफ भागना पड़ता है।

 कई बार तो उन्हें झोलाछाप डॉक्टरों की सेवाएं लेने को विवश होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उन्हें अनेकों बार अपनी मेहनत की कमाई गंवाने के साथ ही अपनी जान भी गंवानी पड़ती है। 

दूसरी तरफ, व्यावसायीकरण की अंधी दौड़ में शहरों सहित छोटे-छोटे कस्बों में भी प्राइवेट अस्पतालों एवं नर्सिंग होम खुलते जा रहे हैं। वहाँ सुविधाओं के नाम पर न तो प्रशिक्षित चिकित्सक होते हैं और न ही मरीजों की समुचित चिकित्सा के उपकरण। 

फिर भी वे विज्ञापनों के माध्यम से बड़े-बड़े दावे कर मरीजों को अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं और उनकी दुकानदारी चलती रहती है।  

क्या वाकई सक्षम है डॉक्टर्स?

हर साल 50,000 एमबीबीएस स्नातक उत्तीर्ण होते हैं

हमारे पास केवल 18,000 स्नातकोत्तर सीटें हैं, इसलिए हर साल ये एमबीबीएस स्नातक उन 18,000 सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और शेष लोग जूनियर रेजिडेंट के रूप में काम करते रहते हैं।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक और एडिनबर्ग के रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन के एक साथी एमसी मिश्रा ने कहा कि एसीसीसी विशेष रूप से उन अस्पतालों के लिए डिज़ाइन की गई एक पहल है जहां डॉक्टरों को गंभीर रोगियों को संभालने के बारे में देखभाल, व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। 

सालाना 5.2 मिलियन चिकित्सा त्रुटियां

हार्वर्ड के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में सालाना 5.2 मिलियन चिकित्सा त्रुटियां होती हैं। इसके प्रतिकूल प्रभाव क्या हैं और इनसे कैसे निपटा जाता है? विश्व स्तर पर, चिकित्सा त्रुटियां मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं जिनेवा स्थित संगठन के अनुसार, केवल गलत दवा के नुस्खे से संबंधित त्रुटियों में दुनिया भर में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की लागत लगभग $42 बिलियन (37 बिलियन यूरो) है। 

इतना ही नहीं, साल 2020 की शुरुआत ही आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत फर्जीवाड़ा  से हुई थी 

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत लाखों फ़र्ज़ी गोल्डन कार्ड बनाए गए थे अधिकतर मामले गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब के अस्पतालों में हुए. अकेले गुजरात सरकार ने 15 हज़ार फ़र्ज़ी कार्ड रद्द किए, पर अब भी पांच हज़ार कार्ड फ़र्ज़ी होने की आशंका थी।  

सिर्फ स्वास्थय सम्बंधित 15 से ज्यादा सरकारी योजनाएं हैजो आम जनता के लिए सरकार द्वारा बनायी गयी है रोजगार राज्य बीमा योजना से लेकर आयुष्मान भारत योजना तक शामिल है। 

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत फर्जीवाड़ा करने के आरोप में 171 अस्पतालों को पैनल से बाहर कर दिया गया था और नौ राज्यों के कई अस्पतालों पर 4.5 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाए गए थे रिपोर्ट के अनुसार ये भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब के अस्पतालों में हुए हैं. जिन अस्पतालों को योजना के दायरे से बाहर किया गया है, उनमें गुजरात का कोई अस्पताल नहीं है। 

आपको याद दिला दे की कुछ महीने पहले ही इसी साल 2021 में राशन कार्ड में भी फर्जीवाड़ा कर के  लाखो का राशन इधर से उधर कर दिया गया था जिसमे खुद आला अधिकारी लिप्त थे। यही नहीं राशन कार्ड की कॉपी बनाई गयी थी जिसके द्वारा बड़ी मात्रा में राशन गबन का मामला सामने आया था। 


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