पर्यावरण की चिंताओं में ही हसदेव अरण्य को बचा लीजिए
आलोक शुक्ला1700 वर्ग किलोमीटर का हसदेव अरण्य वन क्षेत्र एवं उसके अंदर 23 कोल ब्लॉक। इसमे से 6 कोल ब्लॉक MDO अनुबंध के माध्यम से अडानी कंपनी के पास हैं। जिसमे से परसा ईस्ट केंते बासेन में खनन हो रहा है । 2011 में इसकी स्वीकृति फ्रिंज कहकर दी गई थी जिसे वर्ष 2014 में NGT ने निरस्त कर दी । अभी सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर खनन हो रहा हैं।

अडानी अपनी 4 नए कोल ब्लॉक परसा, केंते एक्सटेंसन, पतुरिया एवं गिड़मूड़ी और बिरला समूह 1 कोल ब्लॉक मदनपुर साउथ में खनन की अनुमति चाह रहा है।
इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार ने इस पूरे कोल ब्लॉक क्षेत्र को लेमरु हाथी रिजर्व से बाहर कर दिया। 1900 वर्ग किलोमीटर में भी यह कोल ब्लॉक बाहर है।
वर्तमान में इस सभी 5 कोल ब्लॉक से हसदेव का 17 हजार एकड़ जंगल समाप्त हो जाएगा और यदि ये खुले तो मानकर मानकर चलिए बांगो का कैचमेंट बढ़े गड्ढे में तब्दील हो जाएगा जिससे लगभग 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचांई होती है।
वर्तमान में ICFRE ने सम्पूर्ण हसदेव अरण्य क्षेत्र की बायो डाइवर्सिटी का अध्यन्न किया है जिसमे उन्होंने लिखा कि यह सम्रद्ध वन क्षेत्र है। यहाँ की जैव विविधता बहुत ही सम्पन्न है। यह गेज, अटेम और चरनोई नदी जो हसदेव की सहायक है और स्वयं हसदेव का महत्वपूर्ण जलागम क्षेत्र है।
उसके बाद उन्होंने कहा इस पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र में यदि खनन होगा तो उसके प्रभाव अपरिवर्तनीय होने अर्थात उस नुकसान की कभी भरपाई नहीं कि जा सकती है।
रिपोर्ट में यह भी लिखा कि हाथी के कॉरिडोर का पता नहीं लेकिन यह खनन होगा तो मानव हाथी संघर्ष बढेगा।
यह सब लिखने के बाद ICFRE लिखता है कि चूंकि एक कोल ब्लॉक में खनन हो रहा है इसीलिए तीन अन्य में प्रतिबंधित शर्तों पर खनन हो सकता है।
स्पष्ट रूप से यह अनुशंसा अडानी कंपनी के दवाब में लिखी गई है ठीक उसी प्रकार से जैसे पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में कानून की इस तरह व्याख्या की बिना ग्रामसभा परामर्श के भूमि अधिग्रहण हो सकता है।
इन सब के बाबजूद इस सम्पूर्ण क्षेत्र के निवासियों के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूरी छत्तीसगढ़ कांग्रेस का राजनैतिक वादा भी है इस जंगल जमीन को बचाने और किसी भी व्यकि को विस्थापित नहीं होने देने का।
हसदेव कांग्रेस का टेस्ट है अडानी के मुनाफे और आदिवासियों के अस्तित्व का , जल- जंगल और पर्यावरण और वन्य प्राणी बचाने के बीच का। आने वाले दिनों में शीघ्र ही हसदेव के लोग राजधानी पहुचकर इन सवालों का जवाब भी मांगेंगे और वादे पर अमल भी पूछेंगे।
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