आदिवासियों ने किया छत्तीसगढ़ महाबंद को सफल
द कोरस टीमलगातार अपनी ज्वलंत मांगों को लेकर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कई आवेदन - निवेदन, आर्थिक नाकेबंदी के बाद आज बस्तर लगभग बंद रहा। कहीं आर्थिक नाकेबंदी रही तो कहीं जंगी प्रदर्शन किये गये। राज्य सरकार के द्वारा सर्व आदिवासी समाज के लोगों की मांगों को लगातार नजरअंदाज करते देख सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश नेतृत्व द्वारा महाबंद की घोषणा के बाद इसे सफल बनाने के लिए सर्व आदिवासी समाज के लोग बारिश के बावजूद सुबह से ही सडक़ पर उतार आये।

सर्व आदिवासी समाज ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 में नारायणपुर चौक के पास केशकाल, फरसगांव माकड़ी सहित सभी मुख्य मार्ग, वहीं डौंडीरलोहारा, बालोद, मानपुर चौक, दल्लीराजहरा, डौंडी, भानुप्रतापपुर, दुर्गकोंदल, बडग़ांव, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, कांकेर, रजेसेड़ा, चारामा में चक्काजाम और बंद मिलाजुला रहा। कोंडागांव में सुबह 10 से चक्का जाम किया गया।
चक्का जाम के चलते सडक़ में दोनों ओर वाहनों की कतारें लग रही। यात्री परेशान होते दिखे, बीमार व चिकित्सालय जाने वाले लोगों को ही चक्का जाम में छूट मिली। अप्रिय स्थिति से निपटने बड़ी तादाद में सुरक्षा बल जगह - जगह में तैनात दिखे। कई जिलों में युवा आदिवासियों के द्वारा बाइक रैली निकाली गई और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारे बाजी की गई।
कांकेर के पत्रकार तामेश्वर सिन्हा ने बताया कि धमतरी में 7 घंटे से ज्यादा पूरी तरह सडक़ जाम रहा। दुर्गकोंदल, भानुप्रतापुर, कोंडागांव बंद रहा। नारायणपुर में प्रदर्शन हुवे तथा दुकानें बंद रही। कांकेर जिला मुख्यालय माकड़ी, चारामा, मचांदूर, रजेसेड़ा, चारामा, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, सुदूर बस्तर में बीजापुर में दुकानें बंद रही तथा दल्लीराजहरा, डौंडी, डौंडीलोहारा, राजहरा, बालोद में सडक़ घेरकर जंगी प्रदर्शन किया गया।
सिन्हा ने यह भी बताया कि अपरिहार्य कारणों से राज्य का उत्तर का क्षेत्र तथा जगदलपुर, सुकमा, कोंटा बंद से मुक्त रहा। विरोध में चक्का जाम में शामिल होने जिले भर से आदिवासी समुदाय के लोग सुबह से ही जिला मुख्यालय में एकत्रित होने लगे। बंद किये गये जिलों में बंद का नजारा ऐसा था कि गलियां सुनी व नगर के तमाम व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, मुख्य मार्ग सहित गली मोहल्ले तक बंद का ऐसा नजारा लोग आने जाने में परेशान होते दिखे। आदिवासी समुदाय के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग सहित जिला मुख्यालय से जुडऩे वाली सभी चौक चौराहों पर पारंपरिक हथियारों से लैस वेशभूषा के साथ सज - धज कर महाबंद को सफल बनाने घंटों डटे रहे।
आदिवासी प्रमुख सोहन पोटाई ने कहा
सर्व आदिवासी समाज जिला के प्रदेश प्रमुख सोहन पोटाई ने दावा किया कि 19 जुलाई से 8 अगस्त तक आदिवासी अनिश्चितकालीन धरना पर रहे। 30 अगस्त को प्रदेश कमेटी के आह्वन पर आर्थिक नाकेबंदी की गई। पोटाई ने कहा कि सरकार अपने निवास में 80 आदिवासी आईएएस को खाना खिलाते हैं उस वक्त कोरोना का डर नहीं सताता है। जो आंदोलन कर रहे हैं उस पर कोरोना का डर दिखाकर आंदोलन को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने तल्खी के साथ कहा कि यह अभी ट्रेलर है पिक्चर बहुत जल्द आनेवाली है। जब अनिश्चित कालीन आर्थिक नाकेबंदी और बंद का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हमारी मांगों को विचार वह समाधान की पहल नहीं की है।
कोंडागांव से बंगाराम सोरी ने कहा कि अध्यक्ष सोहन पोटाई के नेतृत्व में आज सभी मांगों को लेकर महाबंद किए गये हैं। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होगी लड़ते रहेंगे। बस्तर संभाग, सरगुजा संभाग के साथ बस्तर के 85 संभाग पांचवी अनुसूची क्षेत्र में हंै उन्हें सरकार ने आज तक नजरअंदाज किया है वहां पर संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को लागू करने में सरकार नाकाम रही है। मुख्यमंत्री से मिलने 24 जुलाई को गए थे लेकिन वहां कोई सकारात्मक चर्चा नहीं हो पाई। सोमवार को 10 बजे से महाबंध की शुरुआत की है जिसका शाम को समापन होगा। हमारी मांगों को लेकर सरकार द्वारा विचार नहीं किया गया तो आगे और बड़ी कदम भी उठायेंगे।
चौकी मोहला मानपुर में नहीं रहा बंद
सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष सुरजू टेकाम ने कहा कि शासन प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने से बंद को आगामी 27 सितम्बर के भारत बंद के साथ रखा गया है। उन्होंने कहा कि 13 सूत्रीय मांगों को लेकर भारत बंद की तैयारी जोरों पर है। जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासियों के साथ किसान और मजदूर भी शामिल होंगे।
बडग़ांव में हुवे प्रदर्शन
बडग़ांव से विकास वैद्य ने बताया कि बारह सूत्रीय मांगों को लेकर सर्व आदिवासाी समाज के हजारों आदिवासियों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्य सडक़ पर सोमवार को सुबह से ही सडक़ों के बीचों - बीच बैठ कर आंदोलन करना शुरू कर दिया है। इसके पूर्व भी समाज ने अपनी मांगों को लेकर विरोध किया था। शासन प्रशासन के आश्वासन के बाद अपनी हड़ताल समाप्त किया था और मांगें पूरी न होने पर सरकार को कड़ी चेतवानी देते हुए उग्र आंदोलन की चेतवानी दी थी।
अंतत: मांग पूरी नहीं होने पर सरकार के खिलाफ नारजगी जाहिर करते हुए महाबंद की चेतावनी दी थी। जिसके बाद सोमवार को जगह जगह आंदोलकारियों ने रास्तों के बीचों बीच बरसते बारिश में अपनी मांगों को लेकर सडक़ पर डटे रहे सुबह से हर गांव से ग्रामीण एकजुट होने लगे धीरे धीरे दोपहर तक हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुवे।
इससे पूरी तरह बडग़ांव से कापसी, पखांजूर तथा बांदे तक का आवगमन बंद रहा। लेकिन जरूरी सेवाएं के साथ आपातकालीन चिकित्सा वाहनों को छूट देकर राहत भी पहुंचाया गया। वहीं सुरक्षा को लेकर पुलिस बल भी जगह - जगह तैनात रही। सर्व आदिवासी समाज ने मुख्य सडक़ गांधी चौक से रैली निकाल कर नारे लगाते हुवे कहा कि - ‘ना विधानसभा न लोकसभा सबसे ऊपर ग्रामसभा।’ अपनी मांगों को लेकर बडग़ांव गांधी चौक मुख्य मार्ग पर समाज के पदाधिकारियों ने राज्यपाल के नाम पर बडग़ांव नायब तहसीलदार को बारह सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
किन मांगों के सिलसिले में इतना बड़ा महाबंद
इनकी मुख्य मांगे इस प्रकार हैं। ग्राम सिलगेर में निर्दोष ग्रामीणों को गोली मारा गया है, मृतकों के परिवारों को 50 -50 लाख रुपये का मुआवजा साथ ही घायलों को 5 - 5 लाख रुपये सहित मृतक के परिजनों को शासकीय नौकरी देने की मांग की है। नई भर्ती पर आरक्षण लागू किया जाने। पांचवी छठवीं अनुसूची इलाके में शत - प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग रखी है। वहीं आदिवासियों के साथ अत्याचार बंद करने की मांग सभी जिलों ने प्रमुखता से उठाया। आदिवासियों के नाम से छल - कपट कर लिए गए जमीनों को वापस करने की मांग भी इस मांग पत्र में शामिल था। आदिवासी क्षेत्रों से सुंरक्षा बलों के कैंपो को भी हटाने की मांग इसमें शामिल है। बडग़ांव सहित कई इलाके को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग प्रमुखता से रखा गया है।
इस बीच समाज के पदाधिकारियों ने जनपद सदस्य सियाराम पुड़ो, जनपद सदस्य गजेंद्र उसेंडी ग्राम पंचायत बडग़ांव के सरपंच प्रतिनिधि मनोहर कुमेटी उपसरपंच करण अग्रवाल, मंडागाव सरपंच रामसाय पोटाई, सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष दुखु राम नरेटी सचिव दया उसेंडी नाहगिदा सरपंच प्रतिनिधि सालिक राम नेताम के अलावा पूरे प्रदेश में सर्व समाज के महिला तथा पुरूष इस महाबंद में शामिल रहे हैं।
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