दलित एक्टिविस्ट शिवकुमार को बचा लीजिए

मीना कोतवाल

 

नवदीप कौर का मामला अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी नहीं उठाती तो शायद ही कोई उनको भी जान पाता! जैसी चुप्पी शिवकुमार के मामले में है ठीक वैसी ही चु्प्पी नवदीप के मामले में भी दिखती और इसका कारण साफ है कि

दोनों उस समाज से आते हैं जो वंचित और शोषित हैं, जिन्हें समाज वॉयसलेस कहता है और अगर वो कुछ बोलना चाहते हैं तो उन्हें इसी तरह की सजा दी जाती है!

फिलहाल ख़बर यह है कि शिवकुमार के मेडिकल रिपोर्ट में हाथों और पैरों में फ्रैक्चर, टूटे हुए नाखून और पोस्ट ट्रॉमैटिक डिसऑर्डर

(किसी घटना के बाद लगने वाला गहरा सदमा)

जैसी बातें कही गई हैं. इतना ही नहीं दाएं और बाएं पैर मे चोट, लंगड़ा कर चलना, दाएं पैर में सूजन, बाएं पैर में सूजन, बाएं पैर के अंगूठे में कालापन, बाएं अंगूठे और तर्जनी में कालापन, कलाई में सूजन, बाएं जांघ पर कालापन जैसे बातें मेडिकल रिपोर्ट में कही गई हैं.

गौरतलब है कि ये चोटें 2 हफ्ते से ज्यादा पुरानी हैं. 

मेडिकल रिपोर्ट से साफ़ है कि दलित एक्टिविस्ट शिवकुमार को भयानक पुलिस यातनाएं दी गई हैं,

लेकिन आप सभी सो कॉल्ड लिबरल-प्रोग्रेसिव लोग मुबारक़ के काबिल हैं, क्योंकि बड़ी चालाकी से इस मामले पर फिर से आप लोगों ने चुप्पी साध ली है,

शायद इन्हें एक और रोहित वेमुला का इंतजार है जिसपर वे घड़ियाली आंसूं बहा सके!


नोट : दलित एक्टिविस्ट शिवकुमार बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता चौकीदार हैं जिनका वेतन 7,000 प्रति महीना है. शिवकुमार की एक आंख कक्षा 10 से ही खराब है. मां 23 साल से मानसिक तौर पर बीमार हैं. शिवकुमार के पास ना जमीन है और ना ही कोई सामाजिक संपत्ति.

 


Add Comment

Enter your full name
We'll never share your number with anyone else.
We'll never share your email with anyone else.
Write your comment

Your Comment