अब तो सिंहदेव की बताई गई रिपोर्ट को धूल खाती आलमारी से निकाल कर देख ले
द कोरस टीमछत्तीसगढ़ ने वाकई एक जनपक्षधर अर्थशास्त्री को खो दिया है यदि हमारी वर्तमान सरकार उनके व्दारा बनाई गई रिपोर्ट पर काम करता तो शायद बस्तर भयावह नक्सल हिंसा से मुक्त हो जाता और खुशहाल राज्य के रूप में केरल प्रदेश के बाद इसका स्थान होता।

जब इंदिरा गांधी 1980 में फिर से सत्ता में लौटी तो उन्हें बस्तर में नक्सल आन्दोलन की आशंका की खबर दी गई थी और इसके उन्मुलन के लिए रास्ता सुझाने कहा था।
इस सिलसिले में गांधी ने मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को दिल्ली बुलाया था, तब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश राज्य में शामिल था।
योजना आयोग के उपाध्यक्ष रामचन्द्र सिंह देव को भी लेकर अर्जुन सिंह दिल्ली पहुंचे थे।
रामचन्द्र सिंहदेव ने जो रास्ता बताया वह आज भी प्रासंगिक है उन्होंने कहा था कि हमें आदिवासी इलाकों को अलग नजरिए से देखना चाहिए वरना आदिवासियों में विद्रोह की भावना पुरानी है और नक्सली उसका गलत फायदा उठा सकते हैं।
गांधी ने इस पर सहमति जताते हुए कोई ठोस योजना बनाने को कहा।
सिंहदेव ने सुझाया कि , "बस्तर में अगले सौ साल तक "नो माइनिंग" और अगले सौ साल तक बस्तर में "नो हेवी इन्डस्ट्री "।
गांधी ने कहा कि ठीक है, आप इस पर कार्य करें।
इसके बाद प्रधानमन्त्री गांधी के निर्देश पर दिसम्बर 1984 "बस्तर डेवलपमेंट प्लान" बनकर तैयार हुआ, लेकिन उससे दो महीने पहले ही 31अक्टूबर 1984 को उनकी हत्या हो गई।
उनकी हत्या के बाद देश में तेजी से राजनैतिक बदलाव हुए और वह योजना तब से अधूरा पड़ा हुआ है औैर उसे अब दीमक ने अपना खुराक बनाना शूरू कर दिया है।
आप को बता दे कि मध्यप्रदेश व केन्द्र की किसी भी सरकार को लगभग 35 साल बाद उस रिपोर्ट को पढ़ने की फुर्सत नहीं मिली है।
हालात ये हैं कि नक्सल समस्या के समाधान और कथित विकास के नाम पर आदिवासियों को उनकी पुस्तैनी जमीनों से बेदखल करने और औद्योगिक घरानों के इशारों पर जल, जंगल और जमीन को सौंपने का खेल तब से अब तक लगातार बदस्तूर जारी है।
और कोई भी सरकार आदिवासियों के हितों के लिए नहीं बल्कि पूंजीपतियों के हितों के लिए ही चिंताग्रस्त नजर आती हैं।
वे ईमानदारी से नक्सल समस्या का कोई समाधान नहीं चाहते हैं |बदले में फ़र्जी मुठभेड़ दिखा कर हर दिन आदिवासियों की हत्या हो रही है।
सिंहदेव ने जो दो शर्तें तब गांधी को बताया था आज तक उन्हीं दो शर्तों का उल्लंघन हर राज्य व केन्द्र सरकारें करती आई हैं।
समाधान है लेकिन उस दिशा में हमारी योजना कार्य कर रही है इस तरह कह सकके हैं हमने निश्चित रूप से एक जन हितैषी अर्थशास्त्री के रूप में सिंहदेव को सदा-सदा के लिए खो दिया है।
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