प्रधान मंत्री की होने वाली रैली का बीएचयू के छात्रों ने किया विरोध
विशद कुमार, स्वतंत्र पत्रकारप्रधान मंत्री की आज होने वाली रैली का बीएचयू के छात्रों ने विरोध करते हुए वाइस चांसलर से मुलाकात कर इसे रुकवाने के मांग की है। छात्रों का कहना है जहां पूरा देश कोरोना के चपेट में है ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन रैली की अनुमति देकर छात्रों का जीवन संकट में क्यों डाल रहा है।

बीएचयू वाराणसी के कैंपस में प्रधानमंत्री की रैली है जिसमें लगभग 6000 लोग शामिल होंगे। इसका विरोध करते हुए भगतसिंह छात्र मोर्चा ने इस रैली को रद्द करवाने और विश्वविद्यालय खोलने को लेकर कुलपति को सौंपा ज्ञापन।
भगत सिंह छात्र मोर्चा और अन्य छात्र-छात्राओं ने आज 15 जुलाई को इस कोरोना महामारी के बीच प्रधानमंत्री की होने वाली रैली को रोकने और विश्वविद्यालय को पुनः खुलवाने की मांग की है।
विश्वविद्यालय पिछले डेढ़ साल से बंद है और सभी अकादमिक गतिविधियां बंद हैं। लेकिन बीएचयू और जिला प्रशासन द्वारा सभी कानूनों और नियमों को ताक पर रख कर विश्वविद्यालय के अंदर राजनीतिक रैली को करवाया जा रहा है।
छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय हम छात्रों का है, किसी पार्टी या कुलपति की जागीर नहीं है।
यही प्रशासन ने कोरोना का हवाला देकर सभी शिक्षण संस्थान को बंद कर दिया था, लेक़िन वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन किसी राजनेता या फिर किसी पार्टी की रैली करने के लिए क्यों अनुमति दे रहा है?
6000 की संख्या में बाहरी व्यक्तियों को कैंपस में महामारी फैलाने के लिए क्यों बुलाया जा रहा है, जबकि कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है। यह रैली कोरोना के नियमों का खुला उल्लघंन करती हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन इस तरह से छात्रों और कर्मचारियों का और बनारस शहर का जीवन संकट में क्यों डाल रहा है ।
भगतसिंह छात्र मोर्चा के सदस्यों ने वाइस चांसलर से मिलकर कहा कि इस रैली को तुरंत रद्द करवाया जाय और विश्वविद्यालय के कक्षाओं और हॉस्टल को पूरी क्षमता के साथ खोला जाय।
इस दौरान ज्ञापन देन वालो में सुमित, अंबुज, राहुल, शुभम, लोकेश, पवन, उमेश, शशांक, अविनाश, अमन, अविनव, अजीत, इप्शिता आदि उपस्थित रहीं।
मांग को लेकर छात्र जुलाई को धरना पर बैठे थे। धरना स्थल पर छात्रों को समझाने और ज्ञापन लेने छात्र-सलाहकार प्रो एम के सिंह और चीफ प्रॉक्टर आंनद चौधरी आए और कहा कि एक हफ्ते बाद ज्ञापन पर जवाब देंगे।
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