हसदेव अरण्य क्षेत्र के 17 हजार एकड़ जंगल की विनाश लीला शुरू

द कोरस टीम

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र के जिस मदनपुर गांव में राहुल गांधी ने वर्ष 2015 में चौपाल लगाकर आदिवासियों के जंगल जमीन की रक्षा करने का वादा करके आन्दोलन को समर्थन दिया था। भूपेश  सरकार ने उन्हीं आदिवासियों को उजाडऩे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पतुरिया गिदमुड़ी कोल ब्लाक के लिए कोल भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना। इस तरह 4 कोल ब्लाक के लिए  हसदेव अरण्य के 17  हजार एकड़ से अधिक जंगल जमीन के विनाश की प्रक्रिया तेजी से चल रही हैं। 

वर्ष 2013 में नया भूमि अधिग्रहण कानून आने के बाद किसी भी निजी कम्पनी या  राज्य सरकार के लिए कोल बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिये। इसी तरह के अधिग्रहण पर छत्तीसगढ़ सरकार ने जनवरी 2021 में कोयला मंत्रालय  में आपति भी दर्ज की थी वाबजूद  इसके स्वयं यह गैर क़ानूनी अधिग्रहण करवा रही है। 

दरअसल छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार दोनों ही पांचवी अनुसूचित क्षेत्र की ग्रामसभाओं की सहमति के बिना पेसा कानून का उल्लंघन कर सीबीए 1957 से जंगल जमीन का गैरकानूनी अधिग्रहण कर रही हैं। जबकि राहुल गांधी ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और एफआरए को हर मंच पर उपलब्धि के रूप में गिनाते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के प्रमुख आलोक शुक्ला कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में 1700 वर्ग किमी में स्थित हसदेव अरण्य क्षेत्र के समृद्ध जंगल आज खतरे मे हैं। अडानी कंपनी की लूट के लिए आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को नजरअंदाज करके, पर्यावरण विनाश की चिंताओं से परे हो गये हैं। कोल ब्लॉक हेतु 17 हजार एकड़ घने जंगल में खनन की प्रक्रिया पर राज्य सरकार की सहमति बन गई है। 

उन्होंने कहा कि आरटीआई में मेरे दस्तावेज़ों के हवाले से कहा गया था कि एमडीओ के आधार पर कोल आवंटन चोरी थी और उसके दस्तावेज़ छुपाना सीनाजोरी। तब विपक्ष में थे। अब मुख्यमंत्री हैं लेकिन चोरी और सीनाजोरी का सिलसिला जारी है।


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