वैक्सीन एंटीबॉडी बनाती हैं, जो वायरस को कोई दूसरा रास्ता खोजने या मरने पर विवश करती हैं

गिरीश मालवीय

 

अगर हम समय रहते डॉक्टर गुर्ट वांडन बुशा जैसे वायरोलाजिस्ट की बातों को सुन लेते तो हम भारतवासी कोरोना की दूसरी लहर में आयी भीषण तबाही से बच जाते और हमे लाखो मौतो भी नही देखनी पड़ती.

आज बिल्कुल साफ हो गया कि अनियोजित टीकाकरण से कोरोना वायरस के म्युटेशन को उत्परिवर्तित स्वरूपों यानी नए स्ट्रेन को बढ़ावा मिल रहा है. और अंधाधुंध और अधूरा टीकाकरण भी नए स्ट्रेन को ट्रिगर कर सकता है.

यह स्टडी आज इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपिडमोलॉजिस्ट्स और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के विशेषज्ञों ने प्रकाशित की है इसमे एम्स के डॉक्टर जो कोविड 19 संबंधी राष्ट्रीय वर्कफोर्स के सदस्य भी शामिल हैं.

अब बताइए Dr Geert Vanden Bossche ने क्या गलत कहा था? जिन्होंने 6 मार्च 2021 को ही यह बता दिया था कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जिस तरह से मास वैक्सीनेशिन अभियान चलाया है वो एक तरह का ब्लंडर साबित होने जा रहा है.

उन्होंने ठीक यही बात की थी जो आज भारत के तमाम बड़े महामारी वैज्ञानिक मान रहे हैं उन्होंने कहा था कि 'बड़े पैमाने पर टीकाकरण से, वायरस तेजी से उत्परिवर्तन की रणनीति को अपनाएगा और युवा आबादी में प्रसार को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा था कि “these immune escapes could cause an infectious wave '' unstopable '' and cause the death of an important part of humanity.

यही बात पिछले महीने नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने कही थी जिसके बारे में हमारे फेसबुक के बड़े वैज्ञानिकों की राय थी कि 'बुड्ढा सठिया गया है, पागल हो गया है'.

ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने भी एग्जेक्टली यही बात की थी उन्होंने टीकाकरण को ही नए वेरिएंट के उत्पन्न होने के पीछे का कारण बताया था. उनके वीडियो को दुबारा से देखिए वे कह रहे हैं कि, ‘ये टीकाकरण ही है, जिसके कारण वेरिएंट उत्पन्न हो रहे हैं,मॉन्टैग्नियर से सवाल पूछा जाता है कि टीकाकरण शुरू होने से बाद से जनवरी से नए मामले और मौत के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं, खासतौर पर युवाओं में.

तो इसपर आप क्या कहते हैं? इसके जवाब में मॉन्टैग्नियर ने कहा,चीनी वायरस के लिए एंटीबॉडी हैं, जो वैक्सीन से आती हैं. तो वायरस क्या करता है? क्या वो मर जाता है? या कोई और रास्ता ढूंढता है? ‘तब नए तरह के वेरिएंट उत्पन्न होते हैं और ये टीकाकरण का परिणाम है...वैक्सीन एंटीबॉडी बनाती हैं, जो वायरस को कोई दूसरा रास्ता खोजने या मरने पर विवश करती हैं और इसी के चलते नए वैरिएंट उत्पन्न होते हैं.

लेकिन उनकी बातों पर लोगो का ध्यान नही जाए इसलिए एक पूरी तरह से झूठी खबर उनके संदर्भ में फैलाई गयी कि ल्यूक मॉन्टैग्नियर तो कह रहे हैं कि 'जिसने टीका लगाया है वो दो साल के भीतर मर जाएगा', यह बिल्कुल झूठ था ल्यूक ने ऐसा कहा ही नही दरअसल इस झूठ को जानबूझकर जनता के सामने रखा गया ताकि उन्होंने जो सही बात की है उसे भी पूरी तरह से गलत साबित किया जा सके...लेकिन आप सच्चाई को कब तक छुपाओगे...कभी न कभी तो।आपको इसे स्वीकार करना ही पड़ेगा

बीच मे कोलकाता के वायरोलॉजिस्ट ने भी इस विषय मे चेताया था जिसके बारे में मैंने 10 मई को पोस्ट लिखी थी...अंधाधुंध और अधूरा टीकाकरण नए स्ट्रेन को ट्रिगर कर रहा है...

लेकिन मुझे यकीन है कि अब भी सरकार नही मानेगी ल्यूक ने सही कहा था टीकाकरण ही नए वेरिएंट उत्पन्न कर रहा है.

यह एक ऐसी वैज्ञानिक, मेडिकल गलती है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता इसे इतिहास में ही दिखाया जा सकता है.


Add Comment

Enter your full name
We'll never share your number with anyone else.
We'll never share your email with anyone else.
Write your comment

Your Comment