देश मे किये गए ड्रेकोनियन लॉक डाउन पर सवाल

गिरीश मालवीय

 

पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि बहुत से लोग जिनमे फ़ॉलोअर्स ओर करीबी मित्र भी शामिल है वो मुझसे पूछ रहे हैं कि आपको अपनी कोरोना वायरस की तथाकथित 'कांस्पिरेसी थ्योरी' वाली पोस्ट पर क्या कहना है इसलिए आज मैं विस्तृत रूप से जवाब दे ही देता हूँ...

इस पोस्ट के अंत मे मैंने जो भी गलत किया है वो मैंने स्वीकार किया है इसलिए अंत तक पूरा पढ़िएगा...

तीर्थंकर महावीर ने कहा है

सोचो : शंका करो क्योंकि सत्य के अनेक कोण होते हैं.

प्रश्न करो. उसके बाद सत्य को पहचानो.

जरूरी नहीं कि वही शाश्वत सत्य है, जो कभी किसी ने लिख दिया था. मगर साथ ही हर बात में ‘शायद’ का ध्यान अवश्य रखना...यही 'स्यादवाद एवं अनेकांत' का सिद्धांत है जो विश्व को महावीर की अद्भुत देन हैं. महावीर विचार वैभिन्न्य से सहमति जताते हैं.

मैने कोरोना पर प्रश्न जरूर उठाए है लेकिन जो भी प्रश्न उठाए हैं उनका बकायदा कमेन्ट बॉक्स में संदर्भ दिया है, लिंक दिया है...

दरअसल दिक्कत हमारी हिंदी पट्टी की है....'एक बीमारी आई, जिसे महामारी कहा गया और हम पर कथित “विशेषज्ञता” और “वैज्ञानिक-तथ्यों” की बमबारी की जाने लगी। हम घबराकर घरों में दुबक गए, लेकिन क्या हमें इस बम-बारी के स्रोत और उद्देश्यों की ओर नहीं देखना चाहिए था?'

मेरी यही गलती है कि मैंने अपनी कोरोना वायरस से संबंधित पोस्ट में न सिर्फ सरकार की अव्यवस्था को निशाने पर लिया बल्कि मैंने वृहद रूप में बीमारी के पीछे छिपे बहुत से तथ्यों चाहे वह राजनीतिक हो आर्थिक हो या सामाजिक हो उन सबकी विस्तृत रूप से पड़ताल करने की कोशिश की !...

लेकिन दुख इस बात का है कि अब मेरे खिलाफ फेसबुक पर एक कुत्सित अभियान चलाया जा रहा है जिसमे बड़े बड़े सेलेब्रिटीज़ भी शामिल है...वे लोगो को कह रहे हैं कि मैं षणयंत्रशास्त्री हूँ, मेरी पोस्ट पढ़ने से लोग मर रहे हैं.

मैंने कोरोना के इर्दगिर्द चल रहे वैश्विक गोरखधंधे से लोगो को आगाह किया उसका आज यह सिला मिल रहा है कि सूली पर टाँग दिये जाने की बात हो रही है... डिजिटल लिंचिंग की जा रही है...उस पर फेसबुक ट्रायल चलाया जा रहा हैं...इसलिए मेरा जवाब भी अच्छी तरह से पढ़ा जाना चाहिए.

कल रात से अभी तक मैंने सन 2020 की पूरी टाइम लाइन खंगाली है, ओर मैंने पाया है कि एक भी पोस्ट में यह नही कहा गया कि मास्क मत लगाओ ! कोरोना बीमारी नही है !

न ही मैंने किसी पोस्ट में यह कहा कि ये तो 5G का ट्रायल चल रहा है मैंने तो किसी पोस्ट में यह भी नही कहा कि यह वायरस प्राकृतिक नही है, बायो वेपन है.

मैंने किसी पोस्ट में विश्वरूप चौधरी टाइप के लोगो की बात का कोई समर्थन नही किया, जिन्होंने एक डॉक्टर होने के नाते अपने दावे सामने रखे, मैंने कोरोना के आर्थिक सामाजिक राजनीतिक पहलुओं पर अपनी बात रखी है.

दिक्कत यह होती है जो कमेन्ट बॉक्स में आकर लोग एक वाक्य में विश्लेषण कर देते हैं उसे मेरा वर्जन समझ लिया जाता है.

कोरोना वायरस पर मैंने अपनी पहली पोस्ट 29 जनवरी 2020 को लिखी थी 'कोरोना वायरस वाला मामला अब सीरियस रूप अख्तियार करता जा रहा है...

19 अप्रेल 2020 तक आप मेरी टाइमलाइन चेक कर लीजिए कोरोना के बारे मेरे जो विचार है उसे पढ़कर लोग बोलते थे आप हमें डरा रहे हो...आप हमें बेवजह भयभीत कर रहे हो. लेकिन फर्स्ट लॉक डाउन के दौरान मैंने कुछ ऐसी चीजें जानी जो हिंदी मीडिया तो छोड़िए विदेशी मीडिया में भी बड़े ढके छुपे ढंग से आ रही थी. बहुत सी ऐसी बाते थी जिसके बारे में हिंदी मीडिया में कोई बात भी नही कर रहा था तब मैंने फैसला किया कि सिक्के के दूसरे पहलू के बारे में भी लिखा जाना चाहिए.

मैंने इस बारे में जो पहली पोस्ट 19 अप्रेल 2020 को लिखी उसकी शुरुआत में लिखा कि  'कोरोना वायरस क्या एक बहुत बड़ी साजिश है? कांस्पिरेसी थ्योरी चित्ताकर्षक जरूर लगती है लेकिन जितना यह कहना आसान है इसे प्रूव करना उतना ही मुश्किल है. वैसे भी अब कोरोना विश्व इतिहास दशा और दिशा तय करेगा जैसा कि इसका विश्वव्यापी फैलाव दिख रहा है यह वायरस निकट भविष्य में हमारे सामाजिक व्यहवार को पूरी तरह बदल कर रख देगा करोड़ो लोगो का रोजगार जिन उद्योग धंधों से जुड़ा है वह लंबे समय के लिए संकटग्रस्त नजर आ रहे हैं. इसलिए यह प्रश्न बहुत बड़ा है! असली सवाल यह खड़ा होता है कि इस विश्वव्यापी महामारी का असली फायदा किसे मिलेगा?भारतीय दर्शन का एक सिध्दांत है कि धुंआ उठ रहा है तो कही न कही आग भी लगी ही होगी.

मैंने इस पोस्ट में ओर तथाकथित कांस्पिरेसी थ्योरी कही जाने वाली तमाम पोस्ट में यही खोजने की कोशिश की है कि धुआं तो सबको दिख रहा है आग कहा लगी है? ये आग खुद लगी है कि लगाई गई है ? इस आग का फायदा किसको हो रहा है? आने वाले भविष्य में इस आग से क्या बदलाव आएंगे? आफ्टर कोरोना समाज कैसे परिवर्तित होगा.

फिर मैंने उस एक एक आदमी/ संस्था को टटोलने की कोशिश की जो इस आग के बेहद करीब देखे जा रहे थे जैसे WHO, चाइना ओर बिल गेट्स.

बिल गेट्स के बारे में इटली की संसद में जहाँ सैकड़ों सांसद बैठे हुए थे वहाँ सांसद सारा कुनियाल अपने भाषण में भारत का नाम लेकर के कहती है कि बिल गेट्स भारत मे पोलियो वेक्सिनाइजेशन के नाम पर 5 लाख बच्चों को लकवाग्रस्त कर दिया'.

क्या भारत मे इस बात पर चर्चा हुई?

मैंने बिग मनी, बिग फार्मा और बिग करप्शन पर खूब कलम चलाई, मैने भारत मे अब तक हुए टीकाकरण में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की भूमिका की बात की.'दो बूंद जिंदगी की' अभियान का दूसरा पहलू दिखाया, आपको OPV यानी ओरल पोलियो वैक्सीन ओर HPV वैक्सीन के बारे आपको बताया.

मैंने यह बताने की कोशिश की कि किस प्रकार भारत की मोदी सरकार बिल गेट्स ओर उनके अमेरिकी सहयोगियों के ही इशारे पे चल रही है. नोटबन्दी पर भी एक अलग कोण से प्रकाश डाला. तब यह भी आपको बताया कि कोरोना वायरस किस तरह से भारत में अमेरिका के बिग कारपोरेट के लिए रास्ते खोल रहा है ये बाते 6 महीने में सच हो गयी.

मैंने WHO की तमाम गलतियां पर पोस्ट लिखी. यह भी बताया कि बिल गेट्स ही आज दुनिया के किसी बड़े से बड़े देश से ज्यादा WHO की फंडिंग करता है यह फैक्ट कोई नही झुठला सकता....यह भी बताया कि WHO के चीफ ट्रेडोस के कैसे पुराने संबंध बिल गेट्स से रहे हैं, उसकी भूमिका भी संदेहास्पद है.

मैंने RT PCR ओर कोरोना की टेस्टिंग की। प्रणालियों पर पोस्ट लिखी यह भी बताया कि एंटीजन टेस्ट ही भविष्य है कोरोना का.

ICMR की गाइडलाइंस पर सवाल उठाए ओर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि दरअसल पूरे देश मे दूसरी गंभीर बीमारियों से हुई मौतों को कोरोना के खाते में दर्ज किया जा रहा है, सरकार डेटा का मैन्युपुलेशन कर रही है, ओर भारत की सरकार नही बल्कि दुनिया भर की सरकारे.

मैंने देश मे किये गए ड्रेकोनियन लॉक डाउन पर सवाल उठाए ओर बड़े बड़े महामारी विशेषज्ञों का हवाला दिया.

15 अगस्त 2020 को PM द्वारा लॉन्च किये गए डिजिटल स्वास्थ्य मिशन ओर हैल्थ कार्ड की आप लोगो को पूर्व में सूचना दी. यह भी बताया कि कैसे यह मिशन WHO की डिजिटल हैल्थ गाइड लाइन के अनुरूप ही किया जा रहा.

रेमदेसीवीर के बारे में मैंने 29 अप्रेल 2020 को पहली पोस्ट लिखी और 5 मई 2020 को मैंने यह भी लिखा कि अगले साल तक देश का हर डॉक्टर कोरोना के लिये रेमेडिसवीर प्रिस्क्रिप्शन में लिखेगा जो आज सच हो रहा है.

ग्लोबल इकनॉमी पर कोरोना काल के प्रभाव का विश्लेषण करते हुए मैंने इस बारे में आपका ध्यान आकृष्ट किया कि कोरोना काल मे जहा पुरे विश्व की अर्थव्यवस्था गोते खा रही है वहाँ दुनिया की टेक कम्पनियो गूगल, एप्पल, फेसबुक और अमेजन के मालिकों की सम्पत्ति में बेतहाशा इजाफा हो रहा है इनके शेयर नित नई ऊंचाईयों को छू रहे हैं.

यह भी सबसे पहले बताया कि मोदी सरकार जब लोगो को कोरोना वैक्सीन लगाएगी तो उन्हें क्यूआर कोड के रूप में सर्टिफिकेट भी जारी करेगी.

अब मैं बताता हूँ कि मेरी गलती क्या थी!

मेरी गलती यह थी कि मैंने इन तथ्यों को ढूंढने में दिन रात लगा दिए, देशी विदेशी अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच हजारों वेबसाइट खँगाल मारी. मैंने सिक्के का दूसरा पहलू सामने लाने की कोशिश की आपको वो पक्ष दिखाया जो भारत के मेन स्ट्रीम मीडिया में नहीं पाया लेकिन फ्रेंच, स्पेनिश, इटेलियन, रशियन मीडिया में खूब आया. इनसे प्राप्त तथ्यों को क्लिष्ट ओर दुरूह भाषा मे परोसने के बजाए सहज सरल भाषा मे आप लोगो के सामने रखने का प्रयास किया, ओर वो भी बिल्कुल मुफ्त में.

यही मेरी सबसे बड़ी गलती रही हैं आज आप सबके सामने मैं इसे स्वीकार करता हूँ.


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