1 अप्रेल होगा डॉ. अम्बेडकर को समर्पित


 

ग्वालियर/प्राय: लोग इस दिन को मूर्ख दिवस के रूप में जानते हैं, जबकि भारत के लिए यह दिन एक ऐतिहासिक दिन है।

विशेषकर, भारतीय परिप्रेक्ष्य में बहुत कम लोगों को ही यह ज्ञात होगा कि भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना डॉ. आम्बेडकर की रचना ‘रुपये की समस्या-उसका उद्भव और प्रभाव’ और ‘भारतीय चलन व बैकिंग का इतिहास’ और ‘हिल्टन यंग कमीशन के समक्ष उनकी साक्ष्य’ के आधार पर 1935 में हुई।

भारत रत्न डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने अपने जीवन  में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, औद्योगिक, संवैधानिक आदि क्षेत्रों में अनगिनत कार्य करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

उन्होंने कई ऐसे काम किए, जिन्हें आज भी भारत याद रखता है, लेकिन उनके योगदान को हम उनके जन्म दिवस पर याद करते हैं।

हमको चाहिए कि उनके विभिन्न प्रकार के योगदान पर  संवाद किया जाये इसलिए गोपाल किरण समाजसेवी संस्था (जीकेएसएस) ने इस दिवस को डॉ. आम्बेडकर दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।

हमारे देश की अर्थव्यवस्था की नींव रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया है उसमें बाबा साहेब कीभूमिका को स्पष्ट तरीके से अवगत कराने के लिए यह कार्यक्रम हो रहा है, जिससे कि राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सही रूप से लोगों तक पहुंचाया जा सके। 

संस्था की सचिव जहाआरा, पुरुषोत्तम अर्गल, गोपाल सिंह जोहरी के अनुसार इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य ध्येय आने वाली पीढ़ी अर्थात बच्चों को डॉ. आम्बेडकर के योगदान की सही जानकारी देना है । 

कोरोना के दिनों दिन बढ़ते प्रकोप के चलते कार्यक्रम में शामिल होने वाले सहभागियों से अनुरोध किया है कि सभी मास्क पहनकर और सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए ही कार्यक्रम में शामिल हों ।


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