90 साल के बुजुर्ग ने क्यों लिखी आदिवासियों के हित में पाती?
मामला 53 एकड़ कथित फुड पार्क के आदिवासीकरण का...
सुशान्त कुमार90 वर्षीय कन्हैयालाल खोब्रागढ़े जो बुद्धिष्ट कल्चरल एंड वेल्फेयर सोसायटी के अपने आप को प्रांतीय अध्यक्ष कहते हैं दक्षिण कोसल को बताया कि राजनांदगांव जिले के विकासखंड छुरिया की ग्राम पंचायत पांगरी खुर्द की 53 एकड़ भूमि पर निर्माणाधीन ‘फुड पार्क’ का नाम महान देशभक्त धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम करने मुख्यमंत्री को दोबरा पत्र लिखा है।
वर्तमान में जेनजी आंदोलन हो या फिर बाराबंकी में स्वराज पार्टी के प्रशांत किशोर के जीत कर आने का सबके पीछे बुजुर्गों के शांतिपूर्ण सत्याग्रह आंदोलन और दमदारी के साथ अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए मेमोरेंडम पत्र लिखने का अहम योगदान रहा है। यह अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इससे पूर्व एक 90 वर्षीय बुजुर्ग ने अपने गांव में बने ‘फुडपार्क’ के नामकरण धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम करने की मांगपत्र शासन प्रशासन के साथ मुख्यमंत्री से पहले ही कर चुके हैं।
उनकी मंशा क्या हैं?
90 वर्षीय कन्हैयालाल खोब्रागढ़े जो बुद्धिष्ट कल्चरल एंड वेल्फेयर सोसायटी के अपने आप को प्रांतीय अध्यक्ष कहते हैं दक्षिण कोसल को बताया कि राजनांदगांव जिले के विकासखंड छुरिया की ग्राम पंचायत पांगरी खुर्द की 53 एकड़ भूमि पर निर्माणाधीन ‘फुड पार्क’ का नाम महान देशभक्त धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम करने मुख्यमंत्री को दोबरा पत्र लिखा है।
उन्होंने बताया कि फुड पार्क का क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं और महत्व की बात यह है कि यह वर्ष महान देशभक्त धरती आबा बिरसा मुंडा का शताब्दी वर्ष होने के साथ ही 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। उन्होंने इस अवसर पर एक चार सूत्रीय मांगपत्र प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा है।
क्यों पढऩा समझना चाहिए इस मांग पत्र को
मांगपत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि-
1. फुड पार्क के 53 एकड़ परिसर में धरती आबा बिरसा मुंडा की विशाल प्रतिमा शासकीय व्यय से उचित स्थान पर स्थापित किया जायें।
2. इस परिसर में 10 दुकानें बनाई गई हैं। इन दुकानों को गरीब आदिवासी अनुसूचित जाति के युवाओं को व्यवसाय करने हेतु दिया जायें। इस परिसर के प्रवेश द्वार पर धरती आबा के नाम पर विशाल द्वार बनाया जायें।
3. इस 53 एकड़ क्षेत्रफल परिसर में 3 एकड़ भूमि आदिवासी सम्मान मेला हेतु सुरक्षित/आरक्षित किया।
कन्हैयालाल खोब्रागढ़े ने कहा है कि उनकी यह प्रार्थना जनभावनाओं का सम्मान के आधार पर लिखा गया हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि भविष्य में आदिवासियों के हित में छत्तीसगढ़ में आदिवासी विश्वविद्यालय और शोध संस्थान के निर्माण के लिए भी उचित कदम उठाएं जाने की हैं।

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