अधिवक्ताओं के चुनाव में ‘यमन देवांगन’ की दावेदारी से हलचल

रोमांचक रहेगा अधिवक्ता अध्यक्ष पद का मुकाबला

सुशान्त कुमार

 

पूर्व में यह चुनाव 14 जुलाई को होनी तय थी अब नए फैसले के तहत यह चुनाव 29 जुलाई को सम्पन्न होगी। उनके चुनावी मैदान में उतरते ही संघ का पूरा समीकरण बेहद दिलचस्प और चतुष्कोणीय मुकाबले में बदल चुका है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं से लेकर कनिष्ट (जूनियर) के बीच उन्हें जैसा अभूतपूर्व और स्वत:स्फूर्त समर्थन मिल रहा है, उसने विरोधियों के खेमे में हलचल पैदा कर दी है।

रोमांचक रहेगा अध्यक्ष पद का मुकाबला

इस बार जिला अधिवक्ता संघ राजनांदगांव का यह चुनाव बेहद चर्चा में हैं। हर 2 वर्ष में होने वाले अधिवक्ताओं की इस चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। अध्यक्ष पद को संभालने के लिए मैदान में चार प्रमुख चेहरे आमने-सामने हैं- यमन देवांगन के साथ- 
नारायण कन्नौजे,
अरुण अनोखे,
आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव मैदान में हैं। 

मैदान में इतने अनुभवी और वरिष्ठ प्रत्याशियों की मौजूदगी के बावजूद, यमन देवांगन ने अपने व्यवहार, सक्रियता और वकीलों के प्रति अपनी व्यवहारकुशलता के दम पर बहुत ही कम समय में एकतरफा बढ़त बना ली है। कचहरी के चौक-चौराहों पर वकीलों के बीच चल रही चर्चाओं की मानें तो इस बार का चुनाव बदलाव और न्यायोचित अधिकारों का चुनाव होने जा रहा है।

जाने कौन हैं यमन देवांगन?

यमन देवांगन कई दशकों से जिला न्यायालय राजनांदगांव के एक अत्यंत प्रतिष्ठित, मिलनसार और संवेदनशील अधिवक्ता हैं। वे केवल कानून की धाराओं और बारीकियों को समझने वाले वकील नहीं हैं, बल्कि न्यायालय परिसर में हर वर्ग, विशेषकर पीडि़त और शोषितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले एक संघर्षशील व्यक्तित्व हैं। पिछले कई वर्षों से वे वकीलों की बुनियादी समस्याओं, अदालती कामकाज में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों और जूनियर अधिवक्ताओं के एक सच्चे मार्गदर्शक के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उनकी सबसे बड़ी खूबी उनका सहज, सरल और हमेशा सुलभ रहने वाला स्वभाव है। परिसर में किसी भी अधिवक्ता को आधी रात को भी कोई समस्या हो, यमन देवांगन बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या हिचकिचाहट के सबसे पहले मदद के लिए आगे आते हैं। यही कारण है कि आज राजनांदगांव न्यायालय में उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। 

क्या हैं चुनावी घोषणापत्र

2 वर्षों के कार्यकाल के लिए यमन देवांगन ने संकल्प लिया हैं कि अधिवक्ता संघ के चुनाव में केवल खोखले वादे नहीं, बल्कि ठोस इरादे और एक स्पष्ट विजन रहेगा। आगामी 2 वर्षों के इस महत्वपूर्ण कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वकीलों/अधिवक्ताओं की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनके मान-सम्मान और कोर्ट परिसर के आधुनिकीकरण के लिए एक बेहद व्यावहारिक और मजबूत कार्ययोजना तैयार की है। 

1. जूनियर वकीलों के लिए स्टाइपेंड और मेंटरशिप प्रोग्राम- नए और जूनियर अधिवक्ताओं को वकालत के शुरुआती दिनों में भारी आर्थिक और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यमन देवांगन का संकल्प है कि संघ के माध्यम से इन जूनियर के लिए एक निश्चित स्टाइपेंड (भत्ता) की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, वरिष्ठ वकीलों की देखरेख में एक बेहतरीन मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू किया जाएगा ताकि वे वकालत के गुर सीख सकें।

2. अधिवक्ता कल्याण कोष (विधिक सहायता फंड) का विस्तार व पारदर्शिता- किसी भी अधिवक्ता को उनके परिवार पर आने वाली बीमारी, दुर्घटना या आकस्मिक विपत्ति के समय संघ पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा रहेगा। इसके लिए अधिवक्ता कल्याण कोष को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा और सहायता राशि बिना किसी लालफीताशाही के पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे जरूरतमंद वकीलों अधिवक्ताओं तक तुरंत पहुंचाई जाएगी।

3. महिला अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित व आधुनिक सुविधाएं- राजनांदगांव न्यायालय में महिला अधिवक्ताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके लिए सर्वसुविधायुक्त महिला कॉमन रूम, आधुनिक व स्वच्छ शौचालय और छोटे बच्चों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त शिशु क्रीड़ा गृह (क्रेश) की व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

4. सुरक्षा व्यवस्था और सम्मान की रक्षा- न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। असामाजिक तत्वों पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे। साथ ही, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ एक मजबूत समन्वय समिति बनाई जाएगी ताकि फील्ड पर या कोर्ट में किसी भी अधिवक्ता के मान-सम्मान पर आंच न आने पाए।

5. वरिष्ठों का जनसमर्थन- जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, यमन देवांगन का चुनाव प्रचार जनसैलाब में बदलता जा रहा है। कोर्ट परिसर में आयोजित सघन जनसंपर्क के दौरान वरिष्ट अधिवक्ताओं ने उनके सिर पर हाथ रखकर जीत का अग्रिम आशीर्वाद दिया है। वरिष्टों का स्पष्ट कहना है कि यमन देवांगन में हमारी गौरवशाली परंपराओं का सम्मान करने का संस्कार भी हैं और बदलते हुए आधुनिक दौर की चुनौतियों से आंख मिलाकर लडऩे का विजन भी।

वहीं दूसरी ओर राजनांदगांव के युवाओं और जूनियर अधिवक्ताओं की पूरी टीम उनके चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथों में थामे हुए है। सुबह से लेकर शाम तक युवा वकील कचहरी के कोने-कोने में यमन देवांगन के विजन को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। 

सभी का कहना हैं कि यमन देवांगन सिर्फ चुनाव के वक्त दिखने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वे हमारे सुख-दुख के स्थायी साथी हैं। जब भी किसी जूनियर वकील/अधिवक्ताओं को कोर्ट रूम में या बाहर कोई परेशानी होती होगी, वे अपने सारे काम छोडक़र सबसे पहले हमारे हक के लिए खड़े  होंगे। 

क्यों जरूरी है इस बार यमन देवांगन का जीतना?

चूंकि जिला अधिवक्ता संघ का यह कार्यकाल केवल 2 वर्ष का होता है, इसलिए संघ को एक ऐसे अध्यक्ष की आवश्यकता है जो समय गंवाए बिना पहले दिन से ही वकीलों के हितों के लिए काम करना शुरू कर दे। संघ को एक ऐसा नेतृत्व चाहिए जो निर्भीक हो, निष्पक्ष हो और प्रशासनिक स्तर पर वकीलों की बात को पूरी मजबूती और वजन के साथ रख सके। यमन देवांगन इन सभी पैमानों पर शत-प्रतिशत खरे उतरते हैं।

बताया जा रहा है कि उनका पूरा कॅरियर पूरी तरह बेदाग, पारदर्शी और प्रेरणादायक रहा है। वे किसी पद पर रहें या न रहें, चौबीसों घंटे अधिवक्ताओं की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। उनसे मिलने या अपनी समस्या बताने के लिए किसी वकील साथी को किसी अपॉइंटमेंट या बिचौलिएं की जरूरत नहीं पड़ती। वे संघ को केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं मानते, बल्कि पूरे राजनांदगांव के वकीलों/अधिवक्ताओं को एक मजबूत, एकजुट और आत्मनिर्भर परिवार के रूप में विकसित करना चाहते हैं।

बताते चले कि पूर्व में यह चुनाव 14 जुलाई को और मतगणना 15 जुलाई को होनी तय थी अब नए फैसले के तहत यह चुनाव 29 जुलाई को मतदान की प्रक्रिया सम्पन्न होगी और इसके ठीक अगले दिन यानी 30 जुलाई को मतगणना कर चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। 

 


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