अंतत: बौद्ध कल्याण समिति की कमान राजकुमार बारमाटे संभालेंगे
दीपांकर खोब्रागढ़े की कार्यकारिणी अग्राहय किया गया
सुशान्त कुमारअटकलों का दौर समाप्त हुआ। छत्तीसगढ़ प्रदेश में सबसे बड़ी राजनांदगांव जिला ‘बौद्ध कल्याण समिति’ का कमान अंतत: अब राजकुमार बारमाटे संभालेंगे। इस जिला के बौद्ध समाज को प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी समिति ‘बौद्ध कल्याण समिति’ का बायलॉज को दुहाई देते हुए दो चुनाव हुए। दो अध्यक्ष बने और उसके दो कार्यकारिणी भी चुने गए थे। इस गतिरोध पर आज तब विराम लग गया जब सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, दुर्ग ने राजकुमार बारमाटे के नेतृत्व में चुनी गई समिति पर अपनी अंतिम अधिमान्यता की मुहर लगाई है।
बताते चले कि शैलेन्द्र मेश्राम एवं अन्य के द्वारा 6 मार्च 2026 को शिकायत प्रस्तुत किया गया था कि राजकुमार बारमाटे एवं कार्यकारिणी द्वारा धारा 27 के अधीन 7 फरवरी 2026 को प्रस्तुत की गई चुनाव और कार्यकारिणी पूर्णत: अवैध है एवं प्रबंधकारिणी अनुमोदन करने योग्य नहीं हैं।
वहीं राजकुमार बारमाटे ने 12 मार्च 2026 को यह भी शिकायत पहुंचाई कि दीपांकर खोब्रागढ़े का नाम अवैध रूप से जोड़ा गया हैं एवं दीपांकर खोब्रागढ़े एवं उनकी कार्यकारणी का निर्वाचन रद्द किया जाए।
रजिस्ट्रार ने अपने फैसले में कहा है कि राजकुमार बारमाटे की कार्यकारिणी की सूची हस्ताक्षरित हैं एवं कार्यकाल 7 फरवरी 2026 से 6 फरवरी 2029 तक अंकित किया गया है। दूसरी बात कार्यकारिणी का गठन नियमावली की कंडिका 32 के प्रावधानानुसार किया गया हैं।
तीसरी बात संस्था के कुछ सदस्यों की सूची प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कुल 53 आजीवन सदस्यों के नाम अंकित किया गया है। चौथी बात सामान्य सभा की बैठक जो 7 फरवरी 2026 के बैठक कार्यवाही की प्रति प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कुल 38 सदस्यों के उपस्थिति के हस्ताक्षर हैं। पांचवी बात सामान्य सभा की बैठक 7 फरवरी 2016 का कोरम 3/5 पूर्ण हैं।
फैसले में कहा गया है कि दीपांकर खोब्रागढ़े की अध्यता वाली कार्यकारिणी प्रकरण के अवलोकन एवं परीक्षण करने के उपरान्त पाया गया कि कार्यकारिणी के निर्वाचन दिनांक के बैठक कार्यवाही की प्रति प्रस्तुत नहीं करने के कारण दिनांक 15 फरवरी 2026 को सम्पन्न निर्वाचन की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

दूसरी बात कार्यकारिणी के निर्वाचन हेतु आयोजित बैठक 15 फरवरी 2026 के बैठक कार्यवाही की प्रति प्रस्तुत नहीं करने के कारण बैठक का कोरम 3/5 पूर्ण होने की स्थिति स्पष्ट नहीं हैं एवं रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं छत्तीसगढ़ के आदेश के अनुसार 23 जनवरी 2026 के आदेशा कहता है कि 5 मार्च 2022 तक के कुल वैधानिक सदस्यों के मध्य निर्वाचन सम्पन्न कराये जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सोसायटी ने कहा है कि अधिनियम की धारा 27 के अधीन 28 फरवरी 2026 को दीपांकर खोब्रागढ़े की अध्यक्षता वाली कार्यकारिणी पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सूची को अग्राहय किया जाता है।
अटकलों के बीच पंजीयक कार्यालय से आधिकारिक मान्यता राजकुमार बारमाटे को प्रदान किया हैं। अब देखना लाजिमी होगा कि 14 अप्रैल डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जयंती समारोह का आयोजन किस भव्यता के साथ सम्पन्न होता है?
बहरहाल छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित राजनांदगांव आम्बेडकर जयंती समारोह किसी भी परिस्थिति में 14 अप्रैल का समारोह भव्यता के साथ सम्पन्न हो। आयोजन दो भागों में नहीं होना चाहिये? इसके लिए सबसे बेहतर यह होगा कि धनराज वैद्य के द्वारा शुरू की गई पहल कि दोनों पक्षों को आपस में बैठकर सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए इस पर बल देना होगा।
आदेश के बाद किसी के मन में गिला शिकवा हो तो भविष्य में कार्यवाही होती रहेगी। दीपांकर खोब्रागढ़े के एक पक्ष के द्वारा जयंती के आयोजन हेतु पांच दिवसीय नगर स्तरीय बैठक एवं तैयारियां प्रारंभ हो चुकी है, इसके अतिरिक्त सभी वार्डों में भी जयन्ती के लिए बैठक एवं तैयारियां प्रारंभ हो चुकी है, अब चूंकि यह समिति अग्राहय हो चुकी इसे अब राजकुमार बारमाटे की कार्यकारिणी के साथ तुरंत युक्तियुक्तकरण कर जयंती सहित भविष्य में एकजुटता की पहल मजबूती से करनी होगी।

प्रतिवर्षानुसार संस्थापक सदस्यों, आजीवन सदस्यों तथा खारिज कर दिए तमाम सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है कि दोनों पक्ष आपस में मिलबैठ कर 14 अप्रैल से पूर्व आप दोनों ही पक्ष आपस में बैठकर वैधानिक रूप से चुने गए राजकुमार बारमाटे की कार्यकारिणी से सामंजस्य बैठाकर सभी वार्ड समितियां एवं समाज के सभी सम्मानित समाजजन रैली लेकर पूरे शहर में भ्रमण कर आम्बेडकर भवन में रैली समापन और निर्धारित कार्यक्रम को सम्पन्न करने में सहयोग दिखाएंगे।
बहरहाल बौद्ध समाज के लिए अटकलों का दौर खत्म हुआ और अंतत: राजकुमार बारमाटे बौद्ध कल्याण समिति के वैधानिक अध्यक्ष घोषित कर दिए गए हैं। इसका अनुमोदन सहायक पंजीयक फर्म्स एवं सोसायटी दुर्ग संभाग दुर्ग के द्वारा कर दिया गया हैं।

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