आम आदमी के कवि थे नासिर अहमद सिकंदर

मेरी पहली कविता ‘अभि बिल्कुल अभी’ में छापी थी

दक्षिण कोसल टीम

 

मेरे अंदर कवि को उन्होंने पहली बार पहचाना और मंच दिया था। एक विचारधारात्मक प्रतिबद्धता के साथ वे एक भले व्यक्ति, संगठन, एक झंडे और उच्च आदर्श के साथ जुड़े रहे। वे जरूर चले गए लेकिन उनकी बेश्कीमती कविताएं अमर हो कर रह गई। अपनी पीड़ाओं को नासिर ने कविताओं में बहुत मारक ढंग से तुकबंदी कर दुश्मन के मुंह मारा था। कथाकार और उपन्यासकार मनोज रूपड़ा ने ठीक ही कहा है कि या तो क्रमिक आत्महत्या है या हत्या?

किसने क्या कहा?

कैलाश बनवासी, कथाकार

दुर्ग भिलाई के साहित्यिक माहौल को बनाने, जिंदादिल बनाए रखने में नासिर भाई का महती योगदान है।
कितनी यादें हैं!
एक बड़ा खालीपन हम लंबे समय तक महसूस करते रहेंगे।
बड़े शौक़ से सुन रहा था ज़माना
तुम्हीं सो गये दास्तां कहते कहते

मनोज रूपड़ा, कथाकार और उपन्यासकार

बढ़ती हुई भयानक सांप्रदायिकता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था। मृत्यु से पहले मंजूर एहतेशाम की भी यही मनोदश थी। दअरसल ये उनकी असमय मृत्यु नहीं। या तो क्रमिक आत्महत्या है या हत्या।

शम्भू गुप्त, प्रोफेसर और लेखक

बहुत दु:खद समाचार - एक-दो बार मेरी भी उनसे मुलाकात थी - उन्होंने अपनी किताब भी मुझे दी थी। सादर श्रद्धांजलि।

राजकुमार सोनी, पत्रकार 

नासिर भाई का अचानक यूं ही चले जाना अखर गया। आठ मार्च 2023 की होली हम सबने भिलाई में इंदु शंकर मनु के निवास पर मिलकर मनाई थी और 2024 की होली में वे रायपुर में मेरे साथ थे। यहां उनकी फरमाइश पर कुछ फिल्मी गीतों को गाया था मैंने।
नासिर भाई को सलाम पहुंचे।

कनक तिवारी, अधिवक्ता 

यह शरद कोकास की 11 दिसंबर की पोस्ट है। हम सब इतने खुश थे कि अब नासिर का बहुत अच्छा इलाज हो सकेगा। लौट कर आएगा तो हम लोग मिलने जुलने की नई किस्त की शुरुआत करेंगे। कठोर कुदरत कुछ और करना चाहती थी और उसने कर लिया। 

शरद कोकास, साहित्यकार

कवि नासिर अहमद सिकन्दर का हृदयाघात से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज 29 दिसंबर को शाम 4:00 के बाद रामनगर भिलाई कब्रस्तान में होगा।
नासिर अहमद सिकंदर का संक्षिप्त परिचय।

प्रकाशित पुस्तकें : जो कुछ भी घट रहा है दुनिया में (कविता संग्रह), खोलती है खिड़की। (काव्य पुस्तिका) इस वक्त मेरा कहा (कविता संग्रह), भूलवश और जानबूझकर (कविता संग्रह), अच्छा आदमी होता है अच्छा (कविता संग्रह), चयनित कविताएं (चयन एवं संपादन सुधीर सक्सेना) कुछ साक्षात्कार।

(प्रसिद्ध लेखकों से लिए गये साक्षात्कार), बचपन का बाइस्कोप (आलोचनात्मक गद्य). प्रगतिशीलता की पैरवी (आलोचना) आलेख, समीक्षाएं रिपोर्ताज, फीचर आदि देश की महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। 'दैनिक नवभारत में छत्तीसगढ़ के युवा कवियों की कविताओं पर आधारित स्तंभ 'अभी बिल्कुल अभी' एवं साक्षात्कारों पर केन्द्रित श्रृंखला 'आमने सामने का संपादन। पत्रिका 'समकालीन हस्ताक्षर के केदारनाथ अग्रवाल तथा चन्द्रकांत देवताले पर केन्द्रित दो अंकों का संपादन। हाल ही में कवि संतोष चतुर्वेदी के ब्लाग 'पहली बार में युवा कवियों की कविताओं पर नियमित टिप्पणी एवं प्रस्तुति। सम्मान: प्रथम केदारनाथ अग्रवाल सम्मान, सूत्र सम्मान संप्रति भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त।

बुद्धिलाल पाल, दलित आलोचक

दुखद समाचार है नासिर अहमद सिकंदर भाई नहीं रहे। उनका निधन हो गया है। उनका जाना कई साथियों के लिए व्यक्तिगत क्षति के रूप में हैं। छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील धारा की तीनों संस्था के तकरीबन सभी साथी एवं अन्य कवि मित्र साथी लोग उनसे कुछ न कुछ सीखें हैं। जाने समझें हैं। सादर नमन विनम्र श्रद्धांजलि।

सियाराम शर्मा, प्रख्यात आलोचक और प्रोफेसर

प्रिय कवि, मित्र नासिर अहमद सिकंदर का आज सुबह हम सबके बीच से चले जाना अत्यंत दुखद और हतोत्साहित कर देने वाली अप्रत्याशित खबर है। वे एक सरल, सहज, संवेदनशील और संजीदा रचनाकार थे। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय राजनीति और समाज का जो सांप्रदायिक फासीवादी चेहरा उभरा है और जिसने सामाजिक ताने-बाने को नष्ट किया है, उससे वे संवेदनात्मक स्तर पर खुद को आहत महसूस करते थे।

समता और भाईचारा पर आधारित जिस समाज का उन्होंने स्वप्न देखा और निरंतर जिसके लिए रचनात्मक स्तर पर संघर्ष करते रहे, उसे बिखरता देखकर वे अत्यंत चिंतित और उदास रहते थे । उनकी चिंता सिर्फ वैचारिक और दिखावटी न होकर अत्यंत गहरी, बेचैनी और उद्विग्नता  से भरी थी। वे हमेशा वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध रहे एवं कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिबद्धता का त्याग नहीं किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में जनवादी लेखक संघ के संगठन को मजबूत किया। दोस्तों के बीच उनकी जान बसती थी।

उनके स्कूटर के पीछे बैठकर हमने भिलाई के चप्पे-चप्पे, हर गली, मोहल्ले को देखा, जाना और समझा था। अकेलेपन के दिनों में कई बार उनके घर साथ में भोजन किया।हम घंटों साथ बैठते। विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक मसलों पर चर्चा करते। मेरे भिलाई आते ही उन्होंने मुझे जनवादी लेखक संघ की गोष्ठियों से जोड़ लिया था। उन दिनों वे मध्य प्रदेश साहित्य परिषद के पाठक मंच का संचालन भी करते थे। वे नवोदित कवियों की नर्सरी थे।

अपने आस - पास के हर युवा कवि को उन्होंने संस्कारित, प्रभावित और प्रोत्साहित किया। पिछले कुछ वर्षों से वे कई तरह की स्वास्थ्यगत परेशानियों से जूझ रहे थे। अपने स्वास्थ्य को लेकर थोड़े लापरवाह भी रहे। उन्हें जिस तरह खुद को व्यवस्थित और संयमित रखना था और अपने स्वास्थ्य के ऊपर कड़ी निगरानी रखनी थी, वे नहीं रख पाए। कुछ ही दिनों पूर्व में अपने प्रिय मित्र और अंतिम क्षण तक उनके साथ रहे कवि मित्र कमलेश्वर साहू के साथ वेल्लोर से वापस आए थे। आज उन्हीं के समक्ष उन्होंने अंतिम सांस ली।

पीसी रथ, पत्रकार

चर्चित कवि नासिर अहमद सिकंदर को विनम्र श्रद्धांजलि - जलेस, छत्तीसगढ़, रायपुर, 29 दिसंबर 2025,  भिलाई में रहने वाले 15 जून 1961 को जन्में, विगत 4 दशकों से हिंदी कविता में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने वाले नासिर अहमद सिकंदर का आज सुबह 08.00 बजे हृदयाघात से निधन हो गया।

छत्तीसगढ़ के नवोदित कवियों को लेखन प्रकाशन का संबल दे कर दैनिक समाचार पत्र के साहित्य पृष्ठ का संपादन करने से ले कर बेहतर काव्य लेखन की ओर प्रवृत्त करने वाले साहित्य जगत के निरंतर साधक रहे नासिर अहमद सिकंदर विगत कुछ वर्षों से शारीरिक व्याधियों से जूझ रहे थे, भिलाई स्टील प्लांट से सेवा निवृत होने के बाद वे भिलाई में ही बस गए थे।

उनकी कविताओं के कई संग्रह  जैसे "भूल वश और जानबूझ कर" , "इस वक्त मेरा कहा " तथा "जो कुछ भी घट रहा है दुनिया में " एवं "कुछ साक्षात्कार" लेखकों  से बातचीत के संग्रह तथा कविताओं की समीक्षात्मक किताबें प्रकाशित हो चुकी थीं। वे अपनी जनवादी रुझान वाली रचनाओं के साथ स्थानीय नवोदित कवियों को साहित्य की मुख्यधारा में जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य दो दशकों से कुशलता से संपादित कर रहे थे।

वे जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ के केंद्रीय समिति के सदस्य तथा पिछले दो टर्म में राज्य महासचिव रह चुके थे। जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है एवं उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है। वे अपनी जनवादी रुझान की रचनाओं और योगदान के लिए हमेशा स्मृतियों में रहेंगे।

स्वराज करुण, पूर्व पत्रकार और जनसम्पर्क अधिकारी

छत्तीसगढ़ की हमारी साहित्यिक बिरादरी के लिए आज 29 दिसम्बर का दिन बहुत मायूसी भरा रहा. हिन्दी और उर्दू के हमारे दो जाने -माने कवि आज हमसे हमेशा के लिए बिछुड़ गए.सुबह ख़बर आई कि भिलाई नगर के निवासी सुप्रसिद्ध कवि भाई नासिर अहमद सिकंदर नहीं रहे. हिन्दी नई कविता के सशक्त हस्ताक्षर थे नासिर भाई. भिलाई नगर में उनका देहावसान हो गया, तो शाम को रायपुर के प्रतिष्ठित शायर रजा हैदरी साहब के निधन का समाचार मिला. रजा साहब उर्दू के बेहतरीन शायर थे. उनका निधन रायपुर में हुआ. दोनों दिवंगत कवियों को  विनम्र श्रद्धांजलि.
 


Add Comment

Enter your full name
We'll never share your number with anyone else.
We'll never share your email with anyone else.
Write your comment

Your Comment