सेवा के पर्याय डा. रमन सिंह: शनिचरी डाक्टर से चाउंर वाले बाबा तक सफर
आज 15 अक्टूबर को उनके 73 वें जन्म दिवस पर विशेष
कोमल सिह राजपूतहोनहार और सेवा भावी छवि के डाक्टर रमनसिंह इस फानी दुनिया में 15 अक्टूबर 1952 को अवतरित हुए। लेकिन इस बालक ने आगे चलकर अपने शुभ कर्मों से ऐसे मिसाल पेश की कि गिरे -तबके लोगों से लेकर आम और खास आदमी उन्हें जन- नायक और चांउंर वाले बाबा के नाम से जानने लगे।
कुल सपूत जान्यो परे, लखि शुभ लच्छन गात...
होनहार बिरवान के होते चिकने पात...
होनहार और सेवा भावी छवि के डाक्टर रमनसिंह इस फानी दुनिया में 15 अक्टूबर 1952 को अवतरित हुए। लेकिन इस बालक ने आगे चलकर अपने शुभ कर्मों से ऐसे मिसाल पेश की कि गिरे -तबके लोगों से लेकर आम और खास आदमी उन्हें जन- नायक और चांउंर वाले बाबा के नाम से जानने लगे।
कवर्धा के एक छोटी-सी डिस्पेंसरी से उन्होंने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत पार्षद चुनाव लड़कर की और वह मध्यप्रदेश के जमाने में मंत्री और केंद्र में मंत्री पद से लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश के दीर्घ अवधि तक के मुख्यमंत्री तथा विधान सभा अध्यक्ष के रुप में हिंदुस्तान के सफलतम राजनीतिक व्यक्तित्व के रुप में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी है।
मैंने उन्हें सेवा भावी इसलिए कहा कि वे कवर्धा की अपनी डिस्पेंसरी से लोगों की चिकित्सीय सेवा तो करते ही थे लेकिन शनिवार के दिन वह अपनी डिस्पेंसरी बंद कर देवारों की बस्ती में जाते थे,और ग़रीब तबके को लोगों का मुफ्त में इलाज करते थे। इसलिए वे लोग उन्हें शनिचरी डाक्टर कहा करते थे। आज इन गरीब तबके के लोगों के प्यार और आशीर्वाद ने डाक्टर साब को कहां से कहां तक पहुंचा दिया।
जैसे कि प्रायः सभी जानते हैं कि उनका राजनीतिक सफर काफी उथल-पुथल रहा लेकिन उनकी धैर्यता और सौम्यता ने उन्हें हार नहीं मानने दी। जब वे विधानसभा चुनाव में मोतीलाल वोरा जैसे धुरंधर राजनीतिक को पछाड़ कर आगे बढ़े तो उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश का मुख्यमंत्री पद नसीब हुआ। कांग्रेस के हाथों से बीमारु और पिछड़े राज्य छत्तीसगढ़ की बागडोर सम्हाले डॉ रमनसिंह ने लोगों के लिए बिजली पानी सड़क, स्वास्थ्य शिक्षा की मूलभूत सुविधाएं जुटा कर देश में इसे एक न एक मुकाम में पहुंचा दिया।
बीमारु राज्य का कलंक हटा कर डाक्टर साब ने सबसे पहले पलायन को रोकने का काम किया और प्रदेश से रोजी-रोटी कमाने बाहर जाने वाले को एक रुपया किलो में चांवल उपलब्ध करा कर उनके कदम रोकी और ग़रीबी रेखा से नीचे के लोगों को भी चांवल उपलब्ध करा कर वे चांउर वाले बाबा कहलाए। इसके पीछे उनका खुली आंखों से देखा गया स्वप्न था कि उनके कार्यकाल में कोई गरीब न रहे , कोई भूखा न सोएं। डाक्टर रमन सिंह आखिर वैसा कर भी गए।
डा. रमन सिंह की लोकप्रियता का ग्राफ
डा, रमन सिंह की लोकप्रियता का ग्राफ कितना आगे रहा इसे इस छोटे से तथ्य से जाना जा सकता है। जब देश के वरिष्ठ नेता व उप- प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी जी अपनी रथयात्रा लेकर कवर्धा जिले पहुंचे थे। रात को डेढ़ बजे डा० रमनसिंह के नेतृत्व में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता व आम जनता में आडवाणी जी का भव्य स्वागत किया गया। इससे गदगद आडवाणी जी ने डा० सिंह के उज्जवल भविष्य की कामना की थी। डाक्टर सिंह आगे बढ़ते गए और उनकी पूछ-परख न केवल भाजपाइयों में विरोधी दल के नेताओं में भी होने लगी।
डाक्टर साब की योग्यता और लोकप्रियता के आगे कांग्रेस जन भी पूरी तरह नतमस्तक होते थे। विधानसभा में कार्रवाई के दौरान प्रश्न और पूरक प्रश्न सहित विधानसभा की प्रक्रिया को कैसे क्रियान्वित किया जाए यह उनसे पूछा जाता था। डाक्टर सिंह की समदर्शिता व शैली का परिणाम है कि विपक्ष भी अपने प्रश्नों के लिए उनसे संपर्क करते थे। साथ ही मंत्रीमंडल के सदस्य भी अपने उत्तर हेतु उनके सान्निध्य आते थे।
डाक्टर रमन सिंह का जीवन संदेश
छत्तीसगढ़ के अनवरत रुप से 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे डाक्टर रमनसिंह का जीवन संदेश यही रहा कि राजनीति सिर्फ सत्ता का साधन नहीं अपितु सेवा का माध्यम होना चाहिए। यही वजह है कि वे पद के पीछे कभी नहीं भागे। पद उनके लिए प्रशस्त होते रहा।
उनका कहना था कि आपके दरवाजा खटखटाने वाला हर व्यक्ति याचक नहीं ,, भगवान भी हो सकता है। यही भावना उसे हरदिल अजीज नेता बनाती है। उनकी सरलता और विनम्रता इतनी सहज है कि यदि कोई उनकी सीट पर बैठ जाएं तो उसे न उठाकर स्वयं बगल की कुर्सी खींचकर बैठ जाते हैं।
बीमारु राज्य से विकासशील राज्य
बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी। लोग रोजगार की तलाश में देशकी अन्य राज्यों की ओर पलायन करने विवश थे। गरीबी भूखमरी व पलायन जैसी समस्याओ से लोगों को उबारने और उनके जीवन में स्थायित्व लाने सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराने की योजना शुरू की। आदिवासी बहुल राज्य में आजादी के लगभग 55 वर्षों तक यह समाज अपनी मूल्यवान उपज चार- चिरौंजी, काजू, गोंद, आदि मात्र थोड़े से नमक के बदले बेचने विवश थे।
डाक्टर सिंह ने इस शोषण की परंपरा को समाप्त कर देश में पहली बार कीमती वनोपज को किलो के हिसाब से तौलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य ( msp) पर खरीदी की नीति लागू की। छत्तीसगढ़ की सबसे गंभीर नक्सली समस्या आतंकवाद की चुनौती को उन्होंने केवल कानून व्यवस्था का नहीं बल्कि विकास का मुद्दा माना। उन्होंने बस्तर के युवाओं को पुलिस विभाग में सहायक आरक्षक के रुप में जोड़ा। नक्सल पीड़ित ट्राइबल बच्चों को शहरों के प्रतिष्ठित विद्यालयों में निशुल्क आवासीय शिक्षा दिलवाई।
यही बच्चे आगे चलकर एसपी, कलेक्टर, इंजीनियर , डाक्टर बने। दंतेवाड़ा में देश का पहला लाइवलीहुड कालेज स्थापित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा उद्घाटित इस कालेज का माडल पूरे देश में स्टील डेवलपमेंट मिसन के रूप में अपनाया है। डाक्टर रमन सिंह के पीडीएस प्रणाली की पूरे देश में चर्चा हुई और इसे देश में ही नहीं विदेशों में अपनाया गया।
किसानों को आर्थिक स्वतंत्रता का नया अध्याय
कृषि व्यवस्था हमारे देश की रीढ़ है। छत्तीसगढ़ तो धान का कटोरा कहलाता है। लेकिन यहां के किसान लंबे समय तक कर्ज और व्याज के बोझ तले दबे रहे। उन्हें कांग्रेस शासन काल में 14 प्रतिशत व्याज दर पर कृषि ऋण मिलता था। महाजन के चंगुल में फंसकर किसान अपनी जमीन और सम्मान खो देते थे। डाक्टर साब ने इस पीड़ा को समझा और व्याज दर क्रमश: घटा कर शून्य प्रतिशत तक ले आए। किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, खाद- बीज की समय पर उपलब्धता, फसल बीमा योजना माध्यम की सुरक्षा दी। डाक्टर साब की इन योजनाओं ने छत्तीसगढ़ को कृषि समृद्धि का आदर्श राज्य बना दिया।
एकात्म मानववाद और अंत्योदय का सजीव मिसाल
डाक्टर रमन सिंह ने पं० दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारा और उन्होंने छत्तीसगढ़ को एक बीमारु, पिछड़े राज्य से निकालकर एक विकासशील आत्मनिर्भर और गौरवशाली राज्य में परिवर्तित किया। महिलाओ, युवाओं व बच्चों के लिए संवेदनशील नीतियां बनाई गई।शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया। बाल हृदय सुरक्षा योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क उपचार किया गया। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना व प्रधानमंत्री सीमा योजना लागू की गई।
उपरोक्त हिसाब से देखा जाए तो डाक्टर रमन सिंह जी,, पर हित सरिस धरम नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई को अपने जीवन व कर्मो में उतारने वाला संवेदनशीलता से भरा जन नायक हैं। ऐसे निष्कलंक, जनप्रिय,सहृदयी नेता , पूर्व मुख्यमंत्री,एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमनसिंह को छत्तीसगढ़ की आत्मा कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।आज हम सभी उनके 73 वें जन्म दिवस पर भगवान से प्रार्थना करते हैं कि डाक्टर साब चिरायु हो...दीर्घायु हो...जिससे उनका आशीर्वाद हमें सदा मिलता रहे,। आज भी उनका समदर्शी नेतृत्व छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक गौरव का विषय नहीं प्रेरणा पूंज भी बना हुआ है।

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