छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे कवि विनोद शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार
1994 से 1996 तक निराला कृष्णपीठ में अतिथि साझीदार रहे
सुशान्त कुमारछत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे हिंदी साहित्य के नामीचन कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को इस साल का ज्ञानपीठ सम्मान से नवाजा गया है। नई दिल्ली में आज इसकी घोषणा की गई है।

यह गौरव का विषय है कि विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी, 1937 को राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ में हुआ। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
‘लगभग जयहिन्द’, ‘वह आदमी नया हॉट कोट पहन कर चला गया विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘अतिरिक्त नहीं’, ‘कविता से लम्बी कविता’, ‘कभी के बाद अभी’, ‘प्रतिनिधि कविताएं’(कविता-संग्रह); ‘पेड़ पर कमरा’ तथा ‘महाविद्यालय’ (कहानी-संग्रह); ‘नौकर की कमीज़’, ‘दीवार में एक खिडक़ी रहती थी’, ‘खिलेगा तो देखेगा’, ‘हरी घास की छप्पर वाली इमारतें और बौना पहाड़’ (उपन्यास)। मेरियोला अफ्ऱीदी द्वारा इतालवी में अनुदित एक कविता-पुस्तक का इटली में प्रकाशन, इतालवी में ही ‘पेड पर रूम’ का भी अनुवाद। कई रचनाएं मराठी, मलयालम, अंग्रेजी और जर्मन में अनुदित उनकी प्रकाशित कृतियां हैं।
मणि कौल द्वारा 1999 में ‘नौकर की कमीज’ फिल्म का निर्माण किया गया। ‘आदमी की औरत’ और ‘पेड़ पर रूम’ में अमिता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आदमी की औरत’ को वेनिस फेस्टिवल फेस्टिवल के 66वें फेस्टिवल (2009) में स्पेशल इवेंट अवॉर्ड्स शामिल हैं।
1994 से 1996 तक निराला कृष्णपीठ में अतिथि साझीदार रहे।
आप ‘गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप’, ‘राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’, ‘शिखर सम्मान’ (मप्र शासन), ‘हंदी गौरव सम्मान’ (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान), ‘रजा पुरस्कार’, ‘दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान’, ‘रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार’ और ‘दीवार में एक खिडक़ी’ के लिए ‘हित साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित हैं।
वे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से कृषि-विस्तार के सह-प्रधान पद से 1996 में सेवानिवृत्त हुए। अब स्वतंत्र लेखन करते हैं।
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