जिम्मेदारों को लिखा, ‘दर्शनशास्त्र’ बंद ना करें
कुलाधिपति सहित सांसदों को लिखा पत्र
सुशान्त कुमारनई शिक्षा नीति - 2020 के आने के बाद शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल नए बदलाव किए जा रहे हैं। कई पुराने पाठ्यक्रम को बंद किया जा रहा है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में इस वर्ष ‘दर्शनशास्त्र’ को बंद करने की कोशिश हुई है। और ‘दर्शनशास्त्र’ में स्नातकोत्तर की परीक्षाएं नए अमहाविद्यालायीन परीक्षार्थियों के लिए बंद कर दिया गया है। यही नहीं इससे पूर्व ‘प्राचीन भारत का इतिहास’ विषय बंद कर दिया गया है। खबर है कि इतिहास में 'पर्यटन' को बंद किया जाएगा।

विश्वविद्यालय का कहना है कि दिग्विजय कॉलेज एक मात्र केन्द्र है दर्शनशास्त्र के लिए वह अगर इसे बंद करता है तो अमहाविद्यालायीन परीक्षार्थियों को कई किलोमीटर की दूरी नापते हुए राजधानी के रविशंकर विश्वविद्यालय जाना होगा।
दक्षिण कोसल के सम्पादक सुशान्त कुमार ने इस आशय का पत्र जिम्मेदार विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सहित उच्च शिक्षा विभाग और सांसद, महापौर, कलेक्टर, कुलपति और कुलसचिव को लिखा है। और मांग की है कि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में ‘दर्शनशास्त्र’ विषय को बंद ना कर दुबारा शुरू किया जाए।
उन्होंने लिखा है कि नई शिक्षा नीति - 2020 के आने के बाद नए-नए बदलाव आ रहे हैं। जो परीक्षार्थी अपनी दैनिक आर्थिक स्थितियों के कारण अमहाविद्यालयीन (प्राइवेट) परीक्षा देते आ रहे हैं उनके सामने अध्यापन की समस्या उत्पन्न हो गई है। बीए में ‘प्राचीन भारत का इतिहास’ अब कोर्स में नहीं है। दिग्विजय कॉलेज में अब साल 2025 से ‘दर्शनशास्त्र’ (स्नातकोत्तर) प्राइवेट विद्यार्थी प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं दिलवा पाएंगे अर्थात दर्शनशास्त्र (स्नातकोत्तर स्तर) अमहाविद्यालयीन (प्राइवेट) की परीक्षा भी 2025 से बंद कर दिया गया है।
बताते चले कि यहां ‘दर्शनशास्त्र’ स्नातकोत्तर नियमित शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। स्नातकोत्तर प्राइवेट बंद करने की कोई अधिकारिक पूर्व सूचना विश्वविद्यालय और महाविद्यालय द्वारा जारी कर चस्पा नहीं किया गया है, लेकिन विषय बंद कर दिया गया हैं। दूर-दराज क्षेत्रों में ‘दर्शनशास्त्र’ के अध्येता विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे विश्वविद्यालय की शरण में जाने होगा।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय 2015 में अस्तित्व में आया है। यह जिला बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, कबीरधाम, राजनांदगांव, मोहल-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को पूरा करता है। इस वर्ष 2025 से दर्शनशास्त्र विषय के अलावा अन्य विषय के नहीं होने से इन विभिन्न जिलों के विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए भटकना पड़ रहा है। प्राइवेट विद्यार्थियों की हालात और भी खराब है अब वे ड्रापआऊट की ओर अग्रसर होंगे।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ‘दर्शनशास्त्र’
जैसा कि आप जानते हैं कि ‘दर्शनशास्त्र’ मानव तथा मानव के अस्तित्व तथा दुनिया और ब्रह्मांड को जानने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विषयों में से एक और सभी विषयों की जननी हैं। मनुष्य के पास बुद्धि हैं जिसके कारण वह जगत की विभिन्न वस्तुओं को देखकर उसके स्वरूप को जानने का प्रयास करता है।
इस जिज्ञासा के कारण मनुष्य के मन में अनेक प्रश्र उठते हैं। जैसे-विश्व का स्वरूप क्या है? इसकी उत्पत्ति किस प्रकार और क्यों हुई? विश्व का कोई उद्देश्य है या उद्देश्यहीन हैं? ईश्वर क्या है? जीव क्या है? आत्मा क्या है? जीवन का लक्ष्य क्या है? वेदांत से लेकर बौद्ध-जैन और चार्वाक दर्शन का अर्थ क्या हैं?
आप सभी को जानना चाहिए कि दर्शन के अर्थ को पाश्चात्य संदर्भ में दर्शन की उत्पत्ति ज्ञान के प्रति जिज्ञासा से हुई है। पश्चिम में सारे दर्शनशास्त्री गणितज्ञ हुआ करते थे। पश्चिम में ‘दर्शन’ को ‘फिलॉसफी’ कहा जाता है। यह दो शब्दों ‘फिलॉस’ तथा ‘सोफिया से बना है। ‘फिलॉस’ का अर्थ है, ‘प्रेम’ तथा ‘सोफिया’ का अर्थ है ‘ज्ञान’। इस प्रकार ‘फिलॉसफी’ का अर्थ है -‘ज्ञान से प्रेम।’
पश्चिम में ‘दर्शन’ का अर्थ बौद्धिकता से हैं। ग्रीक के दार्शनिक सिनेट (संसद) में उपस्थिति दर्ज करते थे। भारत में ‘फिलॉसफी’ वैदिक दर्शन से प्रारंभ होता है। दर्शन संस्कृत के ‘दृश् धातु’ से बना है जिसका अर्थ है देखना। कहा गया है ‘दृश्यते अनेन इति दर्शनम्’ अर्थात् जिसके द्वारा देखा जाए वह दर्शन है। इस प्रकार दर्शन वह विद्या है जिसके द्वारा सृष्टि के मूल तत्व का साक्षात्कार (अनुभूति) किया जाता है।
भारत में दर्शन केवल जीवन और जगत से संबंधित प्रश्रों का उत्तर ढूंढना नहीं है बल्कि तत्व की अनुभूति प्राप्त करना भी है। इसके अंतर्गत हम भारतीय और पाश्चात्य दर्शन, नीतिशास्त्र, धर्मदर्शन, तर्कशास्त्र, भारतीय और पाश्चात्य तत्व मीमांसा और ज्ञान मीमांसा, ग्रीक दर्शन, महापुरूषों का दर्शन, विभिन्न वैचारिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक दर्शन का अध्ययन करते हैं।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में नहीं है यूटीडी
रायपुर में रविशंकर विविश्वविद्यालय के अंतर्गत, इसके यूटीडी के अलावा, दुर्गा कॉलेज, छत्तीसगढ़ कॉलेज और संस्कृत महाविद्यालय में ‘दर्शनशास्त्र’ पढ़ाए जाते हैं। हेमचंद विश्वविद्यालय में अबतक यूटीडी शुरू नहीं किया गया है। पूरे विश्वविद्यालय में दिग्विजय कॉलेज में ही एक मात्र प्रोफेसर स्नातक स्तर में ‘दर्शनशास्त्र’ पढ़ाते हैं, वह महाविद्यालय भी स्वशासी (ऑटोनोमस) होने के कारण नई शिक्षा नीति के दबाव में आकर इस वर्ष ‘दर्शनशास्त्र’ स्नातकोत्तर स्तर पर प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए अवसर बंद कर दिया है।
द्वितीय व तृतीय वर्ष के स्नातक के विद्याार्थियों (अमहाविद्यालायीन) के लिए इस वर्ष एक मौका महाविद्यालय दिया है। उनके सामने स्नातकोत्तर स्तर पर नियमित तो हैं ही नहीं अब उल्टे स्नातकोत्तर स्तर पर अमहाविद्यालायीन अध्ययन का रास्ता भी बंद कर दिया गया है।
जिम्मेदारों को लिखा गया पत्र
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सुशान्त कुमार ने रामेन डेका, राज्यपाल एवं कुलाधिपति हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उच्च शिक्षा विभाग, रायपुर, कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग, कुलसचिव, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग, उप कुलसचिव, (परीक्षा) हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग, रमन सिंह विधान सभा अध्यक्ष और राजनांदगांव विधायक, महापौर मधुसूदन यादव, सांसद संतोष पांडेय तथा कलेक्टर को पत्र लिखा हैं।
कई अन्य विषयों को शुरू करने की भी उठी मांग
इससे पहले भी कई अन्य विषयों को शुरू करने की भी मांग उठ चुकी है। इस महाविद्यालय में बीजेएमसी विषय हैं लेकिन एमजेएमसी नहीं है। किशोरीलाल शुक्ल कॉलेज में एलएल-बी की शिक्षा दी जाती है लेकिन एलएल-एम की शिक्षा के लिए अशासकीय कल्याण महाविद्यालय, भिलाईनगर में अध्ययन के लिए जाना होता है। लेकिन पर्याप्त सीटों के अभाव में कई एलएल-बी के विद्यार्थी मजबूरन एलएल-एम की शिक्षा हासिल नहीं कर पाते हैं।
दक्षिण कोसल के सम्पादक सुशान्त कुमार ने जिम्मेदारों से आग्रह किया है कि उपरोक्त परिस्थितियों में विषयों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में सत्र 2025 से ही ‘दर्शनशास्त्र’ को स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर में नियमित करते हुए स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर (अमाविद्यायलायीन) छात्रों के लिए भी इसे अध्ययन करने के लिए केन्द्र के रूप में खोला जाएं।
उन्होंने आशा जताया है कि विद्यार्थियों की भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में जिम्मेदार व्यक्ति ठोस पहल करते हुए दिग्विजय कॉलेज के अलावा और दो-तीन कॉलेजों में ‘दर्शनशास्त्र’ (स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर) नियमित और अमाविद्यालायीन के लिए अध्ययन का केन्द्र खोलने का मार्ग प्रशस्त कर व्याख्याताओंं की व्यवस्था करेंगे।
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