गांव रामपुर ने उल्लास के साथ मनाया संविधान की हीरक जयंती
बिरसा मुंडा जयंती, वीरनारायण सिंह शहादत दिवस
सुशान्त कुमारभारतीय संविधान में करीब 1,40,000 शब्द हैं। संविधान बनाने में कुछ 64 लाख रुपए का खर्च आया था। यह कुल 2 वर्ष, 11 महीना और 18 दिन में पूरा हुआ। संविधान लिखने के लिए इंग्लैंड से 432 निब मंगवाई गई, इन निब को होल्डर में लगाकर पेन बनाया गया था और स्याही में डुबोकर संविधान लिखा गया था। इसे लिखने के लिए प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया था।
संविधान के भाग 3 में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण की तस्वीर, भाग 2 में वैदिक काल के गुरूकुल, भाग 16 में रानी लक्ष्मीबाई और टीपू सुल्तान की तस्वीर, भाग 17 में महात्मा गांधी की तस्वीर, भाग 18 में महात्मा गांधी चटगांव के नोआखाली में दंगे शांत कराने गए, भाग 18 में सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर लगाई गई। मूल प्रति में कई दुर्लभ तस्वीरें हैं। इन तस्वीरों को बनाने का काम उस समय के मशहूर चित्रकार नंदलाल बोस ने किया है।
राजनांदगांव के पश्चिम में डोंगरगांव विधान सभा क्षेत्र के नामी ग्राम रामपुर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 11 दिसम्बर को संविधान दिवस तथा इस वर्ष संविधान की हीरक जयंती मनाई गई। सर्वप्रथम ग्रामीणों ने बैंड बाजे के साथ पूरे गावं में संविधान पर जुलूस निकाला और संविधान चिरायु हो के नारे लगाएं। उल्लेखनीय है कि पिछले चार सालों से यह गांव संविधान दिवस मनाते आ रहा है।
इसकी पहल शिक्षक एमडी वाल्दे, सरपंच रत्ना बोरकर, बाबूलाल खोब्रागढ़े के नेतृत्व में आदिवासी समाज, बौद्ध समाज, यादव समाज, विश्वकर्मा समाज, वैष्णव समाज, सेन समाज, सोनी समाज, मानिकपुरी समाज, मुस्लिम समाज के साथ समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से वृहद आयोजन किया जाता है।
भारत के लोगों ने अपने संविधान को 26 नम्बवर 1949 ई. को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया है, जो 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत में लागू हो गया है। इन दोनों अवसरों पर क्रमश: संविधान दिवस और गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। हमारे देश में संविधान लागू हुए 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसलिए पूरे देश में अनेकों स्थानों पर, अनेकों संगठनों के द्वारा विश्व श्रेष्ठ भारत का संविधान की हीरक जयन्ती मनाई जा रही है।
संविधान की वजह से हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहलाता है, देश में विधि का राज स्थापित है, शक्ति पृथक्करण सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समानता, धर्मनिरपेक्षता है, सभी नागरिकों इत्यादि का मानवोचित सिद्धांत स्थापित है सभी नागरिकों के मूल अधिकार सुरक्षित है तथा सभी समस्याओं का एक मुस्त और स्थायी समाधान संभव है।
संविधान देश की सर्वोच्च नियमावली, सर्वोपरी, सर्वमान्य, सर्वव्यापक एवं अनिवार्य विधान है वह देश का सबसे बड़ा प्रतिनिधिक एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय होने के कारण समस्त देशवासियों को उसकी पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। जो संविधान पर आधारित कोई परम्परागत कार्यक्रम चर्चा का मुद्दा एवं उसके प्रति समुचित दृष्टिकोण न होने के कारण आज भी संविधान के प्रति जनता अनभिज्ञ हैं।
उपरोक्त कार्यक्रम के तहत शिक्षक एमडी वाल्दे ने ‘दक्षिण कोसल’ से बताया कि संविधान की जानकारी नहीं तो पालन नहीं, और पालन नहीं तो लाभ नहीं। देश के प्रत्येक नागरिकों का कर्तव्य है, कि संविधान का पालन करें।
संविधान की हीरक जयन्ती समारोह के इस सुनहरे अवसर पर विश्व का सबसे अच्छा संविधान को भली भांति पढऩे, समझाने, संविधान विशेषज्ञ द्वारा उसकी समुचित व्याख्या की गई ताकि देश के नागरिक विश्व श्रेष्ठ भारत का संविधान को भलीभांति समझने और उसका ठीक-ठीक पालन करने का मार्ग प्रशस्त करवा सके।
इस आयोजन में मुख्य अतिथि एमडी ठाकुर (केन्द्रीय अध्यक्ष केन्द्रीय गोंड़ महासभा धमधागढ़), विशेष अतिथि रत्ना बोरकर, सरपंच ग्राम पंचायत रामपुर, मनीष साहू, जनपद सदस्य क्षेत्र क्र. 15 जनपद पंचायत, डोंगरगांव, नीलकंठ गढ़े, जिलाध्यक्ष जिला गोंड महासभा राजनांदगांव, माला गौतम, उपाध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा, सुशांत कुमार, संपादक दक्षिण कोसल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
एमडी ठाकुर ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने हमें सिखाया कि हमें कैसे अपने परिवेश के साथ सद्भाव की भावना के साथ रहना है और अपनी संस्कृति पर गर्व करना है। उनसे प्रेरित होकर हमारी पार्टी (भाजपा) उनके सपनों को पूरा करने और हमारे आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए लिए बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है।
सुशान्त कुमार ने कहा कि बाबा साहेब ने तीन जादुई अस्त्र हमें दिया। संविधान, बौद्ध धम्म और विचारधारा। उन्होंने कहा कि कई विद्वानों राजेन्द्र प्रसाद, नेहरू, अयंगर, कृपलानी, मुंशी और बीएन राऊ के उपस्थिति में संविधान को ड्राफ्ट किया। संविधान के प्रस्तावना में समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय को टंकित किया है, जिसे संशोधित करना असंभव है।
उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर संविधान सभा में प्रत्येक बहसों के लिए कई बार 7 से 27 बार तर्कों का जवाब विद्वता के साथ देते थे। संविधान में 395 अनुच्छेद, 8 परिशिष्ट तथा 22 भागों में विभक्त किया गया था। जो दिसम्बर 1946 से नवम्बर 1949 तक चला तथा 26 जनवरी 1950 को देश में लागू किया गया।
उन्होंने अनुच्छेद 40, अनुच्छेद, 15, अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 244 (1) तथा (ए), पेसा कानून, पेसा नियम पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान उपचार के लिए जरूरी अनुच्छेद 32 संविधान में महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में गिना जाता है। उन्होंने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका का अपने भाषण में उल्लेख किया।
कार्यक्रम के संचालक एमडी वाल्दे ने सभा को बताया कि अनुच्छेद 21 (क) में इस संविधान में छह से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मौलिक अधिकार के रूप में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जा सकेगी। माला गौतम ने संविधान में महिलाओं के अधिकार और उनकी भूमिका पर बात की।
रत्ना बोरकर ने कहा कि हम कब तक बाबा साहेब आंबेडकर को दोयम दर्जे में रखते हुए दलितों में गिनते रहेंगे।नीलकंठ गढ़े ने महिलाओं को चूल्हा चौखट से बाहर आकर संघर्ष के लिए प्रेरित किया। कन्हैयलाल खोब्रागढ़े ने कहा कि आदिवासी शहीदों के बिना यह संविधान निर्माण संभव नहीं हो पाता।
कार्यक्रम में प्रतिभावान बच्चों, मितानिन दीदीयों, सफाई दीदीयों, बुजुर्गों को सम्मानित किया गया तथा बच्चों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यकम का आयोजन किया गया।
इसके अलावा दुधेराम साहू अध्यक्ष अध्यक्ष ग्राम समिति, रामपुर, द्वारिका तारम, ग्राम पटेल रामपुर, केवल सिन्हा, उपसरपंच, भेखसिंह नेताम, आदिवासी समाज, जीवन लाल साहू, साहू, बेनीराम बोरकर, बौद्ध समाज, राकेश सिन्हा, अध्यक्ष सिन्हा समाज, हीरालाल यादव, यादव समाज शामिल थे।
निर्मलकर, अध्यक्ष निर्मलकर समाज, अब्बास खान, अध्यक्ष मुस्लिम समाज, निर्मलदास मानिकपुरी, अध्यक्ष मानिकपुरी, कामला विश्वकर्मा, अध्यक्ष विश्वकर्मा समाज, दिलीप वैष्णव, अध्यक्ष वैष्णव समाज, दिनेश श्रीवास, अध्यक्ष सेन समाज, धर्मेन्द्र सोनी, अध्यक्ष सोनी समाज शामिल थे।
कार्यक्रम में पंचायत रामपुर जनप्रतिनिधि खिलेश्वरी मंडावी, विशाखा फड़ौती, ज्योती यायय, कीर्ति साहू, केवल सिन्हा, पिंकी मंडावी, प्रमोद अरकरा, गोवर्धन साहू, मनसा राम सिन्हा, परस राम साहू, देव कुमार साहू, बसन्ती मानिकपुरी, गंगोत्री साहू, कामनी साहू, गौरी रामटेके, राजकुमारी खोब्रागड़े (पंचायत सचिव), माया साहू (रोजगार सहायक) शामिल थे।
आदिवासी समाज प्रमुख भेखसिंग नेताम अध्यक्ष, ललीत मंडावी-सचिव, तोरण नेताम उपाध्यक्ष, रामदयाल अरकरा दुधनाथ मंडावी, पिताम्बर उईके, जेतराम नेताम नेताम, मगलू उईके, हरीशचंद्र नेताम, रमेश अरकरा, हिरालाल नेताम, भानूप्प्रताप सिंह ध्रुव, बौद्ध समाज से शीतल रामटेके उपाध्यक्ष, विनोद खोब्रागढ़े सचिव, परमानन्द रामटेके सह सचिव, महेश उके, नागेश बोरकर, बाबूलाल खोब्रागढ़े शामिल थे।
सिन्हा समाज से राजेश सिन्हा अध्यक्ष, खिलावन सिन्हा सचिव, सखाराम सिन्हा, तारम सिन्हा, भागीरथी सिन्हा, प्रताप सिन्हा, संजय सिन्हा। साहू समाज से सोनउ साहू, भरतलाल साहू, संतोष साहू, शिव मोहन साहू, देवलाल साहू, जीवन लाल साहू अध्यक्ष, डमन साहू, उपाध्यक्ष, रूपचंद साहू, सचिव, महेन्द्र साहू, सचिव, रोहित साहू। यादव समाज से हीरालाल यादव, अध्यक्ष, रामकुमार, किशोर यादव, रामकुमार यादव, श्याम यादव शामिल थे।
निर्मलकर समाज से मनोज निर्मलकर अध्यक्ष, सुरेश निर्मलकर, चेलन निर्मलकर, कशोर निर्मलकर। मुस्सिम समाज से अब्बास खान, अली खान, गुलजारखान, आसिफ अली, शेख समीर। मानिकपुरी समाज से रविन्द्र मानिकपुरी- अध्यक्ष, निर्मलदास मानिकपुरी, नीलमदास मानिकपुरी, पुरूषोत्तम दास मानिकपुरी, पिताम्बर मानिकपुरी शामिल थे।
विश्वकर्मा सनाज से कामता विश्वकर्मा अध्यक्ष, प्रदीप विश्वकर्मा, पन्नालाल विश्वकर्मा, तरूण विश्वकर्मा। वैष्णव समाज से दिलीप वैष्णव- अध्यक्ष, दीपक वैष्णव। सेन समाज से दिनेश श्रीवास अध्यक्ष, प्रितम श्रीवास, किर्तन श्रीवास। सोनी समाज से धर्मेन्द्र सोनी, मनोज सोनी कार्यकम में शामिल थे।
इसके अलावा शीला बोरकर, लता निर्मलकर, चंद्रिका साहू, मीना यादव, कामेश्वरी साहू, गुलाव अरकरा अध्यक्ष, निरा ठाकुर, पुष्पलता साहू, हीरोंदा ठाकुर, तीजन सिन्हा, सरस्वती सिन्हा, रेखा साहू, प्रीति साहू, संत्री अरकरा-सचिव सावित्री साहू, कौशल्या अस्करा, प्यारी बाई कुन्जाम, रामकुमारी अरकरा, रेवती अरकरा, राधिका यादव, चंदा बाई यादव, शिवरात्री श्रीवास, सुनीता नेताम, रीमा नेताम, सत्रावती नेताम, मोतीलाल साहू, सालीकराम तारम शामिल थे।
धनीराम कुंजाम, विक्रम अरकरा, अगनू पडौती, मंगल सिन्हा, सुनील साहू, रामसाय सिन्हा, पुनम सिंग तास्म, मुकेश साहू, प्रलय उके, रूपचंद वाकुर, सरित अरकरा, केवल सिंग अरकरा, ईश्वर अरकरा, अनील अरकरा, मोहित सिन्हा, हरी सिन्हा, राहूल बोरकर, जितेन्द्र अरकरा, निखील अरकरा, वासू अरकरा, सुभाष ताराम, देवानन्द साहू, नरेश साहू, योगेश सिन्हा, लालबंद सिन्हा, प्रेमलाल सिन्हा, उत्तम सिन्हा, लक्ष्मण साहू कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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