छत्तीसगढ़ में भारत बंद का मिलाजुला असर?
आदिवासी क्षेत्रों में बंद का व्यापक असर...!
दक्षिण कोसल टीमसुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 अगस्त को दिए गए फैसले में अनुसूचित जाति और जनजाति आरक्षण में कोटे के अंदर कोटा तथा कोटा के अंदर क्रीमीलेयर निर्धारित करने का अधिकार राज्यों को देने निर्णय पारित किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ दलित और आदिवासी संगठनों ने भारत बंद बुलाया है।

भारत बंद का देशभर के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है। प्रदेश के अलग अलग जिलों में कहीं स्कूल कॉलेज और दुकानें बंद कराई गई है तो कहीं बंद का बिल्कुल भी असर नहीं रहा। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सबसे ज्यादा बंद में शामिल हुआ।
भारत बंद का छत्तीसगढ़ में असर
इस भारत बंद का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ज्यादा असर दिख रहा है। बस्तर में सुबह से सभी बाजार बंद हैं। गाडिय़ों के पहिए थमे हुए हैं। सडक़ पर गाडिय़ां नजर नहीं आ रही है। सुबह 6 बजे से दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के लोग बंद कराने सडक़ पर निकल पड़े। नेशनल हाइवे पर ट्रकों की लंबी लाइनें लगी हैं। हालांकि भारत बंद के दौरान मेडिकल स्टोर्स, अस्पताल, पेट्रोल पंप, गैस, दूध, शासकीय कार्यालय, सभी शैक्षणिक संस्था, ऑटो - रिक्शा, निजी वाहन, एंबुलेंस को राहत दी गई है।
कोंडागांव में दुकानें बंद, भारी पुलिस बल तैनात-
कोंडागांव में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने देने गई भीड़ हिंसक हो गई। भीड़ ने बैरिकेड तोड़ दिया और कलेक्ट्रेट परिसर में घुस गई। इस दौरान काफी देर तक हंगामा हुआ। हालांकि मौके पर मौजूद प्रशासन ने भीड़ को काबू किया। हालांकि राजधानी रायपुर में बंद का असर देखने को नहीं मिला। रायपुर में कुछ दुकानें ही बंद रहीं। ज्यादातर मार्केट सुबह से ही खुले रहे।
कांकेर
कांकेर में भारत बंद कराने निकले एसटी एससी समुदाय के लोग। शांतिपूर्ण रहा बंद।
दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा में भारत बंद का बड़ा असर - दंतेवाड़ा जिले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के एक दिवसीय भारत बंद का असर दिख रहा है। सुबह 5.30 बजे से ही लोग बस स्टैंड चौक में आ कर धरने पर बैठे हैं। दंतेवाड़ा किरंदुल बेचली में एनएमडीसी को भी पूर्ण बंद रखा गया है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट और आवागमन और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह बंद है।
डोंगरगांव
डोंगरगांव में सुबह से ही अनुसूचित जाति जनजाति के लोग सडक़ जाम कर बंद करने की घोषणा कर दी। घंटो आवाजाही बंद रही।
सूरजपुर में बंद-
सूरजपुर में नेशनल हाइवे 43 पर प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम किया है। प्रदर्शनकारियों ने 2 घंटे से नेशनल हाइवे जाम कर रखा है। इस दौरान हाइवे में दोनों ओर गाडिय़ों की लंबी लाइन लग गई है। लोगों की आवाजाही पर प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंध लगा दिया है।
जशपुर में आंशिक असर
जशपुर जिले में भारत बंद का आंशिक असर देखने को मिला। बंद समर्थकों ने रैली निकालकर दुकानों को बंद करवाया। इस दौरान केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी भी की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संविधान में छेड़छाड़ की जा रही है, जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। रैली में शामिल दलित आदिवासी वर्ग के प्रदर्शनकारी ‘संविधान से छेड़छाड़ बंद करो’ और ‘भारत माता की जय’, ‘केंद्र सरकार होश में आओ’ के नारे लगाते हुए नजर आए। रैली के अंत में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उनकी मांग का उल्लेख किया गया है।
राजनांदगांव
राजनांदगांव में अनुसूचित जाति जनजाति संयुक्त मोर्चा ने एक दिन पहले ही बाईक रैली निकाल कर बंद का आह्वान किया था। राजनांदगांव चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने बंद करने से मना कर दिया। बावजूद राजनांदगांव में मिलाजुला असर रहा। सबेरे 8 बजे से लेकर 4 बजे तक बंद का आयोजन किया गया। 3:30 बजे राष्ट्रपति के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया। बंद शांतिपूर्ण रही। किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं घटी। शासन प्रशासन ने चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी।
धमतरी में बंद का नहीं दिखा असर- भारत बंद का धमतरी में मिला जुला असर देखने को मिल रहा है। शहर में ज्यादातर दुकानें खुली रखी गई हैं. लोगों का आवागमन भी आम दिनों की तरह जारी है।
दुर्ग - भिलाई में नहीं दिखा बंद का असर-
यहां भी अनुसूचित जाति जनजाति संयुक्त मोर्चा ने पावरहाऊस से लेकर दुर्ग तक रैली निकाल कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। दुर्ग जिले में भारत बंद का असर नहीं दिख रहा है। सभी मार्केट और बाजार खुले हुए हैं।
रायपुर में बंद का मिला जुला असर-
रायपुर में बंद का असर देखने को नहीं मिल रहा है। बताया जाता है कि 2 बजे तक बंद का आंशिक प्रभाव रहा। सभी प्राइवेट और गवर्नमेंट स्कूल खुले हुए हैं। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने भी बंद का समर्थन नहीं किया है। लिहाजा मार्केट खुले हैं।आवगमन भी आम दिनों की ही तरह चल रही है।
कवर्धा में बंद का असर- कबीरधाम जिले में भारत बंद का मिला जुला असर देखने को मिल रहा है। छोटी दुकानें, टपरी, होटल, यात्री बस रोज की तरह चालू है। मेन मार्केट, बड़ी दुकान बंद है। जिला प्रशासन की टीम व बड़ी संख्या में पुलिस बल चौक चौराहे में तैनात है. पुलिस अधिकारी व जवानों ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला है। सडक़ों पर आंदोलनकारी बंद कराने निकल रहे हैं।
सरगुजा में भारत बंद का असर-
आदिवासी बाहुल्य होने के बाद भी सरगुजा में बंद का असर देखने को नहीं मिल रहा है। स्कूल, कॉलेज, दुकानें सब खुले हुए हैं।
बिलासपुर में बंद का मिला जुला असर-
बिलासपुर जिले में बंद का असर देखने को नहीं मिल रहा है। सभी निजी और सरकारी स्कूल खुले हैं। बिलासपुर पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी संपूर्ण लॉकडाउन का पोस्टर को लेकर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने फर्जी बताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
जांजगीर चांपा में बंद का असर-
जांजगीर चांपा में भारत बंद का दिख रहा असर - दलित आदिवासी तथा ओबीसी महासभा के आह्वान पर भारत बंद का जांजगीर में असर दिख रहा है। अनुसूचित एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग सुबह से सडक़ों पर निकलकर दुकानें बंद करा रहे हैं। जांजगीर के नेताजी चौक, कचहरी चौक, नैला रोड, केरा रोड में सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया है। ज्यादातर निजी स्कूलों की गाडिय़ां भी बच्चों को लेने स्कूल नहीं पहुंची।
जगदलपुर
जगदलपुर में असर-
बस्तर में भारत बंद का बड़ा असर देखने को मिला। समाचार के साथ मुख्य तस्वीर जगदलपुर के लालबाग मैदान की है। अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे आदिवासियों ने इस भारत बंद में अपनी अभिव्यक्ति बढ़ चढ़ कर दी।
आज भारत बंद को चेंबर का समर्थन नहीं
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, रायपुर का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के आकस्मिक बंद से छोटे कारोबारियों को काफी नुकसान होगा, इसलिए वह समर्थन देने में असमर्थ हैं। भारत बंद का समर्थन देने को लेकर मंगलवार शाम चेंबर भवन में छत्तीसगढिय़ा सर्व समाज महासंघ और सर्व समाज के पदाधिकारी पहुंचे।
चेंबर अध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि बैठक में चेंबर के पदाधिकारी के साथ सर्व समाज के पदाधिकारियों की गहन चर्चा हुई। चेंबर से संबद्ध राष्ट्रीय संगठनों से ‘भारत बंद’ के विषय पर चर्चा की गई, जिसमें राष्ट्रीय संगठनों ने अनभिज्ञता जताते समर्थन नहीं दिया।
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