अचानकमार टाइगर रिजर्व में काला चीता? 

वन मंत्री केदार कश्यप ने आज चित्र फेसबुक में जारी की 

दक्षिण कोसल टीम

 

सबसे बड़ी बात यह है कि एटीआर के उप संचालक यूआर गणेश ने कल जो फोटो मीडिया को जारी की है उसमें यह काला तेंदुआ अपने सामान्य रंग के जोड़ीदार के साथ दिख रहा है। याने दोहरी खुशी इस बात की अगली खुशी उनके शावकों की मिलेगी। यह तब पता लगेगा कितने शावक काले हुए हैं। 

अब तक सामान्य और ब्लैक पैंथर के जोड़ी की फोटो कर्नाटक के काबिनी फारेस्ट रिजर्व से मीडिया में देखी जाती थी। कोई डेढ़ दशक पूर्व सक्ति के पास काला तेंदुआ पिंजरे में फंस गया था। जिसे बिलासपुर के चिडिय़ाघर कानन पेंडारी लाया गया था। सफर में वह पिंजरे से निकलने की कोशिश में वह काफी घायल हो गया था जिसे बचाया नहीं जा सका।

प्राण चड्डा कहते हैं कि अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) में काला तेंदुआ...! (मेलानिस्टिक) पहली बार 2020 में फोटो कैप्चर हुआ था। अब तक कर्नाटक के काबिनी से काले और सामान्य पैंथर के जोड़े की फोटो मीडिया में अधिक देखी जाती थी लेकिन अब छतीसगढ़ का एटीआर भी दोनो की फोटो साथ देखा जा सकेगा। 

ब्लैक पैंथर क्या है? 

लोगों को यह गलत धारणा है कि ब्लैक पैंथर एक अलग प्रजाति है। यह सच नहीं है, यह एक अलग प्रजाति नहीं है, बल्कि एक सामान्य तेंदुआ है जिसमें एक जीन होता है जो गहरे रंग का रंग बनाता है।

मेलानिस्टिक तेंदुओं को आमतौर पर ब्लैक पैंथर (काला चीता) कहा जाता है, उन्हें ब्लैक लेपर्ड के नाम से भी जाना जाता है और यह शब्द मेलानिस्टिक जगुआर पर भी लागू होता है। ब्लैक पैंथर को इससे बेहतर छलावरण की मदद मिलती है।

ब्लैक पैंथर तेंदुए (पैंथेरा पार्डस) और जगुआर (पैंथेरा ओनका) का मेलानिस्टिक रंग रूप है। दोनों प्रजातियों के ब्लैक पैंथर में अतिरिक्त काले रंगद्रव्य होते हैं, लेकिन उनके विशिष्ट रोसेट भी मौजूद होते हैं।

उन्हें ज़्यादातर उष्णकटिबंधीय जंगलों में देखा गया है, अफ्रीका और एशिया में काले तेंदुए और दक्षिण अमेरिका में काले जगुआर के साथ। तेंदुए में मेलानिज़्म एक अप्रभावी एलील के कारण होता है, और जगुआर में एक प्रभावी एलील के कारण होता है।

भारत के पश्चिमी घाटों में 2010 और 2012 में कास पठार आरक्षित वन में और 2012 में भद्रा वन्यजीव अभयारण्य में काले तेंदुओं को देखा गया और उनकी तस्वीरें ली गईं।

2015 में, महाराष्ट्र में सतारा के पास एक राजमार्ग पर एक मृत काला तेंदुआ पाया गया था। मई 2012 में, नेपाल के कंचनजंगा संरक्षण क्षेत्र में 4, 300 मीटर (14,100 फीट) की ऊंचाई पर एक काले तेंदुए की तस्वीर ली गई थी। 

ब्लैक पैंथर की छत्तीसगढ़ के अचानकमार के जंगलों में उपस्थिति की पुष्टि हो गई है। ब्लैक पैंथर दक्षिण अफ्रीका व एशिया के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाए जाते हैं।

अब छत्तीसगढ़ में भी ब्लैक पैंथर की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ में पर्यटन  को बढ़ावा मिलेगा। विशेषकर अचानकमार के जंगलों में भी टूरिस्टों आवाजाही बढ़ जाएगी।


Add Comment

Enter your full name
We'll never share your number with anyone else.
We'll never share your email with anyone else.
Write your comment

Your Comment