नक्सलियों के संदेह में कलाकार कलादास के घर एनआईए का छापा
1 अगस्त को एनआईए की टीम ने रांची बुलाया
दक्षिण कोसल टीमभिलाई में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और रेला कला मंच से जुड़े कलादास डहेरिया के घर आज सुबह एनआईए की छापामारी की कार्रवाई हुईं। एनआईए की टीम ने रांची में दर्ज एक मामले की पूछताछ के लिए पहुंची थी। इधर स्थानीय पुलिस ने कहा है कि एनआईए की टीम ने कुछ जगहों पर छापा मारा है। लेकिन पुलिस ने संबंधित मामलों की जानकारी से इंकार किया है।

सीजीखबर के अनुसार एक स्थानीय अधिवक्ता ने बताया कि सुबह 4 - 5 गाडिय़ों में भर कर आए लोगों ने छापामारी की कार्रवाई की, इन गाडिय़ों में बड़ी संख्या में पुलिस के जवान भी शामिल थे। इस दौरान आसपास के घरों से भी लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई।
कलादास डहेरिया मज़दूर संगठनों में सक्रिय रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की मज़दूर कार्यकर्ता समिति से संबद्ध हैं। इसके अलावा वे रेला नामक एक सांस्कृतिक संगठन के भी मुखिया हैं।
पूछताछ के बाद टीम लौटी
कई घंटों की पूछताछ और जांच के बाद एनआईए की टीम लौट गई। यह टीम रांची से आई थी, जिसका नेतृत्व एनआईए के उपाधीक्षक अभय कुमार सिंह हैं। कलादास डहरिया ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि 'एनआईए की टीम तडक़े पांच बजे के आसपास घर पहुंची थी।'
उन्होंने कहा- ‘टीम में शामिल लोग मुझसे जानना चाह रहे थे कि मेरा देश विरोधी तत्वों या माओवादियों से कोई संबंध हैं क्या? मुझे जानने वाले इस बात को बेहतर जानते हैं कि मैं किस तरह मज़दूरों, किसानों के हक़ के लिए काम करता हूं। मुझे 1 अगस्त को एनआईए की टीम ने रांची बुलाया है।'
उन्होंने कलादास से रांची में दर्ज़ एक मामले की संलिप्तता के बारे में जानना चाहा।कलादास ने कहा कि वे सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ़ बोलते हैं, इसलिए उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे जनता के हक़ में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
किस मामले में हुई पूछताछ?
एनआईए ने रांची में 2022 में दर्ज़ एक मामले में पूछताछ का हवाला दिया है। एनआईए के दस्तावेज़ों के अनुसार पिछले साल 23 अगस्त को एनआईए रांची ने एक मामला दर्ज़ किया था (दर्ज मामले के अनुसार 2 जुलाई 2022 को झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने विश्वसनीय जानकारी के आधार पर, 3 व्यक्तियों साखु प्रधान, समरु खडिय़ा और सुखराम मुंडा को गुमला, झारखंड से हिरासत में लिया गया था)।
जहां उनके पास से सीपीआई माओवादी से संबंधित एक पत्र सुखराम मुंडा के पास से जप्त किया गया था। एनआईए के अनुसार पूछताछ करने पर गिरफ्तार व्यक्तियों ने यह राज खोला कि वे सीपीआई माओवादी के सौरभ दा, बच्चा सिंह, लाज़िम अंसारी, नासिर अंसारी, छोटू और सुकरा उरांव के लिए काम कर रहे थे।
उनसे जो पत्र बरामद किया गया था, वह माओवादी नेता सौरभ दा द्वारा लिखा गया था और उन्हें दामोदर तुरी द्वारा दिया गया था। इस मामले में 2 जुलाई 2022 को चाईबासा के आनंदपुर थाने में एफआईआर क्रमांक 16/2022 दर्ज किया गया था। इसके बाद एनआईए ने इस मामले में 23 अगस्त 2023 को रांची में मामला दर्ज किया और एनआईए के पुलिस उपाधीक्षक सुबोध शर्मा को इस मामले में जांच अधिकारी बनाया गया।
समाजिक और जन संगठनों ने क्या कहा?
जन संघर्ष मोर्चा, छत्तीसगढ़ की ओर से लखन सुबोध, प्रसाद राव, एडवोकेट शाकिर कुरैशी, सौरा, सविता बौद्ध, चंद्रकला ताराम, तुहिन देव ने कहा कि एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) की टीम द्वारा सौंपे गए कागजात से पता चलता है कि कलादास को झारखंड में एक पुराने एनआईए मामले के सिलसिले में गवाह के तौर पर 1 अगस्त को एनआईए रांची के समक्ष उपस्थित होना है।
इन कागजातों से यह स्पष्ट नहीं है कि कलादास और झारखंड के इस मामले के बीच क्या संबंध है। जिस तरह से छापेमारी की गई, उसका उद्देश्य श्रमिकों को डराना और उचित वेतन के लिए उनके संघर्ष को रोकना है।
कुछ दिन पहले ही कलादास ने राज्य सरकार को एक ज्ञापन भेजा था, जिस पर कई लोगों ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें हसदेव में प्रस्तावित पेड़ों की कटाई और चार श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन का विरोध किया गया था और बस्तर में ग्रामीणों की सुरक्षा और एसीसी में सीमेंट वेज बोर्ड लागू करने की मांग की गई थी।
पीयूसीएल ने फर्जी मामलों में फंसाने की आशंका जताई
पीयूसीएल के राष्ट्रीय परिषद और छत्तीसगढ़ इकाई के पदाधिकारी कविता श्रीवास्तव (अध्यक्ष), वी सुरेश (महासचिव) राष्ट्रीय परिषद, डिग्री प्रसाद चौहान, अध्यक्ष पीयूसीएल और आशीष बेक, महासचिव, पीयूसीएल, छत्तीसगढ़ ने कहा कि एनआईए ने उन कारणों का खुलासा नहीं किया कि वे उसके घर की तलाशी क्यों ले रहे थे, अनुमति न देकर कानून और संवैधानिक सुरक्षा के प्रति अपनी उपेक्षा दिखाई।
उनके वकीलों ने उनसे मिलने के लिए सर्च वारंट नहीं दिखाया और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का हैश मूल्य प्रदान नहीं किया। उनके साधारण घर की 4 घंटे की तलाशी के बाद, एनआईए उनके फोन, एक लंबे समय से बंद पड़े लैपटॉप और एक पेन ड्राइव के साथ वापस चली गई, जिसमें विभिन्न कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किए गए पैम्फलेट का संग्रह था।
मुकदमा चलाकर उत्पीडऩ एनआईए अधिकारियों का चौंकाने वाला आचरण पड़ोसियों के घर पर ताला लगा दिया गया, किसी वकील को अनुमति नहीं दी गई, कोई हैश वैल्यू नहीं दी गई। एनआईए ने जिस तरह से तलाशी ली वह पूरी तरह से अवैध है। उन्होंने कलादास को यह नहीं बताया कि वे किस विशेष मामले की जांच कर रहे हैं, बल्कि शुरुआत में ही उन्हें बता दिया था कि उनके पास जानकारी है कि वह भारत विरोधी गतिविधि (राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों) में लगे हुए हैं।
तलाशी 2023 के एनआईए मामले के संबंध में की गई थी
पूछताछ के दौरान वकीलों को अनुमति नहीं थी, जो आपराधिक संहिता और कई एससी निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने नंदिनी सत्पथी बनाम पीएल दानी (1978) ने स्पष्ट रूप से कहा कि वकील की उपस्थिति कुछ मामलों में एक संवैधानिक दावा है। इसके अलावा यह माना गया कि पुलिस पूछताछ के समय आरोपी के वकील को उपस्थित रहने की अनुमति दे सकती है।
कोर्ट ने ऐसा माना आत्म-दोषारोपण के खिलाफ अधिकार [अनुच्छेद 20 (3)] और एक वकील से परामर्श करने का अधिकार [अनुच्छेद 22(1)] को आगे बढ़ाया जाएगा यदि वकील को परीक्षा के दौरान उपस्थित रहने की अनुमति दी गई हो।
इसे डीके बसु दिशानिर्देशों और सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य (2010) में दोहराया गया है। पीयूसीएल इस बात से बेहद नाराज है कि एनआईए ने कोई हैश वैल्यू नहीं दी या कलादास से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की क्लोन प्रतियां बनाने पर सहमति व्यक्त की।
पीयूसीएल का मानना है कि यह पूरी तलाशी और जब्ती अवैध है। जब एनआईए टीम ने कलादास को 1 अगस्त, 2024 को झारखंड में एनआईए रांची के सामने खुद को पेश करने के लिए एक मेमो सौंपा, तब उन्हें पता चला कि तलाशी 2023 के एनआईए मामले के संबंध में की गई थी।
मामला संख्या आरसी - 03/2023 /एनआईए/आरएनसी, दिनांक 23/08/2023, यूएपीए अधिनियम की धारा 10 और 13, सीएलए अधिनियम की धारा 17 के तहत। एक गवाह के रूप में। इन कागजातों से यह स्पष्ट नहीं है कि कलादास और झारखंड के इस मामले का क्या संबंध है।
पीयूसीएल की मांग है कि एनआईए बताए कि वह उपरोक्त मामले की जांच कैसे कर रही है, जबकि एफआईआर केवल धारा 10 और 13 के तहत है। यूएपीए, जो गैरकानूनी गतिविधियों से संबंधित है न कि आतंकवादी गतिविधि से?
कलादास डेहरिया को क्यों बनाया निशाना? कौन हैं कलादास?
कलादास छत्तीसगढ़ पीयूसीएल से जुड़े हैं तथा सांस्कृतिक सक्रियता के लिए जाने जाते हैं, उनका सांस्कृतिक मंच रेला, प्रतिरोध में गीत गाता है, नुक्कड़ नाटक कर अभिव्यक्ति व्यक्त कर रहा है। लोगों की तकलीफों के लिए लड़ते हैं। 90 के दशक से वह छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जुड़े हुए हैं।
ट्रेड यूनियन आंदोलन के साथ छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के मजदूर कार्यकर्ता समिति के सदस्य हैं। तथा एनएपीएम के एक राष्ट्रीय समन्वयक, छत्तीसगढ़ से जुड़े हुए हैं। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और जन संघर्ष मोर्चा, प्राकृतिक संसाधनों और लोगों को बचाने के लिए कई संगठनों के लिए कार्य करते हैं।
कलादास को इस तरह डराना-धमकाना उचित नहीं
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर ने कहा है कि कलादास जैसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक, ट्रेड यूनियन और मानवाधिकार कार्यकर्ता पर भारतीय राज्य के इस हमले का केवल एक ही उद्देश्य है कि जो लोग मजलूमों के हक और हुकूक के लिए कार्य करते हैं उन्हें डराना-धमकाना, ताकि वे उचित जीने लायक वेतन के लिए संघर्ष ना कर सकें।
उन्होंने कहा कि हमारे पास विधान सभा या लोक सभा नहीं हैं कि हम अपनी आवाज अर्थात मजदूरों और किसानों की आवाज वहां उठा सके, इसलिए हम सडक़ों पर शासन प्रशासन को सूचित कर अपने गतिविधियों की खुलासा कर संवैधानिक और अहिंसक आंदोलन करते हैं।
उन्होंने कहा है कि सर्वविदित है कि कलादास उद्योगपतियों के हितों के साथ बस्तर और हंसदेव अरण्य के प्राचीन जंगल के प्रस्तावित पेड़ों की कटाई के खिलाफ बड़े विरोध का हिस्सा थे, इसलिए उन्होंने राज्य सरकार को एक और ज्ञापन भेजा था, जिस पर कई लोगों ने हस्ताक्षर किए थे।
वह लोगों को मजदूर किसान तथा मानवाधिकार के संगठन में लगातार संगठित भी कर रहे थे और चार श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन के खिलाफ कई बार सरकार को पत्र भी लिख चुके थे।
ठाकुर ने कहा है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर एसीसी में सीमेंट वेज बोर्ड को लेकर चल रहे संघर्ष के अलावा बस्तर में ग्रामीणों की अंधाधुंध न्यायेतर हत्याओं का मुद्दा भी उठाया था। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि कालादास छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और दोनों के लिए खतरा था।
भारत सरकार, कॉर्पोरेट परियोजनाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण असहमतिकर्ता के रूप में, जो आदिवासियों की पर्यावरण और आजीविका सुरक्षा, श्रमिकों के उचित वेतन और अच्छे जीवन स्तर के अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन के लिए खतरा है।
उन्होंने कहा कि हमें संदेह है कि उपरोक्त यूएपीए मामले की जांच में आगे न घसीटे। उसके पास से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लौटाएं और कानून के शासन और संवैधानिक व्यवस्था का ईमानदारी से पालन करें। संघर्षरत लोगों की सरकारी नीति के खिलाफ रोजमर्रा की सक्रियता और असहमति को अपराधीकरण देना बंद करें।
शंकर गुहा नियोगी के आंदोलन से जुड़े हुए हैं
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के मजदुर कार्यकर्त्ता समिति तथा नगरीय निकाय जनवादी कामगार सफाई यूनियन के रमाकांत बंजारे, महेश साहू, कल्याण पटेल, जयप्रकाश नायर, मनोज कोसरे, केजू यादव, दशमत बाई, रामकुमार सिन्हा, उर्मिला सिन्हा, शालिनी गेरा ने कहा है कि कलादास श्रमिकों के संघर्षों के साथ सन 1990 से शंकर गुहा नियोगी के आंदोलन से जुड़े हुए हैं। वे जन गीत के प्रसिद्ध गायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी हैं, और रेला मंच से जुड़े हैं।
सुबह के समय जब पुलिस कलादास के घर पर थी, तो कई पुलिस अधिकारी उनकी संकरी गली में बाहर तैनात थे, जो पड़ोस के किसी भी निवासी को गली में कदम रखने से रोक रहे थे। उन्होंने बाहर से दरवाजे भी बंद कर दिए, लोगों को अपनी खिड़कियां खोलने से भी मना किया गया और यहां तक कि लोगों को पीने का पानी भरने से भी रोक दिया गया जबकि नगरपालिका के नलों पर पानी सुबह सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है।
तमाम संगठनों का कहना है कि पूछताछ की जो तरीका अपनाया है वह लोगों के लोकतान्त्रिक अधिकारों के लिए लडऩे वाले के संविधान में दिए अधिकारों का हनन हैं। नगरीय निकाय सफ़ाई कामगार यूनियन का कहना है कि पिछले कुछ सालों से एसीसी सीमेंट जो अब अडानी सीमेंट हो गया हैं, चंदूलाल चंद्राकर हॉस्पिटल, नगरीय निकाय के सफ़ाई कामगारों की समस्या, हसदेव में चल रहे संघर्ष, बस्तर में आदिवासियों के जल, जंगल संघर्ष के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते रहे हैं।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के जनकलाल ठाकुर तथा अन्य का कहना है कि एक संस्कृति कर्मी के हैसियत से लगातार कमजोर तबकों के लिए गीत लिखकर गाने के माध्यम से जागरूकता का संदेश देते हैं। शायद उनका यही काम शासन प्रशासन को पसन्द नहीं आ रहा। इस पूरे मुद्दों से दूर रखने के लिए ही ये घृणित कार्य किया गया हैं।
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