किसानों का एक धरना ओडिसा में भी

सीमा आजाद

 

जगतसिंहपुर और ढिनकिया गांव का नाम आपने ज़रूर सुना होगा, जहां कोरियाई कंपनी पोस्को के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन चला था। ढिनकिया गांव इसका गढ़ था। आंदोलन की ताकत देखते हुए पोस्को ने अपने लिए यहां से भागने का सम्मानजनक रास्ता निकाल लिया, और चला गया।

लेकिन गांव वालों के शब्दों में "उनके भाग्य में लड़ना ही लिखा है।" बदले की कार्रवाई में सरकार ने पोस्को के समय अधिग्रहीत 2700 एकड़ ज़मीन जिंदल को दे दिया।

जिंदल वहां पर सीमेंट फैक्ट्री लगाएगा, उसके लिए पॉवर प्लांट लगाएगा, और माल सप्लाई के लिए पोर्ट बनाएगा।  

4004 एकड़ चिन्हित ज़मीन में से जिन लोगों ने मुआवजा लेकर 2700 एकड़ जमीन सरकार को सौंप दी थी, उनकी मुआवजा राशि खत्म हो गई है और वे अब दूसरों की ज़मीन पर मजदूरी के लिए आ रहे हैं।

ये तो एक मामला है, जिसके खिलाफ लड़ाई की तैयारी चल रही है।

फिलहाल यहां 20 साल पहले लगे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अपने "पारादीप हैदराबाद पाइपलाइन प्रोजेक्ट" के लिए गांव में जबरन घुसकर गांव की सार्वजनिक जमीन जिसे यहां के लोग "ठाकुर जमीन" कहते हैं पर पाइपलाइन लगाना शुरू कर दिया है।

पाइप लाइन के विरोध का कारण सिर्फ जमीन अधिग्रहण ही नहीं है, बल्कि गांव का पर्यावरण भी है, जो दूषित हो गया है। धान के खेत में भरे पानी में घुला हुआ तेल आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं।

गांव के लोगों का कहना है कि इससे लोगों को कैंसर हो रहा है और 8 लोगों की मौत हो चुकी है, कई तरीके के चर्म रोग फैल रहे हैं।

पानी में तेल घुल जाने के कारण सिर्फ धान नहीं पान और मछली की खेती भी प्रभावित हो रही है। बता दें कि यह क्षेत्र "धान पान और मीन" के लिए जाना जाता है।

यहां से देश भर में और विदेशों में भी पान की सप्लाई होती है। गांव वालों का कहना है कि "सरकार हमसे जान बूझ कर बदला ले रही है, क्योंकि हमने पोस्को को भगा दिया।"

गांव में कोई भी ऐसा नहीं होगा जिस पर कोई केस न हो, बच्चों तक पर मुकदमें दर्ज हैं। मुकदमों का एक प्रकार नहीं है, हर तरीके के मुकदमों से उन्हें दबा दिया गया है, महिलाओं तक पर रेप का केस दर्ज है, जिससे लोग जूझ रहे है।

ज़ाहिर है ये मुकदमें आईओसीएल पाइप लाइन प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने में अवरोध डाल रहे हैं, लेकिन फिर भी धरना धीरे धीरे बड़ा हो रहा है, लोग एक नई लड़ाई के लिए तैयार हो रहे हैं।

ढिनकिया गांव के भाग्य में लड़ना ही लिखा है, साथ ही ये भी सच है, इस गांव ने देश भर को लड़ना सिखाया है। 27 फरवरी से यहां शुरू हुआ धरना आप सबका समर्थन मांग रहा है।
 


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