दिल दहला देने वाली खबर, विचलित कर देने वाली तस्वीर
बच्चे के लिए संसार का सबसे सुरक्षित स्थान है माँ की गोद
दक्षिण कोसल टीमजनवरी 2024, दक्षिण बस्तर बीजापुर के जंगलों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच गोलीबारी में छह माह की बच्ची मंगली सोढ़ी की मृत्यु पर, तस्वीर मुकेश चन्द्राकर ने भेजकर कुछ लिखने को कहा था, उसकी आवाज़ भारी थी, उसने यह कहते हुए लिखने को कहा था: "हिम्मत नहीं हो रही है दद्दा फ़ोटो देखने की!"

दिल दहला देने वाली खबर है. विचलित कर देने वाली तस्वीर है. पुलिस के दावे के मुताबिक गंगालूर थानाक्षेत्र के मूतवंडी के जंगलों में पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई.
पुलिस ये भी दावा कर रही है कि क्रॉस फायरिंग की चपेट में आकर मां के गोद में सो रही एक छः माह की मासूम बच्ची की मौत गोली लगने से हुई है.
बंदूक से निकली उसी गोली ने बच्ची के लिए पूरी दुनिया में सबसे महफूज हाथों को भी जख्मी कर दिया.
वीडियो में छः माह की मासूम बच्ची के शव को गोद में लिए खुद के इलाज के लिए अस्पताल की सीढ़ियों में चढ़ रही उस बेबस मां को देखा जा सकता है, मगर उसके दर्द को महसूस नहीं किया जा सकता.
बस्तर में हिंसा प्रतिहिंसा के बीच निरीह आदिवासियों की चिताओं का ये सिलसिला आखिर थमेगा कब?
यह रिपोर्ट बस्तर से मुकेश चन्द्राकर की है।
यायो
मंगली को नहीं मालूम था,
माँ क्या है ? माँ से कहना क्या है ?
उसे नहीं मालूम था,
उसकी यायो* का नाम मासे है।
उसे महसूस होती थी,
चिर परिचित सदियों की सुरक्षा
नहीं ! शब्द से नहीं।
मासे के स्पर्श से, उसके स्वर से !
जब मासे, मंगली के रोने पर आवाज़ देती,
उसे गोद में उठा लेती और
आधुनिकता के ढोंग से बहुत दूर बने मिट्टी के घर के आंगन में ले आती
उसे खुले आसमान के नीचे
ताज़ी, शीतल हवा से मिलाती।
शीत उसके बदन को छू भी नहीं पाती
सुबह का सूरज दिखाकर
उसे ममता का गीत सुनाती
स्तन का अमृत पिलाती।
फिर उसके माथे को, गालों को, हथेलियों, पैरों को बेतहाशा चूमकर,
करोड़ों साल पुरानी ममता, पागलों की तरह ! कुछ तो भी डा डा डा, डी डी डी जैसा बड़बड़ाती !
मंगली के लिए,
जो गीत प्रकृति ने गाया था
अस्तित्व का चीत्कार हो गया
मासे के हृदय का रुदन बन गया,
मंगली के पुकार की वो सुबह,
महुए की महक जिसमें घुल न सकी थी।
दहाड़ते बंदूक से निकली एक गोली ने, सूर्योदय रोक दिया, सबकुछ अमावस कर दिया !
इतिहास में दर्ज है पहला मानव महिला थी, इतिहासकारों ने उसका नाम लूसी दर्ज किया है !
ओ नेकदिल इतिहासकारों !
भूल सुधारकर दर्ज करो !
उसका नाम लूसी नहीं, मंगली है, मंगली की हत्या नरभक्षी पशुओं ने नहीं की है ! वह क्रॉस फायरिंग में मारी गयी है।
मंगली हज़ारों युद्धों में लाखों बार करोड़ों मौतें मर चुकी है। यह कोई दुर्घटना नहीं है, इतिहास की सबसे अद्भुत और अविश्वसनीय घटना है, क्योंकि मंगली को इसके बारे में भी कुछ नहीं मालूम है।
*यायो : स्थानीय गोंडी बोली का शब्द, अर्थ माँ।
यह पंक्ति बस्तर से यूकेश चन्द्राकर की है।
जनवरी 2024, दक्षिण बस्तर बीजापुर के जंगलों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच गोलीबारी में छह माह की बच्ची मंगली सोढ़ी की मृत्यु पर...
तस्वीर मुकेश चन्द्राकर ने भेजकर कुछ लिखने को कहा था, उसकी आवाज़ भारी थी, उसने यह कहते हुए लिखने को कहा था : "हिम्मत नहीं हो रही है दद्दा फ़ोटो देखने की!"
भाई नहीं कहता तो यह अभी सम्भव नहीं था कि अभी ही लिक्खूं । हालांकि जो मैंने पहले उसे लिखकर दिया था वह था :
""बच्चे के लिए संसार का सबसे सुरक्षित स्थान है माँ की गोद"
मंगली! अपनी मां की गोद में थी!
हम भाईयों की तरफ से मंगली के लिए...
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13/01/2024
Varsha santosh kunjam
एक नन्ही परी के साथ इतना दर्दनाक हादसा, निरीह आदिवासियों के साथ यह अत्याचार कब बंद होगा। मेरी सांसे रूक सी गई जब मैने बच्ची का फोटो देखा।
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