हिंट एंड रन कानून के विरोध में देश के ट्रक चालकों की हड़ताल
रैश ड्राइविंग नहीं की तो सजा नहीं होगी
सुशान्त कुमारपूरे देश में रोजाना औसतन एक लाख से ज्यादा ट्रक देश के अलग-अलग हिस्सों में दवाओं को पहुंचाते हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक तकरीबन इससे ज्यादा ही ट्रक फल और सब्जियों को पहुंचाते हैं। तकरीबन साढ़े चार लाख से ज्यादा ट्रक रोजाना एक जोन में रोजमर्रा से जुड़ी जरूरत के अन्य छोटे-छोटे सामान पहुंचाते हैं। लेकिन पिछले 48 घंटों में दवाइयों से लेकर फल और सब्जियां समेत डीजल, पेट्रोल और सीएनजी जैसी जरूरतें सप्लाई करने के लिए ट्रक नहीं चल रहे हैं।

देश में ट्रक चालकों की हड़ताल का बड़ा असर पडऩा शुरू हो गया है। इस दौरान आपातकालीन बैठक भी बुलाई गई है। गृह मंत्रालय के साथ भी ट्रक चालकों के संगठन की बातचीत चल रही है। वहीं, सरकार ने भी ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल का लोगों पर असर न पड़े, इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
केंद्र सरकार के हिंट एंड रन कानून के विरोध में ट्रक चालक हड़ताल पर हैं। इन चालकों का कहना है कि ये कानून गलत है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर देश के लगभग सभी राज्यों में ट्रक चालकों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर दी है। दिल्ली, हरियाणा, यूपी और मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक ट्रक रोक दिए गए हैं। चालकों ने अपने-अपने ट्रक सडक़ों के किनारे खड़े कर दिए हैं। ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
सडक़ों पर जाम की स्थिति
सडक़ों पर गाडिय़ों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। इस दौरान चालाकं ने ‘काला कानून वापस लो'’ के नारे भी लगा रहे हैं। चालक हाईवे जाम कर इस कानून का विरोध जता रहे हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन को कड़ी चेतावनी भी दी हैं।
पेट्रोल पंप पर भीड़?
हड़ताल की वजह से कई जगहों पर पेट्रोल पंप पर लंबी लाइनें लगी हैं। छत्तीसगढ़ में अफवाह की तरह बात उड़ गई है कि तीन दिनों तक पेट्रोल नहीं मिलेगी। लोग पेट्रोल की जमाखोरी करना शुरू कर दिए हैं। पेट्रोल पंप पर गाडिय़ों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रक ड्राइवरों की ये हड़ताल तीन दिन तक चलेगी। जिसकी वजह से पेट्रोल पंप तक नहीं पहुंच पाएगा।
बताते हैं कि इस खबर के फैलते ही लोग पेट्रोल पंप पर पहुंचने लगे, जिसकी वजह से वाहनों की लंबी लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक महारा्र्र के नागपुर में भी हिट-एंड-रन कानून के खिलाफ ट्रक ड्राइवरों के विरोध प्रदर्शन के कारण पेट्रोल-डीजल की कमी का डर लोगों को सताने लगा है। इस वजह से पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ लग गई है।
नए कानून में क्या है?
बताया जा रहा है कि हाल ही में भारत सरकार ने इंडियन पीनल कोड को बदलकर भारतीय न्याय संहिता नाम का नया कानून बना दिया है। खबर यह भी है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इसे हरी झंडी भी मिल चुकी है। इसी कानून के एक प्रावधान को लेकर विरोध शुरू हो रहा है। ये प्रावधान है हिट एंड रन को लेकर।
नया कानून कहता है कि अगर सडक़ दुर्घटना में किसी की मौत हो जाती है और गाड़ी चालक मौके से फरार हो जाता है तो उसे 10 साल की सजा हो सकती है। साथ ही 7 लाख रुपए जुर्माना भी देना पड़ सकता है। पहले इस मामले में कुछ ही दिनों में आरोपी ड्राइवर को जमानत मिल जाती थी और वो बाहर आ जाता था। हालांकि इस कानून के तहत भी दो साल की सजा का प्रावधान था।
नए कानून का पहले भी ट्रक चालकों ने काफी विरोध किया था, लेकिन जब सरकार ने फैसला नहीं बदला तो उन्होंने हड़ताल का फैसला ले लिया। इनका कहना है कि नया कानून गलत है। सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनोज अभिज्ञान का कहना है कि रैश ड्राइविंग नहीं की तो सजा नहीं होगी।
रैश ड्राइविंग नहीं की तो सजा नहीं होगी
वे कहते हैं कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 106 के दो भाग हैं. पहले भाग धारा 106(1) में सामान्यतया उपेक्षापूर्वक किए जाने वाले कृत्य के द्वारा किसी की मृत्यु कारित कर देने पर 5 वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किए जाने की बात कही गई है और अगर उपेक्षापूर्ण कृत्य किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा मेडिकल प्रोसीजर के दौरान किया जाता है और परिणामस्वरूप किसी की मृत्यु कारित हो जाती है तो उसे 2 वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
सेक्शन के दूसरे भाग अर्थात् 106(2) में कहा गया कि अगर ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर द्वारा किए गए किसी उपेक्षापूर्ण कृत्य के कारण या रैश ड्राइविंग के कारण किसी की मृत्यु हो जाती है और वह वहां से पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना भाग जाता है तो उसे 10 साल के कारावास की सजा हो सकती है।
मनोज कहते हैं कि इसमें गलत क्या है? आप साबित कर दीजिए कि आपने उपेक्षापूर्वक या रैश ड्राइविंग नहीं की तो सजा नहीं होगी।
उपेक्षापूर्ण ढंग से ड्राइविंग करके किसी की मृत्यु कारित कर देने पर लगाया जाने वाला जुर्माना वाहन मालिक पर लगाया जाना चाहिए। बाकी सब तो ठीक ही है। मॉब लिंचिंग के खिलाफ़ भी कानून बनाया ही गया है इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि ड्राइवर को लोग पीट पीट कर मार डालेंगे।
अमीरजादे सडक़ पर चलने वालों को कीड़े मकोड़े जैसा समझते हैं
अधिवक्ता मनोज का कहना है कि उपेक्षापूर्ण और रैश ड्राइविंग गाड़ी से होने वाली दुर्घटना में कम और हल्के सजा का प्रावधान होने से होता यह है कि रैश ड्राइविंग करते अमीरजादे सडक़ पर चलने वालों को कीड़े मकोड़े जैसा समझते हैं. रैश ड्राइविंग और उपेक्षापूर्ण कृत्यों के लिए कड़े प्रावधान होने ही चाहिए।
रही ट्रक ड्राइवरों की बात तो यह अंतत: उनके हित में ही होगा. भविष्य में लॉजिस्टिक कंपनियों का विस्तार होगा और ये अपने ड्राइवर को अल्कोहल पीकर गाड़ी चलाना किसी भी हाल में एलाऊ ही नहीं करेंगे। ड्राइवरों के लिए बढय़िा हाल्टिंग सेंटर विकसित होंगे और ट्रेन ड्राइवरों की भांति हाल्टिंग सेंटर पर ड्राइवर को ड्यूटी चेंज करने का विकल्प भी उपलब्ध हो सकेगा। ड्राइवरों को फिक्स सैलरी, ड्राइविंग के फिक्स घंटे और बेहतरीन इंश्योरेंस आदि की मांग करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने ली महत्वपूर्ण बैठक
वहीं आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्रक चालकों की देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में उन्होंने प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति बनाये रखने के निर्देश दिए ताकि जनता को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि जनता तक सही जानकारी पहुंचे, प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था बनी रहे और भ्रामक जानकारी न फैले।
साय ने अफवाह फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी, समस्त संभागीय आयुक्त, आईजी, कलेक्टर, एसपी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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