उपन्यासकार संजीव को साहित्य अकादमी सम्मान
भारतीय साहित्य का बेंचमार्क संजीव
दक्षिण कोसल टीमप्रसिद्ध लेखक और उपन्यासकार संजीव की उपन्यास 'मुझे पहचानो' को इस वर्ष का साहित्य अकादमी सम्मान से नवाजा गया है। देश की 24 भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य की रचना करने वाले लेखकों को यह सम्मान दिया जाता है। इस कारण इन्हें भारतीय साहित्य का बेंचमार्क भी माना जाता है।

विजेता के नाम की घोषणा साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. के.श्रीनिवासराव ने नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित रवींद्र भवन में साहित्य अकादेमी मुख्यालय में की है। उन्होंने हिंदी भाषा के साथ ही अन्य भाषाओं के विजेताओं के भी नाम घोषित कर दिए हैं।
संजीव का जन्म 6 जुलाई, 1947, सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) के बांगरकलां गांव में हुआ है। संजीव ने 38 वर्षों तक रासायनिक प्रयोगशाला में कार्य करने के बाद स्वतंत्र लेखन किया।
7 वर्षों तक हंस समेत अनेक पत्रिकाओं के संपादन एवं स्तंभ लेखन का कार्य किया। अपने शोधपरक व वर्जित विषयों पर लेखन के लिए पहचानने जाते हैं। इनकी लगभग 150 कहानियां व 14 उपन्यास प्रकाशित हो चुकी है।
उनकी कृतियों में तीस साल का सफरनामा, आप यहां हैं, भूमिका, दुनिया की सबसे हसीन औरत, प्रेतमुक्ति, प्रेरणास्रोत, ब्लैक होल, खोज, गति का पहला सिद्धांत, गुफा का आदमी, आरोहण (कहानी संग्रह); किशनगढ़ के अहेरी, सर्कस, सावधान!
नीचे आग है, धार, पांव तले की दूब, जंगल जहां शुरू होता है, सूत्रधार, आकाश चम्पा, अहेर, फाँस, प्रत्यंचा (उपन्यास), रानी की सराय (किशोर उपन्यास), डायन और अन्य कहानियां (बाल-साहित्य) दर्ज है।
इसके आलावा उन्हें कथाक्रम सम्मान, अन्तरराष्ट्रीय इंदु शर्मा सम्मान, भिखारी ठाकुर सम्मान, पहल सम्मान, सुधा-स्मृति सम्मान, इफको का श्री लाल शुक्ल स्मृति साहित्य सम्मान से पुरष्कृत किया जा चुका है।
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